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छठ पूजा 2018: छठ मईया की पूजा में भूलकर भी न करें ऐसी 7 गलतियां, हो सकता है अशुभ

Sat, 10 Nov 2018 01:35 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 10 Nov 2018 01:35 PM IST
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chhath puja 2018 shubh muhurat, timing, do not these 7 mistakes during chhath puja
छठ पूजा 2018

कार्तिक मास की शुक्ल चतुर्थी को छठ महापर्व मनाया जाता है। इस बार यह महापर्व 11 नवंबर से शुरू होगा। नहाय खाय के साथ छठ पूजा शुरू होती है जोकि अगले चार दोनों तक चलती है। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की थी। कर्ण भगवान सूर्य का परम भक्त था। वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देता। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बना था। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है। छठ पर्व सूर्य षष्ठी व डाला छठ के नाम से जाना जाता है। यह पर्व वर्ष में दो बार आता है पहला चैत्र शुक्ल षष्ठी को और दूसरा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को, हालांकि षष्ठी तिथि को मनाया जाने के कारण छठ पर्व कहते हैं लेकिन यह पर्व और इसकी पूजा सूर्य से जुड़े होने के कारण सूर्य की आराधना से ताल्लुक रखने के कारण इसे सूर्य षष्ठी कहते हैं। इसमें भगवान सूर्य के अलावा उनकी छोटी बहन छठ मैय्या की उपासना की जाती है। इनके बारे में मान्यता है कि यह बड़ी ही दुलाली होती है और छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाती हैं। इसलिए छठ पूजा के दौरान कई बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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पूजा में बरतें ये 7 सावधानियां
- छठी मैय्या का प्रसाद बनाते समय पूरी पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए। हाथ पैर धोकर साफ-सुथरे स्थान पर ही प्रसाद तैयार करें।
- छठ का प्रसाद तैयार करने वाले को तब तक कुछ नहीं खाना चाहिए जब तक की प्रसाद तैयार न हो जाए।
- छठ मैय्या के प्रसाद को पैर नहीं लगाना चाहिए।
- सूर्य को अर्घ्य देते समय चांदी, स्टील, शीशा व प्लास्टिक के बने बर्तनों से अर्घ्य नहीं देना चाहिए।
- छठी मैय्या की मनौती को नहीं भूलना चाहिए। जो मनौती हो उसे समय पर पूरा कर लेना चाहिए।
- छठ का प्रसाद जहां बन रहा हो वहां भोजन नहीं करना चाहिए। इससे पूजा अशुद्ध  माना जाता है।
- छठ का व्रत करने वाले को कभी भी बुरा भला नहीं कहना चाहिए। ऐसा करने से पूजा का लाभ आपको नहीं मिलता।

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