Dusshera 2021: मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है विजयदशमी, जानिए फिर क्यों नहीं कर सकते इस दिन विवाह
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प्रत्येक वर्ष अश्विन मास में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयदशमी या दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। इस बार दशहरा का त्योहार 15 अक्टूबर 2021 दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। सनातन धर्म में विजयदशमी को अधर्म पर धर्म की विजय के रुप में मनाया जाता है। दशहरा को अवगुणों को दहन करने का दिन माना गया है। इस तिथि को विजय का पर्व माना जाता है इसलिए इस दिन शस्त्र पूजन की भी परंपरा है। धार्मिक दृष्टि से तो विजयदशमी तिथि को बहुत शुभ माना ही गया है साथ ही ज्योतिष में भी इस तिथि को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस तिथि को सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली विजयदशमी कहा जाता है। इस दिन शुभ कार्यों को करने के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है, लेकिन इस दिन विवाह करना वर्जित माना जाता है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में कि क्यों नहीं किया जाता है दशहरा के दिन विवाह संस्कार।
इन शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ मानी गई है विजय दशमी
विजय दशमी को शुभ कार्यों को करने के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है। नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, कर्णवेध, यज्ञोपवीत व वेदारंभ आदि संस्कार करने के लिए यह तिथि श्रेष्ठ मानी गई है। इसके अलावा नए कार्य को आरंभ करने के लिए भी दशमी तिथि बेहद शुभ मानी गई है। विजयदशमी को वर्ष की सबसे पवित्र तिथियों में से एक माना जाता है, लेकिन इस दिन विवाह संस्कार नहीं किया जाता है।
जानिए क्यों नहीं किया जाता है विवाह संस्कार
सोलह संस्कारों में से विवाह को जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। विजयदशमी की तिथि वैसे तो शुभ मानी जाती है परंतु विवाह के लिए यह तिथि शुभ नहीं मानी जाती है इसलिए इस दिन विवाह करना वर्जित माना गया है। इसके पीछे कारण यह भी है कि इस समय चतुर्मास का समय चल रहा होता है। यह अवधि भगवान विष्णु की निद्रा की मानी गई है, इस समय विवाह के लिए कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं होते हैं।