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Hindi News ›   Rajasthan ›   365 steps, a narrow cave, and a glimpse of the Goddess a visit to the Adhar Devi Temple in Mount Abu

माउंट आबू का अधरदेवी मंदिर: 365 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं मां के दर्शन, गुफा में विराजती हैं अर्बुदा माता

Sun, 11 Oct 2026 09:44 PM IST
सिरोही ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: सिरोही ब्यूरो Updated Sun, 11 Oct 2026 09:44 PM IST
सार

राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू स्थित अर्बुदा माता (अधरदेवी मंदिर) श्रद्धा, प्रकृति एवं अनूठी भौगोलिक बनावट के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां दर्शन केवल मंदिर तक पहुंचने का सफर नहीं, बल्कि पहाड़ी रास्ते पर चढ़ाई एवं प्राकृतिक चट्टानों के बीच से गुजरने का एक अलग अनुभव भी है।
 

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365 steps, a narrow cave, and a glimpse of the Goddess a visit to the Adhar Devi Temple in Mount Abu
माउंटआबू स्थित अर्बुदादेवी मंदिर - फोटो : माउंटआबू स्थित अर्बुदादेवी मंदिर

विस्तार

राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में स्थित प्राचीन अर्बुदा माता मंदिर, जिसे अधरदेवी मंदिर भी कहा जाता है, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है। यहां मां के दर्शन के लिए करीब 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। प्राकृतिक चट्टानों के बीच बनी गुफा में विराजमान मां अर्बुदा को लेकर मान्यता है कि यहां माता सती के अधर यानी होंठ गिरे थे। नवरात्र में मंदिर में मेले जैसा माहौल रहता है।
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365 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं मां के दरबार
माउंट आबू बस स्टैंड से करीब 2 किलोमीटर दूर यह अति प्राचीन मंदिर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। इन सीढ़ियों को वर्ष के 365 दिनों से जोड़कर भी देखा जाता है। चढ़ाई के दौरान अरावली की पहाड़ियों और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता के नजारे यात्रियों का ध्यान खींचते हैं।
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यही वजह है कि यहां धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति प्रेमियों की भी रुचि रहती है। वैसे तो यहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़भाड़ बनी रहती है, लेकिन नवरात्र के दौरान मेले जैसा माहौल रहता है। इस दौरान दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं।
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प्राकृतिक चट्टानों की गुफा में विराजमान हैं मां अर्बुदा
मंदिर की सबसे खास बात इसका प्राकृतिक गुफा में स्थित होना है। गर्भगृह तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को चट्टानों के बीच बने संकरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। इसी विशेष बनावट के कारण यहां दर्शन का अनुभव अन्य सामान्य मंदिरों से अलग है।

माता सती के गिरे थे अधर, इसलिए पड़ा अधरदेवी नाम
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के अधर यानी होंठ गिरे थे। इसी मान्यता से मंदिर का नाम अधरदेवी पड़ा। मां अर्बुदा को क्षेत्र की आराध्य देवी के रूप में भी श्रद्धा से पूजा जाता है।

आस्था और पर्यटन का अनूठा संगम है अधरदेवी मंदिर
माउंट आबू आने वाले पर्यटकों के लिए अधरदेवी मंदिर ऐसा स्थल है, जहां धार्मिक आस्था के साथ पहाड़ी प्राकृतिक वातावरण का अनुभव भी मिलता है। यहां की यात्रा यह बताती है कि कई बार किसी धार्मिक स्थल की खासियत केवल उसकी मान्यता में नहीं, बल्कि वहां तक पहुंचने के रास्ते और उसके प्राकृतिक स्वरूप में भी छिपी होती है।

मंदिर जाने से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
मंदिर जाने की योजना बनाने वाले श्रद्धालु सुबह के समय यात्रा को प्राथमिकता दे सकते हैं। सीढ़ियों की चढ़ाई को देखते हुए आरामदायक जूते पहनना, पर्याप्त पानी साथ रखना और बीच-बीच में विश्राम करना उपयोगी है। बुजुर्गों, छोटे बच्चों और चलने में परेशानी महसूस करने वाले लोगों को चढ़ाई तथा संकरे गुफा मार्ग की कठिनाई ध्यान में रखकर ही यात्रा का निर्णय लेना चाहिए।


गुफा के भीतर जाने से पहले मंदिर के स्थानीय नियमों का पालन करना जरूरी है। विशेष रूप से फोटोग्राफी की अनुमति के बारे में पहले जानकारी लें, क्योंकि गर्भगृह में तस्वीरें लेने पर प्रतिबंध होने की जानकारी उपलब्ध है।
 
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