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आम चुनाव 2019: कभी स्कूल में पढ़ाती थीं मायावती, फिर सीखे राजनीति के सबक, चार बार बनीं सीएम

Wed, 20 Mar 2019 12:33 PM IST
ललित फुलारा चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ललित फुलारा Updated Wed, 20 Mar 2019 12:33 PM IST
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General Election 2019: Mayawati profile political career BSP lok sabha chunav
चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती 2019 के लोकसभा चुनाव में शक्ति प्रदर्शन के लिए तैयार हैं।

चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती 2019 के लोकसभा चुनाव में शक्ति प्रदर्शन के लिए तैयार हैं। वह यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर 17वां लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं। राजनीतिक जीवन के लंबे अनुभवों से गुजरने वाली मायावती 1989 में पहली बार सांसद बनी थीं। 1995 में वह अनुसूचित जाति की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। राजनीति में उनका प्रवेश कांशीराम की विचारधारा से प्रभावित होकर हुआ। राजनीति में आने से पहले मायावती शिक्षिका थीं।

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21 मार्च 1997 को मायावती ने दूसरी बार यूपी की मुख्यमंत्री की कमान संभाली। 3 मार्च 2002 को मायावती तीसरी बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं और 26 अगस्त 2002 तक पद पर रहीं। 13 मई 2007 को मायावती ने चौथी बार सूबे की कमान संभाली और 14 मार्च 2012 तक मुख्यमंत्री रहीं। आइए मायावती के राजनीतिक करियर पर डालते हैं एक नजर....
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स्कूल शिक्षिका से बसपा प्रमुख तक का सफर
मायावती राजनीति में आने से पहले स्कूल में पढ़ाती थीं। 1984 में वह शिक्षिका की नौकरी छोड़ बसपा की पूर्णकालिक सदस्य बन गईं। उनकी कड़ी मेहनत की बदौलत 1989 में ‘बहुजन समाज पार्टी’ ने 13 सीटों पर चुनाव जीता और मायावती पहली बार सांसद बनीं। 1995 में वह उत्तर प्रदेश की गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री बनाई गईं। 2001 में बसपा प्रमुख एवं पार्टी संस्थापक कांशीराम ने मायावती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। 2002-2003 के दौरान भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार में मायावती फिर से मुख्यमंत्री बनीं। भाजपा ने समर्थन वापस लिया तो मायावती की सरकार गिर गई और सूबे की कमान मुलायम सिंह यादव के हाथों में चली गई। मायावती 2007 के विधानसभा चुनाव जीतकर फिर से सत्ता में लौटी और यूपी की कमान संभाली। 2012 के विधानसभा चुनाव में मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी चुनाव हार गई और यूपी की कमान अखिलेश यादव के हाथों में आई। मायावती इस वक्त राज्यसभा सांसद हैं। उनकी राजनीति कई आयामों में सिमटी हुई है। देखिए मायावती की राजनीतिक टाइमलाइन....
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  • 1984 में मायावती बसपा में शामिल हुईं।
  • 1989 में मायावती ने नौवां आम चुनाव जीता, पहली बार सांसद बनीं।
  • 1994 में पहली बार राज्यसभा पहुंची।
  • 1995 में वह अनुसूचित जाति की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
  • 1996 से 1998 तक विधायक रहीं।
  • 21 मार्च 1997 को दूसरी बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं।
  • 1998 में 12वीं लोकसभा के लिए दूसरी बार चुनी गईं।
  • वह उत्तर प्रदेश की अकबरपुर से चुनाव जीतीं और सांसद बनीं।
  • 1999 में मायावती 13वीं लोकसभा के लिए तीसरी बार चुनी गईं।
  • 15 दिसंबर 2001 को कांशीराम ने मायावती को बसपा की कमान सौंपी।
  • फरवरी 2002 में मायावती फिर से यूपी विधान परिषद की सदस्य चुनी गईं।
  • मार्च 2002 में मायावती ने अकबरपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया।
  • 3 मार्च 2002 को मायावती तीसरी बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं और 26 अगस्त 2002 तक सीएम रहीं।
  • 18 सितंबर 2003 को मायावती बहुजन समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।
  • 2004 में मायावती 14वीं लोकसभा के लिए अकबरपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतीं और चौथी बार सांसद बनीं।
  • 2004 में मायावती ने लोकसभा से इस्तीफा दिया और दूसरी बार राज्यसभा सांसद बनी।
  • 27 अगस्त 2006 में मायावती दूसरी बार पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं।
  • 13 मई 2007 को मायावती चौथी बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और 14 मार्च 2012 तक सीएम रहीं। 
  • 2012 के विधानसभा चुनाव में मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी हार गई।
  • मायावती इस वक्त राज्यसभा सांसद हैं।

General Election 2019: Mayawati profile political career BSP lok sabha chunav
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala

मायावती 15 जनवरी 1956 को दिल्ली में जन्मी। उनकी माता का नाम रामरती और पिता का नाम प्रभु दयाल था। दिल्ली के कालिंदी कॉलेज से मायावती ने स्नातक की उपाधि ली और दिल्ली विश्वविद्यालय से एल.एल.बी और बी. एड किया। इसी दौरान मायावती ने प्रशासनिक सेवा की भी तैयारी की। वह कांशीराम के संपर्क में आई और जब उन्होंने पार्टी बनाई तो मायावती उसमें शामिल हो गईं। मायावती ने कुछ किताबें भी लिखी हैं। बसपा की 25वीं वर्षगांठ पर मायावती की किताब 'बहुजन समाज और उसकी राजनीति' का लोकार्पण कांशीराम ने किया। मायावती ने एक और किताब लिखी है- 'मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेंट का सफरनामा'। यह किताब 15 जनवरी 2006 में रिलीज हुई। 

विवादों में भी घिरी मायावती
साल 2002 में मायावती के घर पर सीबीआई की छापेमारी हुई। ताज हेरिटेज कॉरिडोर में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर मायावती और कुछ अन्य लोगों के घर सीबीआई की छापेमारी हुई। 2007 में तात्कालिक राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने कहा कि इस मामले में उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने भी सीबीआई की याचिका को खारिज कर दिया ।  सीबीआई ने मायावती पर आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया। मायावती और उनकी पार्टी ने दावा किया कि उनकी आय में पार्टी कायकर्ताओं द्वारा दिए गए तोहफे भी शामिल हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2011 में मायावती के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। 6 जुलाई 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया। आखिरकार  8 अक्टूबर 2013 को सीबीआई ने मायावती के खिलाफ केस बंद कर दिया।

एक भाषण ने मायावती को बना दिया था रातों-रात पॉलिटिकल स्टार
1977 में जनता दल के मंच पर दिए भाषण ने मायावती को रातों-रात पॉलिटिकल स्टार बना दिया। उस वक्त मायावती महज 21 साल की थीं। उनका यह भाषण इतना जोरदार था कि वहां स्थित अनुसूचित समाज ने राज नारायण मुर्दाबाद और जनता पार्टी मुर्दाबाद तक के नारे लगा दिए। उस वक्त मायावती दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ कर रही थीं। मायावती ने अपने इस भाषण में राज नारायण से लेकर जनता पार्टी और कांग्रेस सबको कोसा। वह गांधी के दिए 'हरिजन' शब्द पर बोल रही थीं। उन्होंने यहां तक कह डाला कि गांधी ने हमारी बेइज्जती के लिए यह शब्द दिया है। उन्होंने कहा कि अगर हम हरिजन हैं तो देवदासियों के बच्चों का क्या, जो ईश्वर की गुलाम मानी जाती हैं। मायावती ने कहा कि हमारे भगवान बाबा साहेब अंबेडकर हैं जिन्होंने कभी हरिजन शब्द का प्रयोग नहीं किया। संविधान में हमारे लिए अनुसूचित जाति लिखा, फिर स्वर्ण हमारे लिए हरिजन क्यों बोलते हैं। ये ही ऐसा वक्त था जब पहली बार कांशीराम को मायावती के बारे में पता चला था।

2019 की राजनीतिक स्थिति...
17वें लोकसभा चुनाव में मायावती यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 
बसपा 38 और सपा 37 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। दो सीटें कांग्रेस और तीन सीटें आरएलडी के लिए छोड़ी गई हैं। मायावती ने यह भी साफ कर दिया है कि कांग्रेस के साथ सूबे में उनका कोई गठबंधन नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सात सीटें छोड़कर भ्रम न फैलाएं। हमारा उनके साथ कोई गठबंधन नहीं है।

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