फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   himachali folk singer sashi chauhan success story

लोक गायकी से मंच संचालन का शशि चौहान में है गजब का हुनर

Mon, 17 Feb 2020 12:27 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 17 Feb 2020 12:27 PM IST
विज्ञापन
himachali folk singer sashi chauhan success story
- फोटो : अमर उजाला

शशि चौहान जब भी किसी मंच पर लोकगीत गाते और इस पर लोकनृत्य करते हुए प्रवेश करते हैं, वह संबंधित क्षेत्र और वहां के लोगों की रुचि के हिसाब से लोक गायकी करते हैं। उन्हें कांगड़ी, चंबयाली, मंडयाली, कुल्लवी, लाहौली, किन्नौरी, सिरमौरी, महासुवीं बोलियों में लोकगीत आते हैं। लोकगीत गाकर वह मंच संचालन की शुरुआत करते हैं।

विज्ञापन


मंच संचालन ऐसा करते हैं कि समा बांध देते हैं। हिमाचल का शायद ही कोई ऐसा चर्चित लोक कलाकार हो, जिसके लिए उन्होंने मंच संचालन नहीं किया हो। वह हिमाचल में कई मेलों-उत्सवों में बॉलीवुड के कलाकारों की स्टार नाइट में भी मंच संचालन कर चुके हैं। 
विज्ञापन


शशि चौहान आकाशवाणी शिमला के चर्चित उद्घोषक हैं। वर्ष 2012 में जब रोहडू़ में पद्म मेमोरियल टूर्नामेंट में महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर आए थे तो भी उन्होंने आकाशवाणी शिमला से क्रिकेट मैच की लाइव कमेंटरी की थी। वह दूरदर्शन शिमला के कृ षि दर्शन कार्यक्रम में भी एंकरिंग कर चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


वह प्रादेशिक समाचार वाचन भी करते हैं। हाल ही में शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में छात्र संगठनों के एक दर्जन के करीब कार्यक्रमों में वह मंच संचालन कर चुके हैं। मंच पर चढ़ते हैं तो लगता है कि कोई कलाकार लोकगायन और लोकनृत्य की पेशकश देने को आ गया है, मगर बाद में मालूम होता है कि वह तो मंच संचालक हैं। बीच-बीच में जब जरूरत हो और कलाकार के आने में देरी हो तो भी कई बार लोकगीतों से समा बांधते हैं। 


शशि चौहान जिला शिमला की तहसील रामपुर के गांव घसगाड़ी के निवासी हैं। दूरसंचार में स्नातक और अंग्रेजी में एमए की डिग्री लेने के बाद शशि ने थोड़े समय के लिए पीटीए शिक्षक के रूप में नौकरी की, मगर बाद में लोक मेलों और लोकनृत्यों के लिए मंच संचालन को ही अपना करियर बना लिया है। हिमाचल के कोने-कोने के अलावा अब तो उन्हें उत्तराखंड भी बुलाया जाने लगा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed