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त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में आज से शारदीय नवरात्र: जगमगा उठा मां का दरबार; पीएम से सीएम तक लगा चुके हैं हाजिरी
Sun, 11 Oct 2026 05:01 AM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sun, 11 Oct 2026 05:01 AM IST
सार
राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित प्रसिद्ध त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर विद्युत सज्जा से जगमगा रहा है और श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
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प्रसिद्ध देवी तीर्थ श्री त्रिपुरा सुंदरी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध देवी तीर्थ श्री त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में रविवार से शारदीय नवरात्र महोत्सव प्रारंभ हो जाएगा। सुबह चार बजे से दर्शन प्रारंभ होंगे। सुबह पांच बजे मंगला आरती होगी। अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना की जाएगी।
विद्युत सज्जा से जगमगाया मंदिर परिसर
व्यवस्थापक मंडल पंचाल समाज चौदह चोखरा द्वारा मंदिर की मनोहारी एवं आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है। रात्रि में मंदिर की सजावट देखते ही बनी। सुबह की आरती के लिए बाहर एलईडी स्क्रीन लगाई गई है, जिससे बाहर खड़े श्रद्धालु भी आरती के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए छाया, पानी एवं बैठने की पूरी व्यवस्था की गई है। तलवाड़ा त्रिपुरा सुंदरी मार्ग पर निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
गुजरात और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों से आएंगे श्रद्धालु
तलवाड़ा, बांसवाड़ा, परतापुर, डूंगरपुर सहित मध्यप्रदेश, गुजरात एवं अन्य राज्यों से हजारों श्रद्धालु नौ दिनों तक दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्र को लेकर पंचाल समाज के लोगों एवं श्रद्धालुओं में मां के दर्शन को लेकर खासा उत्साह है। मंदिर श्री त्रिपुरा सुंदरी व्यवस्थापक मंडल के अध्यक्ष धूलजी भाई पंचाल एवं महामंत्री नटवरलाल पंचाल ने बताया कि इस बार गरबा रास के लिए विशेष डोम पांडाल तैयार किया गया है। मंदिर पर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक आकर्षक एवं विशेष विद्युत सज्जा की गई है।
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नवरात्र महोत्सव का पूरा कार्यक्रम
मंदिर में 11 अक्टूबर 2026, रविवार को दोपहर 12:01 से 12:47 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना होगी। प्रतिदिन मंदिर में सुबह 5 बजे से दर्शन किए जा सकेंगे। नित्य पूजा-अर्चना और आरती सुबह 7 बजे तथा शाम 7 बजे होगी।
अष्टमी पर मंदिर में सुबह 4 बजे से दर्शन और सुबह 5 बजे मंगला आरती होगी। सुबह 11 बजे रजत रथ में शोभायात्रा निकाली जाएगी। 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को अष्टमी हवन और शाम 5 बजे पूर्णाहुति का कार्यक्रम निर्धारित है। गरबा रास प्रतिदिन रात 8 बजे से 12 बजे तक आयोजित होगा।
वार के अनुसार मां का होगा अलग-अलग श्रृंगार
नवरात्र के दौरान मां त्रिपुरा सुंदरी का प्रतिदिन अलग-अलग रंगों में श्रृंगार किया जाएगा। सोमवार को सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को केसरिया यानी नारंगी और शनिवार को नीले रंग का श्रृंगार होगा। रविवार को मां का पंचरंगी श्रृंगार किया जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाले धार्मिक आयोजन में दर्शन, पूजा-अर्चना और गरबा रास श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
18 भुजाओं वाली है मां त्रिपुरा सुंदरी की प्रतिमा
बांसवाड़ा जिले से करीब 14 किलोमीटर दूर तलवाड़ा के समीप ऊमराई गांव में माता त्रिपुरा सुंदरी का भव्य मंदिर है। मुख्य मंदिर के द्वार के किवाड़ चांदी के बने हैं। मां भगवती त्रिपुरा सुंदरी की प्रतिमा अष्टदश यानी 18 भुजाओं वाली है। प्रतिमा में माता दुर्गा के नौ रूपों की प्रतिकृतियां अंकित हैं। मां सिंह, मयूर और कमल आसन पर विराजमान हैं।
तीन रूपों में दर्शन देती हैं माता
मान्यता है कि प्रातःकालीन बेला में मां कुमारिका, मध्याह्न में यौवना और सायंकालीन बेला में प्रौढ़ रूप में दर्शन देती हैं। इसी कारण माता को त्रिपुरा सुंदरी कहा जाता है। यह भी मान्यता है कि मंदिर के आसपास शक्तिपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी नामक तीन पुरियों में स्थित होने के कारण देवी का नाम त्रिपुरा सुंदरी पड़ा।
प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री तक पहुंच चुके हैं दरबार में
मान्यता है कि मां त्रिपुरा सुंदरी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। मंदिर की धार्मिक महत्ता के चलते देश के कई बड़े नेता भी यहां दर्शन करने पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, हरिदेव जोशी, अमित शाह, वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और शिवराज सिंह चौहान सहित कई प्रमुख नेता मां के दरबार में मत्था टेक चुके हैं।
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विद्युत सज्जा से जगमगाया मंदिर परिसर
व्यवस्थापक मंडल पंचाल समाज चौदह चोखरा द्वारा मंदिर की मनोहारी एवं आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है। रात्रि में मंदिर की सजावट देखते ही बनी। सुबह की आरती के लिए बाहर एलईडी स्क्रीन लगाई गई है, जिससे बाहर खड़े श्रद्धालु भी आरती के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए छाया, पानी एवं बैठने की पूरी व्यवस्था की गई है। तलवाड़ा त्रिपुरा सुंदरी मार्ग पर निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
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गुजरात और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों से आएंगे श्रद्धालु
तलवाड़ा, बांसवाड़ा, परतापुर, डूंगरपुर सहित मध्यप्रदेश, गुजरात एवं अन्य राज्यों से हजारों श्रद्धालु नौ दिनों तक दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्र को लेकर पंचाल समाज के लोगों एवं श्रद्धालुओं में मां के दर्शन को लेकर खासा उत्साह है। मंदिर श्री त्रिपुरा सुंदरी व्यवस्थापक मंडल के अध्यक्ष धूलजी भाई पंचाल एवं महामंत्री नटवरलाल पंचाल ने बताया कि इस बार गरबा रास के लिए विशेष डोम पांडाल तैयार किया गया है। मंदिर पर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक आकर्षक एवं विशेष विद्युत सज्जा की गई है।
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नवरात्र महोत्सव का पूरा कार्यक्रम
मंदिर में 11 अक्टूबर 2026, रविवार को दोपहर 12:01 से 12:47 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना होगी। प्रतिदिन मंदिर में सुबह 5 बजे से दर्शन किए जा सकेंगे। नित्य पूजा-अर्चना और आरती सुबह 7 बजे तथा शाम 7 बजे होगी।
अष्टमी पर मंदिर में सुबह 4 बजे से दर्शन और सुबह 5 बजे मंगला आरती होगी। सुबह 11 बजे रजत रथ में शोभायात्रा निकाली जाएगी। 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को अष्टमी हवन और शाम 5 बजे पूर्णाहुति का कार्यक्रम निर्धारित है। गरबा रास प्रतिदिन रात 8 बजे से 12 बजे तक आयोजित होगा।
वार के अनुसार मां का होगा अलग-अलग श्रृंगार
नवरात्र के दौरान मां त्रिपुरा सुंदरी का प्रतिदिन अलग-अलग रंगों में श्रृंगार किया जाएगा। सोमवार को सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को केसरिया यानी नारंगी और शनिवार को नीले रंग का श्रृंगार होगा। रविवार को मां का पंचरंगी श्रृंगार किया जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाले धार्मिक आयोजन में दर्शन, पूजा-अर्चना और गरबा रास श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
18 भुजाओं वाली है मां त्रिपुरा सुंदरी की प्रतिमा
बांसवाड़ा जिले से करीब 14 किलोमीटर दूर तलवाड़ा के समीप ऊमराई गांव में माता त्रिपुरा सुंदरी का भव्य मंदिर है। मुख्य मंदिर के द्वार के किवाड़ चांदी के बने हैं। मां भगवती त्रिपुरा सुंदरी की प्रतिमा अष्टदश यानी 18 भुजाओं वाली है। प्रतिमा में माता दुर्गा के नौ रूपों की प्रतिकृतियां अंकित हैं। मां सिंह, मयूर और कमल आसन पर विराजमान हैं।
तीन रूपों में दर्शन देती हैं माता
मान्यता है कि प्रातःकालीन बेला में मां कुमारिका, मध्याह्न में यौवना और सायंकालीन बेला में प्रौढ़ रूप में दर्शन देती हैं। इसी कारण माता को त्रिपुरा सुंदरी कहा जाता है। यह भी मान्यता है कि मंदिर के आसपास शक्तिपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी नामक तीन पुरियों में स्थित होने के कारण देवी का नाम त्रिपुरा सुंदरी पड़ा।
प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री तक पहुंच चुके हैं दरबार में
मान्यता है कि मां त्रिपुरा सुंदरी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। मंदिर की धार्मिक महत्ता के चलते देश के कई बड़े नेता भी यहां दर्शन करने पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, हरिदेव जोशी, अमित शाह, वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और शिवराज सिंह चौहान सहित कई प्रमुख नेता मां के दरबार में मत्था टेक चुके हैं।