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Nagaur News : मुगलकाल के बाद एक बार फिर चर्चा में आया जायल का मायरा, भाइयों ने दो करोड़ से ज्यादा का भात भरा

Mon, 09 Dec 2024 03:47 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर Published by: प्रिया वर्मा Updated Mon, 09 Dec 2024 03:47 PM IST
सार

बुरड़ी गांव के दो भाइयों ने अपनी बहन के बेटे की शादी में दो करोड़ का मायरा भरा। ढाई सौ कारों के काफिले के साथ मायरा लेकर पहुंचे भाइयों की गांव में हर तरफ चर्चा है।

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Nagaur News: Once again Jayal's myra came into discussion, brothers filled myra worth more than 2 crores
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के जायल तहसील के बुरड़ी गांव में दो भाइयों ने अपनी बहन के बेटे की शादी में 2 करोड़ रुपए से अधिक का मायरा भरकर इतिहास रच दिया। यह मायरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है और इसे मुगलकाल के समय भरे गए जायल के मायरे से जोड़कर देखा जा रहा है।

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जानकारी के अनुसार बुरड़ी गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रामनारायण झाड़वाल ने अपनी बेटी संतोष के बेटे रामेश्वर ढाका की शादी में यह मायरा भरा। इस मायरे में 1 करोड़ 1 लाख रुपये नकद के साथ, 30 लाख रुपये का प्लॉट, 25 तोला सोना और 5 किलो चांदी, 140 चांदी के सिक्के, नई ट्रैक्टर-ट्रॉली बाजरी से भरी हुई, देशी घी से भरा हुआ मटका दिया गया।
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मायरा भरने गए परिजनों के साथ ढाई सौ कारों का काफिला जायल के बुरड़ी गांव से मनीराम ढाका के गांव मालगांव की ओर रवाना हुआ, तो इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इस मायरे की चर्चा पूरे इलाके में फैल गई। मायरा भरने से पहले गांव की सीमा पर स्थित खेजड़ी के पेड़ को चुनरी ओढ़ाकर भाइयों ने मायरे की परंपरा को निभाया।
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क्या है जायल- खियाला का मायरा

मारवाड़ के नागौर में जायल के खियाला गांव के जाटों द्वारा भरा गया मायरा पुराने समय से ही चर्चा में रहा है। आज भी मारवाड़ की महिलाएं इस मायरे को लोकगीतों में याद करते हुए गाती हैं। इस मायरे के बारे में बताया जाता है कि मुगलिया सल्तनत के दौर में मारवाड़ से राजस्व कलेक्शन का काम खियाला गांव के दो भाइयों धर्माराम और गोपालराम के जिम्मे था। एक बार जब वे राजस्व जमा करवाने दिल्ली जा रहे थे इसी बीच रास्ते में एक महिला लिछमा रास्ते में रोती हुई मिली और उसने बताया कि उसके बेटे की शादी है और उसके कोई भाई नहीं है इसलिये उसे बच्चों की शादी में मायरा कौन भरेगा? उसकी ससुराल वाले भी इसके लिए उसे ताने दे रहे हैं इसलिए अब वह आत्महत्या करने वाली है। इस पर धर्माराम और गोपालराम ने उसे आत्महत्या करने से रोका और अपने पास के पूरे राजस्व के पैसों से उसके यहां का मायरा भर दिया। इसके बाद दोनों भाई दिल्ली दरबार पहुंचे और दिल्ली के बादशाह को पूरी बात सच-सच बता दी। दरबार में बैठे लोगों ने यह सुनकर तरह-तरह के आरोप लगाने शुरू कर दिए दोनों भाइयों को मौत की सजा देने की बात करने लगे लेकिन बादशाह ने अपने गुप्तचर को मारवाड़ भेजकर हकीकत पता करवाई और जब असलियत पता चलने के बाद उन्हें माफ कर दिया।


जायल का यह मायरा न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा को उजागर करता है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे पारंपरिक रस्में आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। रामनारायण झाड़वाल और उनके दोनों बेटों डॉ. अशोक झाड़वाल और रामकिशोर ने मायरा भरने की परंपरा निभाते हुए परिवार की एकता का अद्वितीय उदाहरण पेश किया है।

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