Akshaya Tritiya 2024: आज अक्षय तृतीया और शुक्रवार का संयोग, इन पूजा मंत्रों से प्रसन्न होंगी मां लक्ष्मी
Akshaya Tritiya 2024: आज यानी 10 मई को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है । इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। इस बार अक्षय तृतीया पर गजकेसरी राजयोग, सुकर्मा योग और रवि योग बन रहा है।
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Akshaya Tritiya 2024: अक्षय तृतीया आज यानी 10 मई को मनाई जा रही है । इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। इस बार अक्षय तृतीया पर गजकेसरी राजयोग, सुकर्मा योग और रवि योग बन रहा है। ऐसे में ये तिथि सभी के लिए लाभदायक रहने वाली है। खास बात ये है कि इस बार अक्षय तृतीया शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। इसलिए यह तिथि और भी फलदायी मानी जा रही है। दरअसल, शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन मां देवी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही पसंदीदा भोग से उन्हें प्रसन्न किया जाता है।
अक्षय तृतीया पर सोना चांदी खरीदना बेहद शुभ होता है। इनकी खरीदारी से आपके धन में वृद्धि होती है। इस दौरान लक्ष्मी जी के साथ गणेश भगवान और कुबेर महाराज की पूजा भी की जाती है। यदि इस दिन पूजा में इन मंत्रों का जाप कर लिया जाए, तो मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए इन मंत्रों के बारे में जान लेते हैं।
सुख-समृद्धि के लिए मंत्र
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी ॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का मंत्र
ऊँ महालक्ष्म्यै नमो नमः । ऊँ विष्णुप्रियायै नमो नमः ।।
ऊँ धनप्रदायै नमो नमः । ऊँ विश्वजन्नयै नमो नमः ।।
लक्ष्मी जी का बीज मंत्र
ऊँ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम:।।
श्री लक्ष्मी महामंत्र
ऊँ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।
सुख-समृद्धि के लिए मंत्र
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी ॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
मां लक्ष्मी की आरती
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता।
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है