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पीलिया झड़वाने पहुंचे डाक्टर, वकील और अफसर
Shimla
Updated Thu, 07 Mar 2013 05:32 AM IST
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शिमला। राजधानी में अस्पतालों के वार्ड पीलिया के मरीजों से भर चुके हैं तो उधर डाक्टर अस्पताल के बजाय झाड़फूंक करने वालों के पास डेरा डाले हैं। डाक्टर ही नहीं, बड़े अफसरों से लेकर वकीलों तक झाड़फूंक करने वालों के पास दस्तक दे रहे हैं। जितने रोगी अस्पताल पहुंच रहे हैं, उससे कहीं अधिक झाड़फूंक करने वालों के पास। ‘अमर उजाला’ टीम बुधवार को न्यू शिमला और बैम्लोई में झाड़फूंक करने वालों के पास पहुंची।
बुधवार को सुबह के 11:30 बज रहे हैं। बैम्लोई बस स्टॉप में हाईकोर्ट की ओर बढ़ते ही कनलोग के अमित कुमार हमें मिल गए। युवक दोनों हाथों से रेलिंग पकड़कर खड़े हैं। पूछने पर पता चला कि इन्हें पीलिया हो गया है। इसे झड़वाने के लिए जा रहे हैं। युवक की बात सुनते ही हम भी इनके साथ हो लिए। जैसे ही आर्मी के सरवेंट क्वार्टर पहुंचे तो करीब एक दर्जन मरीज यहां पहले ही पहुंच चुके हैं। सभी के हाथ में सरसों के तेल की बोतलें थीं। एक-एक कर सभी एक कमरे में गए और दस मिनट के बाद बाहर निकलते रहे। कमरे में 75 वर्षीय जगतराम कांसे की थाली में सरसों का तेल डालकर दूभ से उसे मरीज से घुमाने के लिए कह रहे हैं।
बीते करीब साठ वर्षों से पीलिया झाड़ने के काम में जुटे जगतराम ने बताया वे ओबराय होटल में काम करते थे। जब नौकरी करते थे तो सुबह और शाम के वक्त पीलिया झाड़ते थे। अब तो दिन भर यही काम है। उन्होंने कहा दो साल पूर्व शहर में पीलिया का प्रकोप नहीं था। अब तो हर साल सैकड़ों मरीज उनके पास पीलिया झड़वाने आते हैं। यह सेवा वे निशुल्क करते हैं। उनके पास कई बड़े-बड़े अधिकारी आते हैं। कांसे की थाली में सरसों का तेल डालकर उसे ध्रुव से घुमाने पर पीलिया तेल में चला जाता है।
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उधर, न्यू शिमला के फेज थ्री में गृहरक्षा विभाग से सेवानिवृत्त मदन ठाकुर भी पीलिया झाड़ते हैं। इनके यहां भी रोजाना तीस से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। 66 वर्षीय मदन ठाकुर का कहना है वे निशुल्क सेवा कर रहे हैं। किसी भी व्यक्ति से कोई फीस नहीं ली जाती। वे अपनी ओर से मरीजों को जड़ी बूटियां भी देते हैं। मदन ठाकुर के मुताबिक पीलिया झड़वाने के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के एक डाक्टर भी अपने परिजनों के साथ यहां आए हैं। वकील और सचिवालय में कार्यरत बड़े अफसरों का भी वे इलाज कर चुके हैं।
कनलोग के रहने अमित कुमार का कहना है कि अस्पताल के चक्कर काटकर अब वे थक चुके हैं। किसी ने झाड़फूंक के बारे में बताया था, इसलिए यहां आए हैं।
कनलोग के छात्र राजन नेगी भी पीलिया से ग्रसित हैं। ये अपनी मां के साथ पीलिया झड़वाने पहुंचे। राजन ने कहा कि परीक्षा की घड़ी नजदीक है। ऐसे में झाड़कर ही पीलिया दूर हो सकता है।
छोटा शिमला की तनुजा ने कहा कि बड़े बुजुर्गों के कहे मुताबिक वे पीलिया झड़वाने आई हैं। कहते हैं दवाओं की लंबी रूटीन के बजाय झाड़फूंक से पीलिया जल्द दूर होता है।
विकासनगर के पंकज छाबड़ा ने कहा कि नगर निगम और आईपीएच की लचर कार्य प्रणाली के चलते गंदा पानी लोगों को पीना पड़ रहा है। इसी कारण उन्हें पीलिया हुआ है।
विकासनगर के प्रताप के मुताबिक उनके पड़ोस में पांच लोगों को पीलिया हो चुका है। सभी लोगों ने सुझाव दिया है कि पीलिया को झड़वाया जाए।
कसुम्पटी स्थित स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय में तैनात वीर बहादुर भी पीलिया से ग्रसित हैं। बुधवार को ये भी पीलिया झड़वाने पहुंचे। वीर बहादुर ने कहा कि पीलिया को देसी इलाज ही दूर कर सकता है।
कसुम्पटी के देसराज का कहना है कि पीलिया किस कारण हुआ है, यह तो उन्हें मालूम नहीं लेकिन इतना विश्वास है कि झड़वाने से पीलिया दूर जरूर हो जाएगा।
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बुधवार को सुबह के 11:30 बज रहे हैं। बैम्लोई बस स्टॉप में हाईकोर्ट की ओर बढ़ते ही कनलोग के अमित कुमार हमें मिल गए। युवक दोनों हाथों से रेलिंग पकड़कर खड़े हैं। पूछने पर पता चला कि इन्हें पीलिया हो गया है। इसे झड़वाने के लिए जा रहे हैं। युवक की बात सुनते ही हम भी इनके साथ हो लिए। जैसे ही आर्मी के सरवेंट क्वार्टर पहुंचे तो करीब एक दर्जन मरीज यहां पहले ही पहुंच चुके हैं। सभी के हाथ में सरसों के तेल की बोतलें थीं। एक-एक कर सभी एक कमरे में गए और दस मिनट के बाद बाहर निकलते रहे। कमरे में 75 वर्षीय जगतराम कांसे की थाली में सरसों का तेल डालकर दूभ से उसे मरीज से घुमाने के लिए कह रहे हैं।
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बीते करीब साठ वर्षों से पीलिया झाड़ने के काम में जुटे जगतराम ने बताया वे ओबराय होटल में काम करते थे। जब नौकरी करते थे तो सुबह और शाम के वक्त पीलिया झाड़ते थे। अब तो दिन भर यही काम है। उन्होंने कहा दो साल पूर्व शहर में पीलिया का प्रकोप नहीं था। अब तो हर साल सैकड़ों मरीज उनके पास पीलिया झड़वाने आते हैं। यह सेवा वे निशुल्क करते हैं। उनके पास कई बड़े-बड़े अधिकारी आते हैं। कांसे की थाली में सरसों का तेल डालकर उसे ध्रुव से घुमाने पर पीलिया तेल में चला जाता है।
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उधर, न्यू शिमला के फेज थ्री में गृहरक्षा विभाग से सेवानिवृत्त मदन ठाकुर भी पीलिया झाड़ते हैं। इनके यहां भी रोजाना तीस से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। 66 वर्षीय मदन ठाकुर का कहना है वे निशुल्क सेवा कर रहे हैं। किसी भी व्यक्ति से कोई फीस नहीं ली जाती। वे अपनी ओर से मरीजों को जड़ी बूटियां भी देते हैं। मदन ठाकुर के मुताबिक पीलिया झड़वाने के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के एक डाक्टर भी अपने परिजनों के साथ यहां आए हैं। वकील और सचिवालय में कार्यरत बड़े अफसरों का भी वे इलाज कर चुके हैं।
कनलोग के रहने अमित कुमार का कहना है कि अस्पताल के चक्कर काटकर अब वे थक चुके हैं। किसी ने झाड़फूंक के बारे में बताया था, इसलिए यहां आए हैं।
कनलोग के छात्र राजन नेगी भी पीलिया से ग्रसित हैं। ये अपनी मां के साथ पीलिया झड़वाने पहुंचे। राजन ने कहा कि परीक्षा की घड़ी नजदीक है। ऐसे में झाड़कर ही पीलिया दूर हो सकता है।
छोटा शिमला की तनुजा ने कहा कि बड़े बुजुर्गों के कहे मुताबिक वे पीलिया झड़वाने आई हैं। कहते हैं दवाओं की लंबी रूटीन के बजाय झाड़फूंक से पीलिया जल्द दूर होता है।
विकासनगर के पंकज छाबड़ा ने कहा कि नगर निगम और आईपीएच की लचर कार्य प्रणाली के चलते गंदा पानी लोगों को पीना पड़ रहा है। इसी कारण उन्हें पीलिया हुआ है।
विकासनगर के प्रताप के मुताबिक उनके पड़ोस में पांच लोगों को पीलिया हो चुका है। सभी लोगों ने सुझाव दिया है कि पीलिया को झड़वाया जाए।
कसुम्पटी स्थित स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय में तैनात वीर बहादुर भी पीलिया से ग्रसित हैं। बुधवार को ये भी पीलिया झड़वाने पहुंचे। वीर बहादुर ने कहा कि पीलिया को देसी इलाज ही दूर कर सकता है।
कसुम्पटी के देसराज का कहना है कि पीलिया किस कारण हुआ है, यह तो उन्हें मालूम नहीं लेकिन इतना विश्वास है कि झड़वाने से पीलिया दूर जरूर हो जाएगा।