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राजस्थान: साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए राहत, कोर्ट के चक्करों से मुक्ति,पीड़ितों को वापस मिलेंगे 5.67 करोड़
Sat, 17 Oct 2026 04:09 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sat, 17 Oct 2026 04:09 PM IST
सार
साइबर ठगी के पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए राजस्थान पुलिस ने अब तक 8,016 आवेदनों का निस्तारण कर बैंकों को 5.67 करोड़ रुपये लौटाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने लोगों को ठगी की राशि वापस दिलाने का झांसा देने वाले दलालों से सावधान रहने की अपील की है।
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साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
साइबर ठगी के शिकार लोगों को अब अपनी डूबी हुई रकम वापस पाने के लिए अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा आर-4-सी ने बैंक खातों में रोकी गई राशि पीड़ितों को वापस दिलाने के लिए मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के जरिये अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस डिजिटल व्यवस्था के अंतर्गत अब तक 8,016 आवेदनों का निस्तारण करते हुए बैंकों को 5.67 करोड़ रुपये की राशि पीड़ितों को लौटाने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इस पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से पात्र व्यक्तियों को बिना किसी अदालती झंझट के उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल रही है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशों के तहत इस पूरी व्यवस्था को संचालित किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने जानकारी दी कि इस पहल से धन वापसी की प्रक्रिया अत्यंत सरल, सुगम और समयबद्ध बन गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस नए मॉड्यूल को प्रारंभ किया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर अपराध वीके सिंह ने बताया कि इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य ठगी के मामलों में त्वरित राहत प्रदान करना है।
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इस व्यवस्था के तहत बैंक खातों में अटकी राशि के आधार पर धन वापसी की प्रक्रिया को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पीड़ित व्यक्ति को अपनी ठगी की शिकायत दर्ज कराने के लिए सबसे पहले साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का सहारा लेना होता है। वहां से मिलने वाले पावती क्रमांक के आधार पर संदिग्ध खाते में राशि रुकने के बाद मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल पर रिफंड का अनुरोध किया जा सकता है। इसके पश्चात नियुक्त जांच अधिकारी शिकायतकर्ता के आवेदन, बैंक के लेन-देन और रोकी गई राशि का गहन सत्यापन करता है। आवश्यकता महसूस होने पर संदिग्ध खाताधारक से स्पष्टीकरण भी मांगा जाता है। यदि जांच में यह सिद्ध हो जाता है कि रोकी गई राशि पीड़ित की ही है तो पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 106(3) के तहत बैंक को धन लौटाने की अनुशंसा भेजती है। तत्पश्चात संबंधित बैंक उस राशि को सीधे पीड़ित के खाते में स्थानांतरित कर देता है।
दलालों से सावधान रहने की हिदायत
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को सचेत किया है कि इस ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से धन वापसी की यह संपूर्ण प्रक्रिया पूरी तरह बिना किसी शुल्क के संचालित होती है। ठगी की राशि वापस दिलाने का झूठा झांसा देने वाले मध्यस्थों अथवा अनधिकृत एजेंटों के बहकावे में न आएं और किसी भी प्रकार का भुगतान न करें। ठगी की घटना होते ही तत्काल राष्ट्रीय साइबर पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आमजन सहायता के लिए जारी किए गए विशेष हेल्पडेस्क नंबरों पर भी तुरंत सूचना दे सकते हैं।
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पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशों के तहत इस पूरी व्यवस्था को संचालित किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने जानकारी दी कि इस पहल से धन वापसी की प्रक्रिया अत्यंत सरल, सुगम और समयबद्ध बन गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस नए मॉड्यूल को प्रारंभ किया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर अपराध वीके सिंह ने बताया कि इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य ठगी के मामलों में त्वरित राहत प्रदान करना है।
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इस व्यवस्था के तहत बैंक खातों में अटकी राशि के आधार पर धन वापसी की प्रक्रिया को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पीड़ित व्यक्ति को अपनी ठगी की शिकायत दर्ज कराने के लिए सबसे पहले साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का सहारा लेना होता है। वहां से मिलने वाले पावती क्रमांक के आधार पर संदिग्ध खाते में राशि रुकने के बाद मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल पर रिफंड का अनुरोध किया जा सकता है। इसके पश्चात नियुक्त जांच अधिकारी शिकायतकर्ता के आवेदन, बैंक के लेन-देन और रोकी गई राशि का गहन सत्यापन करता है। आवश्यकता महसूस होने पर संदिग्ध खाताधारक से स्पष्टीकरण भी मांगा जाता है। यदि जांच में यह सिद्ध हो जाता है कि रोकी गई राशि पीड़ित की ही है तो पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 106(3) के तहत बैंक को धन लौटाने की अनुशंसा भेजती है। तत्पश्चात संबंधित बैंक उस राशि को सीधे पीड़ित के खाते में स्थानांतरित कर देता है।
दलालों से सावधान रहने की हिदायत
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को सचेत किया है कि इस ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से धन वापसी की यह संपूर्ण प्रक्रिया पूरी तरह बिना किसी शुल्क के संचालित होती है। ठगी की राशि वापस दिलाने का झूठा झांसा देने वाले मध्यस्थों अथवा अनधिकृत एजेंटों के बहकावे में न आएं और किसी भी प्रकार का भुगतान न करें। ठगी की घटना होते ही तत्काल राष्ट्रीय साइबर पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आमजन सहायता के लिए जारी किए गए विशेष हेल्पडेस्क नंबरों पर भी तुरंत सूचना दे सकते हैं।