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मानवेंद्र के साथ इन 10 बड़े जाट नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से बदल सकते हैं सियासी समीकरण

Tue, 16 Oct 2018 06:05 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर Updated Tue, 16 Oct 2018 06:05 PM IST
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Rajasthan elections 2018: Manvendra Singh joining Congress with 10 Jat leaders can change politics
मानवेंद्र सिंह
भाजपा के मौजूदा विधायक मानवेंद्र सिंह की 10 बड़े जाट नेताओं के साथ कांग्रेस में शामिल होने की संभावना है। अगर ऐसा हुआ तो राजस्थान के जातिय समीकरणों में एक ऐतिहासिक सोशल इंजीनियरिंग की मिसाल होगी। इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि राजस्थान की 100 विधानसभा सीटों व 18 लोकसभा सीटों पर इस सोशल इंजीनियरिंग का प्रभाव पड़ सकता है। इसके कारण 2018 के विधानसभा और 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। 
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भाजपा के दिग्गज नेता जसंवत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह बुधवार को कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी की मौजूदगी में 10 बड़े जाट नेता भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस का हाथ पकड़ सकते है। अगर ऐसा हुआ तो राजस्थान की राजनीति में एक बार इतिहास दोहराया जाएगा।
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में राजस्थान के कई बड़े जाट नेता नारायण राम बेड़ा, सुमित्रा सिंह, ऊषा पूनिया, ज्ञानप्रकाश पिलानिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीप धनखड़, पूर्व सांसद हरिसिंह, सुभाष महरिया, पूर्व विधायक रणवीर पहलवान, जीतराम डूडी सहित कई जाट नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। 
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जाट राजपूत समीकरण राजस्थान की राजनीति में पहले भी अपना रंग दिखा चुके हैं। 1980 के दशक में किसी समय में धुर विरोधी रहे जाट नेता नाथूराम मिर्धा एवं राजपूत नेता कल्याण सिंह कालवी के बीच समन्वय कायम हुआ।

इसका नुकसान कांग्रेस को आज तक भुगतना पड़ा है क्योंकि इस समीकरण से पूर्व जाट समुदाय के नेता भाजपा को अछूत मानते थे और ना के बराबर जाट नेता भाजपा के साथ जुडने की आकांक्षा रखते थे। लेकिन इन दो नेताओं के गठजोड़ के कारण काफी संख्या में जाट नेताओं ने कालान्तर में भाजपा की ओर रुख किया। जो दो दशकों में भाजपा के लिए पूर्ण बहुमत में फलीभूत हुआ है। 

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट जाट नेताओं के इस रुख को भाजपा की बड़ी नाकामी और कांग्रेस की सफलता मान रहे हैं। पायलट ने कहा, "भाजपा को यह सोचना चाहिए कि पांच सालों के अपने शासन के दौरान उन्होंने ऐसा क्या किया कि जाट और राजपूत समुदाय चुनाव से पहले उनके खिलाफ हो गया है।" 

अब एक बार फिर इस सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के जरिये इतिहास दोहराए जाने की तैयारियां की जा रही है। इसे अगर राष्ट्रीय परिपेक्ष में देखा जाए तो राजस्थान की सीमाओं से जुड़े यूपी, दिल्ली और हरियाणा की जाट राजनीति में कांग्रसे के लिए नए समीकरणों के संकेत बन सकते है। 


इस बीच मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस का हाथ पकड़ने के साथ ही पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के राजस्थान दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। राहुल के इस दौरे में बारां, झालावाड़, कोटा-बूंदी में जनसभाएं और रोड शो हो सकते हैं। 
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