उदयपुर: 199.50 करोड़ के गांजे का खुलासा, 56 खसरा नंबरों पर उगाए गए थे 1.33 लाख पौधे; बेखबर रहा प्रशासन
राजस्थान के उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील के मांडवा गांव में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, एएनटीएफ और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम ने 56 खसरा नंबरों में फैले गांजे के करीब 1.33 लाख अवैध पौधों को चिह्नित कर उन्हें नष्ट करने का अभियान शुरू किया है।
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राजस्थान के उदयपुर जिले में गांजे की बड़े पैमाने पर अवैध खेती का मामला सामने आया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की जोधपुर जोनल यूनिट, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) राजस्थान और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम ने कोटड़ा तहसील के मांडवा गांव में करीब 1 लाख 33 हजार गांजे के पौधों को चिह्नित किया है। इन पौधों को नष्ट करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के आकलन के अनुसार, इन पौधों से करीब 39,900 किलोग्राम गांजा तैयार हो सकता था, जिसकी बाजार कीमत लगभग 199.50 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस मामले में हैरानी की बात यह है कि खेतों में तीन से चार फीट ऊंचे गांजे के पौधे खड़े होने के बावजूद स्थानीय पुलिस और प्रशासन को कई महीनों तक इसकी जानकारी नहीं मिली। अब जांच एजेंसियों के सामने अवैध खेती करने वालों की पहचान करना बड़ी चुनौती है।
56 खसरा नंबरों में फैली थी अवैध खेती
एएनटीएफ राजस्थान से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने मांडवा गांव में दबिश दी। मौके का निरीक्षण करने के दौरान स्थानीय पुलिस और पटवारी को बुलाकर जमीन का सत्यापन कराया गया। पटवारी की जांच में सामने आया कि गांजे की अवैध खेती 56 खसरा नंबरों में फैली हुई थी। इन जमीनों के रिकॉर्ड में 400 से अधिक मालिकों के नाम दर्ज हैं। अधिकारियों के मुताबिक, खेतों में लगे पौधों से लगभग 39,900 किलोग्राम गांजा तैयार होने का अनुमान है। बाजार में गांजे की कीमत 50 हजार रुपये प्रति किलोग्राम मानकर इसका कुल मूल्य करीब 199.50 करोड़ रुपये आंका गया है।
70 पुलिसकर्मी और अधिकारी पौधे नष्ट करने में जुटे
अवैध फसल को उखाड़कर नष्ट करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, एएनटीएफ और राजस्थान पुलिस के करीब 70 अधिकारी और कर्मचारी जुटे हैं। इनके साथ 10 मजदूर तीन ट्रैक्टरों की मदद से खेतों में लगे गांजे के पौधों को उखाड़कर नष्ट कर रहे हैं।
एनसीबी ने मामला दर्ज करने के बाद पटवारी, ग्राम सेवक, थानाधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक को जमीन तथा खेती में शामिल लोगों की पहचान कर उनकी सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जमीन के रिकॉर्ड में 400 से अधिक मालिकों के नाम होने के कारण वास्तविक रूप से खेती करने वालों की पहचान करना आसान नहीं है। इस घटना ने स्थानीय निगरानी व्यवस्था और सूचना तंत्र पर भी सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतने बड़े क्षेत्र में अवैध खेती कैसे होती रही और इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर समय रहते क्यों नहीं मिल सकी।
राजस्थान के दूसरे जिलों में भी सामने आए गांजे की खेती के मामले
राजस्थान के पहाड़ी इलाकों, जंगलों और खेतों में पहले भी गांजे की अवैध खेती के मामले सामने आ चुके हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से सितंबर के बीच राजस्थान पुलिस 10,213 किलोग्राम गांजा जब्त कर चुकी है। हाल ही में 7 और 8 अक्टूबर को उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील के नयावास गांव में 9.4 बीघा जमीन पर गांजे के 7,577 पौधे मिले थे। इनसे करीब 2,273 किलोग्राम गांजा तैयार होने का अनुमान था, जिसकी कीमत लगभग 11.76 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
इससे पहले 29 मार्च को जयपुर ग्रामीण के समोद क्षेत्र में गांजे के 1,510 पौधे जब्त किए गए थे और एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था। वहीं, 18 सितंबर को डूंगरपुर जिले के पांथल गांव में कपास की फसल के बीच उगाए गए गांजे के 2,505 पौधे जब्त किए गए थे। मांडवा गांव में सामने आया ताजा मामला राजस्थान में गांजे की अवैध खेती के बड़े नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर निगरानी की चुनौतियों की ओर ध्यान खींचता है। अब जांच एजेंसियों का जोर खेती करने वालों की पहचान करने और इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने पर है।