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एमबीबीएस काउंसलिंग मामले में हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

Wed, 27 Jun 2018 08:45 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 27 Jun 2018 08:45 AM IST
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himachal High court reserves order in MBBS counseling case

एमबीबीएस काउंसलिंग मामले की सुनवाई हिमाचल हाईकोर्ट में हुई। हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश कोटे से एमबीबीएस सीट के लिए राज्य से बाहर रहने वाले हिमाचली याचिकाकर्ताओं को शैक्षणिक सत्र में दाखिला देने के आग्रह को लेकर दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने हिमाचल कोटे से नीट परीक्षा पास करने वाले प्रार्थियों द्वारा दायर विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए।
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न्यायालय ने मामलों पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को दाखिले के लिए आवेदन 20 जून तक जमा करने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह अनुमति केवल अस्थायी है और इसे काउंसलिंग में भाग लेने या दाखिले के लिए अधिकार के तौर पर न समझा जाए।

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यहां जानिए पूरा मामला

himachal High court reserves order in MBBS counseling case

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने वर्ष 2018-19 के एमबीबीएस कोर्स के लिए प्रोस्पेक्टस जारी किया था जिसमें एडमिशन के लिए जरूरी निर्देश शामिल थे। 13 जून 2018 को निदेशक मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च द्वारा जारी

प्रोस्पेक्टस में शर्त लगाई गई कि जिस विद्यार्थी ने प्रदेश के किसी स्कूल से जमा दो या कोई दो कक्षाएं पास न की हों उन्हें हिमाचल कोटे के तहत दाखिला नहीं दिया जाएगा। इस शर्त में बाहरी राज्यों में सेवाएं देने वाले सरकारी कर्मियों के बच्चों को छूट दी गई थी लेकिन निजी व्यवसाय अथवा निजी कंपनियों में

कार्यरत कर्मियों के बच्चों के लिए ऐसी छूट का कोई प्रावधान नहीं रखा गया। प्रार्थियों का कहना है कि वे हिमाचली हैं लेकिन उनके अभिभावकों के व्यवसाय अथवा नौकरियां प्रदेश से बाहर निजी संस्थानों में होने के कारण

उन्हें प्रदेश से बाहर के स्कूलों में पढ़ना पड़ा। इसलिए उन्हें भी छूट का फायदा मिलना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों की बहस पूरी होने पर फैसला सुरक्षित रख लिया। अब कोर्ट के फैसले पर ही निर्भर करेगा कि याचिकाकर्ताओं को एमबीबीएस कोर्स में दाखिला दिया जाएगा या नहीं।

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