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राजस्थान: नहरी पानी पर पंजाब-राजस्थान में टकराव, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मांगी 1.44 लाख करोड़ की रॉयल्टी
Wed, 28 Oct 2026 07:51 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Wed, 28 Oct 2026 07:51 PM IST
सार
राजस्थान और पंजाब के बीच नहरी पानी को लेकर विवाद गहरा गया है। पंजाब सरकार ने आजादी से पहले के समझौते का हवाला देते हुए राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी मांगी है।
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पंजाब व राजस्थान के सीएम। फाइल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान और पंजाब के बीच नहरी पानी को लेकर सियासी तनाव बढ़ गया है। पंजाब सरकार ने आजादी से पहले के समझौते का हवाला दिया है। उसने राजस्थान से पानी के बदले 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी मांगी है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा के विशेष सत्र में यह मुद्दा उठाया।
सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने रॉयल्टी की मांग से जुड़ा प्रस्ताव सदन में पेश किया। राजस्थान सरकार इस मांग को पहले ही खारिज कर चुकी है। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि राजस्थान वर्ष 1960 तक पानी की रॉयल्टी देता था। अब वह पंजाब से मुफ्त पानी लेकर आर्थिक लाभ कमा रहा है।
उन्होंने इसे कारोबार से जोड़ा और कहा कि पंजाब से कच्चा माल मुफ्त लिया जा रहा है। मान ने दावा किया कि पंजाब का राजस्थान पर 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी का हक बनता है। उन्होंने पानी की एक-एक बूंद के लिए लड़ाई लड़ने की बात कही। पंजाब सरकार अदालत से लेकर सड़क तक संघर्ष करेगी।
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पंजाब का तर्क और केंद्र से मांग
पंजाब विधानसभा में बरिंदर कुमार गोयल ने रॉयल्टी वसूलने का प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में कहा गया कि सतलुज, रावी और व्यास नदियां राजस्थान से नहीं गुजरतीं। इसलिए राजस्थान को नदी के किनारे स्थित राज्य नहीं माना जा सकता। पंजाब सरकार के अनुसार, दशकों से राज्य का पानी राजस्थान को दिया जा रहा है। राजस्थान इस पानी से आर्थिक लाभ ले रहा है, जबकि पंजाब जल संकट का सामना कर रहा है। प्रस्ताव में राजस्थान सरकार से पानी की कीमत चुकाने की मांग की गई। केंद्र सरकार से भी भविष्य में भुगतान सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
राजस्थान का दोटूक जवाब
पंजाब सरकार ने इससे पहले 19 मार्च को भी यह मुद्दा उठाया था। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तब पानी रोकने की चेतावनी दी थी। इसके अगले दिन 20 मार्च को राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने मांग खारिज कर दी थी। राजस्थान सरकार ने रॉयल्टी देने से साफ इन्कार कर दिया। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि पानी पर किसी एक राज्य का व्यावसायिक दावा सांविधानिक नहीं है। यह स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप भी नहीं है।
ये भी पढ़ें- करवाचौथ 2026: जानें आपके शहर में कब दिखेगा चांद, बादल छाए रहने पर अर्घ्य देने के लिए एक्सपर्ट ने बताया उपाय
1920 के समझौते का हवाला और सियासी मायने
राजस्थान सरकार ने अपने पक्ष में वर्ष 1920 के समझौते का हवाला दिया। यह समझौता ब्रिटिश सरकार, बहावलपुर रियासत और बीकानेर रियासत के बीच हुआ था। इसके तहत बीकानेर रियासत की करीब पांच लाख एकड़ जमीन के लिए पानी तय हुआ था।
राजस्थान के अनुसार, समझौते में शुल्क ब्रिटिश सरकार को देना था, पंजाब प्रांत को नहीं। इसी आधार पर राजस्थान ने पंजाब की मौजूदा मांग खारिज की थी। पंजाब में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस मुद्दे के फिर उठने से इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। दोनों राज्यों के बीच यह विवाद फिर चर्चा में आ गया है।
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सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने रॉयल्टी की मांग से जुड़ा प्रस्ताव सदन में पेश किया। राजस्थान सरकार इस मांग को पहले ही खारिज कर चुकी है। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि राजस्थान वर्ष 1960 तक पानी की रॉयल्टी देता था। अब वह पंजाब से मुफ्त पानी लेकर आर्थिक लाभ कमा रहा है।
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उन्होंने इसे कारोबार से जोड़ा और कहा कि पंजाब से कच्चा माल मुफ्त लिया जा रहा है। मान ने दावा किया कि पंजाब का राजस्थान पर 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी का हक बनता है। उन्होंने पानी की एक-एक बूंद के लिए लड़ाई लड़ने की बात कही। पंजाब सरकार अदालत से लेकर सड़क तक संघर्ष करेगी।
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पंजाब का तर्क और केंद्र से मांग
पंजाब विधानसभा में बरिंदर कुमार गोयल ने रॉयल्टी वसूलने का प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में कहा गया कि सतलुज, रावी और व्यास नदियां राजस्थान से नहीं गुजरतीं। इसलिए राजस्थान को नदी के किनारे स्थित राज्य नहीं माना जा सकता। पंजाब सरकार के अनुसार, दशकों से राज्य का पानी राजस्थान को दिया जा रहा है। राजस्थान इस पानी से आर्थिक लाभ ले रहा है, जबकि पंजाब जल संकट का सामना कर रहा है। प्रस्ताव में राजस्थान सरकार से पानी की कीमत चुकाने की मांग की गई। केंद्र सरकार से भी भविष्य में भुगतान सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
राजस्थान का दोटूक जवाब
पंजाब सरकार ने इससे पहले 19 मार्च को भी यह मुद्दा उठाया था। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तब पानी रोकने की चेतावनी दी थी। इसके अगले दिन 20 मार्च को राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने मांग खारिज कर दी थी। राजस्थान सरकार ने रॉयल्टी देने से साफ इन्कार कर दिया। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि पानी पर किसी एक राज्य का व्यावसायिक दावा सांविधानिक नहीं है। यह स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप भी नहीं है।
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1920 के समझौते का हवाला और सियासी मायने
राजस्थान सरकार ने अपने पक्ष में वर्ष 1920 के समझौते का हवाला दिया। यह समझौता ब्रिटिश सरकार, बहावलपुर रियासत और बीकानेर रियासत के बीच हुआ था। इसके तहत बीकानेर रियासत की करीब पांच लाख एकड़ जमीन के लिए पानी तय हुआ था।
राजस्थान के अनुसार, समझौते में शुल्क ब्रिटिश सरकार को देना था, पंजाब प्रांत को नहीं। इसी आधार पर राजस्थान ने पंजाब की मौजूदा मांग खारिज की थी। पंजाब में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस मुद्दे के फिर उठने से इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। दोनों राज्यों के बीच यह विवाद फिर चर्चा में आ गया है।