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हे भगवान! जीते जी नरक भोग रहे मासूम

Sat, 22 Jun 2013 05:30 AM IST
Shimla
Shimla Updated Sat, 22 Jun 2013 05:30 AM IST
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शिमला। ढली के मूक बधिर और दृष्टिहीन स्कूल में छात्र जीते जी नरक भुगत रहे हैं। सोने के कमरे में इतनी दुर्गंध है कि वहां खड़े रहना मुश्किल है। हर ओर मक्खियां भिनभिना रही हैं। संस्थान में हुई छात्र की मौत के बाद मौके पर पहुंचे जिला कल्याण अधिकारी के सामने यह सब हो रहा था। जब ‘अमर उजाला’ ने खामियों के बारे में पूछा तो उन्हाेंने दो टूक कहा, यहां सब बेहतर है। ‘अमर उजाला’ टीम शुक्रवार सुबह साढ़े दस बजे यहां पहुंची। 130 छात्र स्कूल में गंदगी भरे माहौल में रहने को मजबूर हैं। यहां पहुंचते ही सामने स्कूल का किचन नजर आता है। इसके ठीक बाहर बर्तन धोने के लिए टूटी फूटी सीमेंट की बनी सिंक। इससे चंद फीट की दूरी पर कूड़ा और बचा राशन फेंका नजर आया। कुछ ही दूरी पर कू ड़ा फेंकने की जगह बनी हुई। यहां भी बचे भोजन के ढेर लगे हुए है। बच्चों को इन्हें पढ़ाने के लिए न तो एजूकेटर उपलब्ध हैं और न ही इनकी देखरेख के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त केयर टेकर। अंदर डाइनिंग हाल में यूं तो पौंछा लगा था, मगर यहां भी बाहर पड़ी गंदगी से उठ कर मक्खियां उड़ती नजर आई। यहीं नहीं इन छात्रों के सोने के लिए बने रूम में भी बदबू आ रही थी, मान कई दिनों से बिस्तरों की धुलाई ही न हुई। अमर उजाला की टीम जब स्कूल में छात्रों के रहने की स्थिति की पड़ताल करने पहुुंची तो पूरा स्टाफ स्कूल मैदान में पहुंच गया।
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अफसर को नहीं दिखी गंदगी
स्कूल में रह रहे एक मानसिक रूप से अक्षम की मौत हो जाने की खबर प्रकाशित होने पर जिला कल्याण अधिकारी भी स्कूल पहुंचे। अमर उजाला की टीम को देखते ही उन्हाेंने किनारा कर लिया और रट लगाते नजर आए यहां सब बेहतर चल रहा है। आप स्कूल परिसर से बाहर चले जाएं।
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टीम से उलझ गए स्टाफ कर्मी
स्कूल में छात्र किन हालात में रह रहे है, उन्हें क्या सुविधाएं मिल रही है इसकी पड़ताल करने गई अमर उजाला की टीम के साथ स्कूल की कर्मी उलझने लगे। अनुमति लेने की जिद्द पर अड़े इन कर्मियों को शांत करने का प्रयास भी किया, लेकिन जिला कल्याण अधिकारी के कहने के बाद तो मानों उन्हें अपनी खामियों को छुपाने का भरपूर मौका मिल गया।
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प्राथमिक उपचार की नाममात्र सुविधा
स्कूल मे ं130 छात्र पढ़ रहे हैं। शहर के दूर बसे इस स्कूल में इनके प्राथमिक उपचार की सुविधा नाममात्र है। वार्डन ही आम बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को अपने पास रखते है। माह में एक बार कुफरी स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सक स्कूल आते है, या फिर बच्चे के बीमार पड़ जाने पर उसे अस्पताल ले जाया जाता है।
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चिकित्सक ने दी है सफाई की हिदायत
स्कूल में छात्रों के बिस्तर गंदे पाए गए। यही वजह रही हो कि बीते दिनों कुफरी से छात्रों के चैक अप के लिए आई टीम ने भी छात्रों में पाई गई खुजली की बीमारी के लिए गंदगी को ही कारण बताया था।
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बच्चे ढो रहे सामान
स्कूल में पिछले करीब दो से अधिक साल से ठहराए गए अक्षमों से गेट से किचन तक सब्जी ढुलाने का कार्य करवाया जा रहा था। स्कूल के पास पर्याप्त कर्मचारी भी उपलब्ध है, जिन्हें इसी तरह के काम को रखा गया है।
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बरसात से मुश्किल : विनय
स्कूल की प्रधानाचार्य विनय कुमारी का कहना है कि सुबह का समय था, साफ सफाई हो ही रही थी। बरसात के चलते मक्खियां हो गई थी। कमरों में सीलन आने से कुछ दुर्गंध हो गई थी।

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मामले की छानबीन होगी : नंदिता
निदेशक अनुसूचित जाति , पिछड़ा वर्ग एवंम अल्पसंख्यक नंदिता गुप्ता कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो पूरे मामले की छानबीन की जाएगी।
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