फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal News: asha karykarta kusum lata inspirational story in sirmour himachal pradesh

कर्तव्यपरायणता की मिसाल: उफनती नदियों को पार कर नवजात की देखभाल के लिए आठ किमी पैदल चलीं कुसुम

Mon, 20 Sep 2021 01:40 PM IST
अरविन्द ठाकुर हितेश शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, नाहन (सिरमौर)
हितेश शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, नाहन (सिरमौर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 20 Sep 2021 01:40 PM IST
सार

जांदर बास्त गांव में छह सितंबर को हुई डिलीवरी को लेकर कुसुम लता पैदल ही निकल गईं। दो घंटे में वह घने जंगल से होते हुए जलाल और गंभर नदी को पार कर जांदर बास्त गांव पहुंचीं।

विज्ञापन
Himachal News: asha karykarta kusum lata inspirational story in sirmour himachal pradesh
आशा कार्यकर्ता कुसुम लता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिरमौर जिले के धगेड़ा स्वास्थ्य खंड की आशा कार्यकर्ता ने कर्तव्यपरायणता की मिसाल पेश की है। रविवार को जहां लोग छुट्टी मना रहे थे। आशा कार्यकर्ता आठ किलोमीटर का सफर तय कर दुर्गम क्षेत्र जांदर बास्त पहुंच गई। इतना लंबा सफर किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। उबड़-खाबड़ रास्तों को पार करने से बड़ी चुनौती घना जंगल और रास्ते के बीच आने वाली दो नदियों को पार करना था। आशा कार्यकर्ता इसकी परवाह किए बगैर गांव तक पहुंच गईं।

विज्ञापन


एक तरफा आठ किलोमीटर का सफर दो घंटे में तय करने के बाद आशा कार्यकर्ता इतना ही सफर तय कर घर लौटीं। बात की जा रही है आशा कार्यकर्ता कुसुम लता की। स्वास्थ्य खंड धगेड़ा के दुर्गम स्वास्थ्य उपकेंद्रों में शुमार आंजी बनूना में कार्यरत कुसुम लता रविवार को जच्चा बच्चा के स्वास्थ्य की जांच और देखभाल को लेकर जांदर बास्त गांव पहुंचीं। हालांकि, इस गांव के लिए संपर्क सड़क की व्यवस्था है।
विज्ञापन


लेकिन, बरसात के दौरान सड़क की हालत काफी खस्ता हो चुकी है और सड़क के रास्ते भी इस गांव की दूरी 12 से 13 किलोमीटर है। नेहर सवार पंचायत के हरकू ढमौत की रहने वाली आशा कार्यकर्ता कुसुम लता ने इस गांव तक पहुंचने के लिए शॉर्ट कट रास्ते का प्रयोग किया जो एकतरफा आठ किलोमीटर है। जांदर बास्त गांव में छह सितंबर को हुई डिलीवरी को लेकर कुसुम लता पैदल ही निकल गईं। दो घंटे में वह घने जंगल से होते हुए जलाल और गंभर नदी को पार कर जांदर बास्त गांव पहुंचीं। इस समय जब नदियां उफान पर हैं। फिर भी आशा कार्यकर्ता ने चुनौती को स्वीकार किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


जहां उन्होंने प्रसूति महिला को कैल्शियम और आयरन की दवाइयां दीं। साथ ही नवजात के तापमान, अंगों की देखभाल और उसका वजन कर रिपोर्ट हासिल की। सफर के दौरान आशा कार्यकर्ता ने दूसरे गांव की महिलाओं को भी आयरन, कैल्शियम, ब्रुफिन, ओआरएस और अन्य किटें वितरित की। बीएमओ डॉ. मोनीषा अग्रवाल और स्वास्थ्य शिक्षिका कृष्णा राठौर ने आशा कार्यकर्ता की इस कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा की है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed