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किसकी लापरवाही से हुई सीटों में कटौती!
Shimla
Updated Sat, 28 Jun 2014 05:33 AM IST
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में एमबीबीएस की सीटें बढ़ने के बजाय कम हो गई हैं। एमबीबीएस की काउंसलिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से शुक्रवार शाम तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले। ऐसे में सवाल यह है कि किसकी लापरवाही से हिमाचल प्रदेश में एमबीबीएस की सीटों में कटौती की गई। प्रदेश के छात्रों का भविष्य दांव पर लगाया गया।
मई में ही आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेजों की सीटें कम करने को लेकर सूचना मिल गई थी। सूचना मिलने के बाद प्रदेश सरकार की ओर से सुस्ती बरती गई। सीटों को बचाने को लेकर किसी स्तर पर तेजी नहीं दिखाई गई, जिससे प्रदेश के पीएमटी की परीक्षा पास करने वाले छात्रों के भविष्य को संवारा जा सके। सरकार की सुस्ती के कारण प्रदेश के 85 छात्रों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। काउंसलिंग पूरी हो चुकी है। ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में पैरवी की जा रही है। पिछले दो दिनों से प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विनीत चौधरी और निदेशक चिकित्सा शिक्षा डा. जयश्री शर्मा दिल्ली में जमे हैं, लेकिन कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है।
यूपी और बंगाल सीट बचाने में सफल
पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य कई राज्यों में भी एमबीबीएस की सीटें कम करने की मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने सिफारिश की थी, लेकिन इन राज्यों के मुख्यमंत्री की ओर से शपथ पत्र मंत्रालय में सौंप दिया गया। इसके बाद से उनकी सीटें कम नहीं हुई, लेकिन हिमाचल प्रदेश में ऐसा नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री तक ऐसी सूचना पहुंचाई ही नहीं गई, जिससे हिमाचल का भी केंद्रीय मंत्रालय में जोरदार तरीके से पक्ष रखा जा सके।
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अभी तक किसी से बात नहीं हो पाई है। ऐसे में एमबीबीएस सीटों को लेकर कुछ भी कहना मुश्किल है।
- विनीत चौधरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य (हिप्र)
आज पूरी हो जाएगी प्रवेश प्रक्रिया
प्रदेश के दो एमबीबीएस और एक डेंटल सरकारी कॉलेजों के साथ निजी डेंटल कॉलेजों में भी प्रवेश की प्रक्रिया शनिवार 28 जून को पूरी हो जाएगी। सरकार सीटों को बढ़ाने को लेकर फैसला न आने के कारण मेरिट सूची में शामिल छात्र और उनके अभिभावक परेशान हैं। वे सीटों के बढ़ने के फैसला का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रवेश उन्हीं का हो पाया है, जिनका प्रवेश पत्र जारी हो पाया है। शेष मेरिट वाले छात्र फैसला आने तक इंतजार करने पर मजबूर हैं।
मई में ही आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेजों की सीटें कम करने को लेकर सूचना मिल गई थी। सूचना मिलने के बाद प्रदेश सरकार की ओर से सुस्ती बरती गई। सीटों को बचाने को लेकर किसी स्तर पर तेजी नहीं दिखाई गई, जिससे प्रदेश के पीएमटी की परीक्षा पास करने वाले छात्रों के भविष्य को संवारा जा सके। सरकार की सुस्ती के कारण प्रदेश के 85 छात्रों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। काउंसलिंग पूरी हो चुकी है। ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में पैरवी की जा रही है। पिछले दो दिनों से प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विनीत चौधरी और निदेशक चिकित्सा शिक्षा डा. जयश्री शर्मा दिल्ली में जमे हैं, लेकिन कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है।
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यूपी और बंगाल सीट बचाने में सफल
पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य कई राज्यों में भी एमबीबीएस की सीटें कम करने की मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने सिफारिश की थी, लेकिन इन राज्यों के मुख्यमंत्री की ओर से शपथ पत्र मंत्रालय में सौंप दिया गया। इसके बाद से उनकी सीटें कम नहीं हुई, लेकिन हिमाचल प्रदेश में ऐसा नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री तक ऐसी सूचना पहुंचाई ही नहीं गई, जिससे हिमाचल का भी केंद्रीय मंत्रालय में जोरदार तरीके से पक्ष रखा जा सके।
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अभी तक किसी से बात नहीं हो पाई है। ऐसे में एमबीबीएस सीटों को लेकर कुछ भी कहना मुश्किल है।
- विनीत चौधरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य (हिप्र)
आज पूरी हो जाएगी प्रवेश प्रक्रिया
प्रदेश के दो एमबीबीएस और एक डेंटल सरकारी कॉलेजों के साथ निजी डेंटल कॉलेजों में भी प्रवेश की प्रक्रिया शनिवार 28 जून को पूरी हो जाएगी। सरकार सीटों को बढ़ाने को लेकर फैसला न आने के कारण मेरिट सूची में शामिल छात्र और उनके अभिभावक परेशान हैं। वे सीटों के बढ़ने के फैसला का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रवेश उन्हीं का हो पाया है, जिनका प्रवेश पत्र जारी हो पाया है। शेष मेरिट वाले छात्र फैसला आने तक इंतजार करने पर मजबूर हैं।