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जांच की जद में नगर निगम के पूर्व कमिश्नर
Shimla
Updated Sat, 22 Jun 2013 05:30 AM IST
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शिमला। विवादित नक्शे को मंजूरी देने पर नगर निगम के पूर्व कमिश्नर विजिलेंस जांच की जद में आ गए हैं। अपने कार्यकाल के दौरान एक ऐसे विवादास्पद भवन के नक्शे को स्वीकृति दे दी, जिस पर नगर निगम ने पहले ही आपत्ति लगा रखी थी। मामला विजिलेंस के पास पहुंचने के बाद केस से खुद को बाहर रखने के लिए पूर्व कमिश्नर अब खूब हाथ पांव भी मार रहे हैं लेकिन विजिलेंस के पास मौजूद इस मामले से संबंधित दस्तावेज इन्हें एफआईआर में नामजद करने के लिए काफी हैं।
इसी माह इस मामले में विजिलेंस ने थाना शिमला में भवन स्वीकृत करने वाली नगर निगम कमेटी के खिलाफ मुकदमा कायम कर रखा है। कसुम्पटी स्थित यह भवन पूर्व डीसी के बेटे का बताया जा रहा है। मकान की सबसे ऊपर की मंजिल का धरातल किसी बिल्डर को बेच दिया गया। इसमें भवन निर्माण भी किया गया। जब मामला नगर निगम के पास पहुंचा तो उस वक्त निगम आयुक्त एक आईपीएस अफसर थे।
भवन निर्माण में अनियमितताओं को देखते हुए नक्शे को स्वीकृति देने से मना कर दिया और फाइल में यह कमेंट लिखा कि इस भवन को तीन मंजिल से अधिक बनाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। बावजूद निर्माण होता है तो वह अवैध होगा और उसे तोड़ा जाए। इस मामले में भारी गड़बड़ियों को देखते हुए नगर निगम की ओर से साल 2010 में थाना छोटा शिमला में मुकदमा भी कायम करवा दिया था। समय के साथ उक्त आईपीएस अफसर कमिश्नर के पद से सेवानिवृत्त हो गए। इसके कुछ समय बाद इस विवादस्पद नक्शे को तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर ने नियमों की सभी सीमाओं को लांघते हुए स्वीकृति दे दी। इसमें बिल्डर ने फ्लैट भी बनाए। जिन्हें एक आईपीएस अफसर के अलावा दो अन्य अफसरों ने भी खरीद रखा है। अब शीघ्र ही विजिलेंस इस मामले में तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर से पूछताछ करने जा रही है। उधर, एडीजीपी विजिलेंस पृथ्वी राज ने कहा कि मुकदमा दर्ज है और मामले की छानबीन चल रही है।
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इसी माह इस मामले में विजिलेंस ने थाना शिमला में भवन स्वीकृत करने वाली नगर निगम कमेटी के खिलाफ मुकदमा कायम कर रखा है। कसुम्पटी स्थित यह भवन पूर्व डीसी के बेटे का बताया जा रहा है। मकान की सबसे ऊपर की मंजिल का धरातल किसी बिल्डर को बेच दिया गया। इसमें भवन निर्माण भी किया गया। जब मामला नगर निगम के पास पहुंचा तो उस वक्त निगम आयुक्त एक आईपीएस अफसर थे।
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भवन निर्माण में अनियमितताओं को देखते हुए नक्शे को स्वीकृति देने से मना कर दिया और फाइल में यह कमेंट लिखा कि इस भवन को तीन मंजिल से अधिक बनाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। बावजूद निर्माण होता है तो वह अवैध होगा और उसे तोड़ा जाए। इस मामले में भारी गड़बड़ियों को देखते हुए नगर निगम की ओर से साल 2010 में थाना छोटा शिमला में मुकदमा भी कायम करवा दिया था। समय के साथ उक्त आईपीएस अफसर कमिश्नर के पद से सेवानिवृत्त हो गए। इसके कुछ समय बाद इस विवादस्पद नक्शे को तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर ने नियमों की सभी सीमाओं को लांघते हुए स्वीकृति दे दी। इसमें बिल्डर ने फ्लैट भी बनाए। जिन्हें एक आईपीएस अफसर के अलावा दो अन्य अफसरों ने भी खरीद रखा है। अब शीघ्र ही विजिलेंस इस मामले में तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर से पूछताछ करने जा रही है। उधर, एडीजीपी विजिलेंस पृथ्वी राज ने कहा कि मुकदमा दर्ज है और मामले की छानबीन चल रही है।
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