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एससीए चुनाव की तिथि पर एसएफआई का अल्टीमेटम
Shimla
Updated Wed, 20 Aug 2014 05:30 AM IST
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शिमला। एससीए चुनाव की तिथि पर एसएफआई ने अल्टीमेटम दे दिया है। दो दिन का समय विवि प्रशासन को दिया है। इसके बाद आंदोलन होगा। संगठन ने यह ऐलान कर दिया है। प्रेसवार्ता में राज्य सचिव मुनीष, सहसचिव खुशी वर्मा, पुनीत धांटा और विवेक राणा ने
चुनाव का शेडयूल जारी करने की मांग की है। उक्त नेताओं ने कहा कि जुलाई में शुरू हुए सत्र के चार से आठ सप्ताह के भीतर एससीए चुनाव करवा दिए जाने चाहिए थे। रूसा प्रथम और द्वितीय सत्र के साथ बीए और बीसीए द्वितीय वर्ष के परिणाम घोषित न होने के लिए विवि प्रशासन जिम्मेदार है। छात्रों से उनके लोकतांत्रिक अधिकार से महरूम नहीं किया जा सकता। चुनाव लड़ने वाले छात्रों से लिखित में अंडरटेकिंग लें कि परीक्षा में फेल होने पर उसे पद छोड़ना होगा। अभी तक विवि प्रशासन ने चुनाव करवाने या न करवाने पर कोई बयान नहीं दिया है। यदि चुनाव बंद किए गए तो इसका विरोध होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि एनएसयूआई और एबीवीपी दोनों प्रदेश में सत्तासीन रही सरकारों के छात्र विरोधी फै सलों का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपति के तीन साल के कार्यकाल विवि में आर्थिक संकट गहराया है। छात्रों की सुविधाएं कम हुई और फीसें कई गुणा बढ़ाई गई हैं। एमबीए जैसे विभाग में कक्षाएं लगाने तक को कमरे उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षक, क्लास रूम जैसी सुविधाएं तक नहीं हैं। कुलपति और ईसी में बैठे सरकार के नुमाइंदेे ईसी में छात्र विरोधी फैसले लेते रहे हैं। मुनीष ने कहा कि यदि चुनाव को न करवाने का फैसला लिया जाता है तो इसके खिलाफ प्रदेश स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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चुनाव का शेडयूल जारी करने की मांग की है। उक्त नेताओं ने कहा कि जुलाई में शुरू हुए सत्र के चार से आठ सप्ताह के भीतर एससीए चुनाव करवा दिए जाने चाहिए थे। रूसा प्रथम और द्वितीय सत्र के साथ बीए और बीसीए द्वितीय वर्ष के परिणाम घोषित न होने के लिए विवि प्रशासन जिम्मेदार है। छात्रों से उनके लोकतांत्रिक अधिकार से महरूम नहीं किया जा सकता। चुनाव लड़ने वाले छात्रों से लिखित में अंडरटेकिंग लें कि परीक्षा में फेल होने पर उसे पद छोड़ना होगा। अभी तक विवि प्रशासन ने चुनाव करवाने या न करवाने पर कोई बयान नहीं दिया है। यदि चुनाव बंद किए गए तो इसका विरोध होगा।
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उन्होंने आरोप लगाया कि एनएसयूआई और एबीवीपी दोनों प्रदेश में सत्तासीन रही सरकारों के छात्र विरोधी फै सलों का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपति के तीन साल के कार्यकाल विवि में आर्थिक संकट गहराया है। छात्रों की सुविधाएं कम हुई और फीसें कई गुणा बढ़ाई गई हैं। एमबीए जैसे विभाग में कक्षाएं लगाने तक को कमरे उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षक, क्लास रूम जैसी सुविधाएं तक नहीं हैं। कुलपति और ईसी में बैठे सरकार के नुमाइंदेे ईसी में छात्र विरोधी फैसले लेते रहे हैं। मुनीष ने कहा कि यदि चुनाव को न करवाने का फैसला लिया जाता है तो इसके खिलाफ प्रदेश स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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