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जिसे पीठ पर पहुंचाते थे स्कूल, वह अब हिमाचल का चमका रहा नाम

Sun, 25 Apr 2021 09:45 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 25 Apr 2021 09:45 PM IST
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Himachal news: piyush wins bronze medal in para table tennis championship
पीयूष शर्मा - फोटो : अमर उजाला

कहते हैं हौसले बुलंद हों तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। ऐसी ही मिसाल पेश की है शिमला के कनलोग वार्ड के शिवपुरी के रहने वाले युवा पीयूष शर्मा ने। मूल रूप से वह बिलासपुर जिले के घुमारवीं के भटवाड़ा गांव के रहने वाले हैं। पीयूष रीढ़ की हड्डी में परेशानी होने के कारण बचपन से चलने फिरने में असमर्थ हैं। व्हीलचेयर पर होने के बावजूद पीयूष ने न सिर्फ इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की, बल्कि हाल ही में इंदौर में हुई पैरा टेबल टेनिस प्रतियोगिता में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक भी हासिल किया। व्हीलचेयर पर टीटी प्रतियोगिता में हिमाचल को मेडल दिलाने वाले पीयूष पहले खिलाड़ी बने हैं।

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अब पीयूष 2024 में फ्रांस में होने वाले पैरालंपिक खेलों की तैयारी कर रहे हैं। पीयूष ने शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल से 12वीं की पढ़ाई की है। पीयूष के माता पिता उन्हें रोज पीठ पर उठाकर स्कूल पहुंचाते थे। पढ़ाई में अव्वल रहने वाले पीयूष ने 12वीं में अच्छे अंक हासिल किए। इसके बाद एनआईटी हमीरपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग करने के बाद एक विदेशी कंपनी में चार साल तक काम किया। अब पीयूष ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं जो विकलांग लोगों के जीवन को आसान करने में मदद करेगा।
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पीयूष ने जो सपने देखे, वे सब पूरे किए: पिता
पीयूष की मां संतोष शर्मा और पिता अनिल कुमार शर्मा का कहना है कि पढ़ाई से लेकर प्रदेश को मेडल दिलाने तक पीयूष ने जो सपने देखे थे, वह सब पूरे कर दिए। कहा कि पीयूष की कड़ी मेहनत से वह ऊंचे मुकाम हासिल कर रहा है। कभी जिसे पीठ पर स्कूल छोड़ने जाते थे, वह आज देश के लिए मेडल दिलाने के लिए मेहनत कर रहा है। पीयूष की उपलब्धि से दादी गीता देवी बेहद खुश हैं। 

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