Prayagraj : बिजली की मांग में रिकार्ड तेजी, पांच दिन में बढ़ गई 100 मेगावाट की खपत
मई के शुरुआती दिनों में ही गर्मी से राहत पाने के लिए लोग जिस तरह से बिजली के उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं, उससे खपत तेजी से बढ़ी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मई के शुरुआती पांच दिनों में ही बिजली की खपत में रिकार्ड तेजी आई है, जबकि मई और जून का पूरा महीना बाकी हैं।
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मई के शुरुआती दिनों में ही गर्मी से राहत पाने के लिए लोग जिस तरह से बिजली के उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं, उससे खपत तेजी से बढ़ी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मई के शुरुआती पांच दिनों में ही बिजली की खपत में रिकार्ड तेजी आई है, जबकि मई और जून का पूरा महीना बाकी हैं। वर्ष 2020-21 में कोरोना संक्रमण के कारण बिजली की मांग उतनी नहीं रही।
पिछले वर्ष मई के शुरुआती पांच दिनों तक शहर में 450 मेगावाट बिजली की खपत हो रही थी। इस बार मई के शुरुआती पांच दिनों में ही यह आंकड़ा 512 मेगावाट तक पहुंच गया है। जबकि अप्रैल के अंतिम दिनों तक शहर में 410 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी। बिजली की खपत बढ़ने का कारण है कि मई के शुरुआती दिनों में ही बारिश के बाद भीषण गर्मी पड़ रही है। लोग एयर कंडिशनर, कूलर, पंखों का उपयोग तेजी कर रहे हैं।
शहर में आम दिनों में 300-400 मेगावाट बिजली की खपत होती है। अप्रैल के महीने से यह आकंड़ा तेजी के साथ बढ़ता और मई-जून में 500-600 मेगावाट बिजली की मांग होने लगती है। जोकि आम दिनों के मुकाबले 40 प्रतिशत अधिक होती है। इस बार मई के शुरुआती दिन में ही बिजली की खपत का आंकड़ा 512 मेगावाट तक पहुंच गया है, इससे जून तक 600 मेगावाट से अधिक बिजली की मांग होने की उम्मीद है। ठंडी के मौसम में पूरे शहर में 350 मेगावाट बिजली खपत होती थी। अब यह उसके मुकाबले 150 मेगावाट ज्यादा हो गई है।
एसी, कूलर व बड़े उद्योगों ने बढ़ाई खपत
गर्मी की मार झेल रहे शहर के उपभोक्ता एसी और कूलर का इस्तेमाल भी खूब कर रहे हैं। इससे बिजली की खपत बढ़ी है। इस वक्त शहर में हर दुकान, सैलून, माल, रेस्टोरेंट में एसी चलते हुए दिखाई दे रहे है। इस वजह से बिजली की खपत ज्यादा हो रही है। वहीं शहर के छोटे-बड़े उद्योग, शिक्षण संस्थान, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भी बिजली की मांग बढ़ी है।
ट्रिपिंग और फाल्ट भी बढ़े
बिजली की मांग बढ़ने के साथ-साथ शहर में बिजली की ट्रिपिंग की समस्या और लोकल फाल्ट भी बढ़े हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में ट्रांसफार्मर के जलने, जंपर उड़ने, केबल बॉक्स जलने और तार टूटने के मामले बढ़े हैं। बिजली का लोड अधिक होने के कारण अप्रैल के महीने में ही शहर में छोटे-बड़े लगभग 340 ट्रांसफार्मर जले हैं।
मौसम के बदलने के साथ बिजली की मांग बढ़ी है। उपभोक्ताओं को भी बिजली की बचत करना चाहिए। शहर में बिजली की स्थिति फिलहाल काबू में है। बिजली की और मांग बढ़ने पर भी व्यवस्थित तरीके से बिजली आपूर्ति की जाएगी। - विनोद गंगवार, मुख्य अभियंता