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Rajasthan: RGHS में ज्यादा क्लेम का खेल! मरीजों को 3-4 बार बुलाकर कराईं जांचें, 50 अस्पताल जांच के घेरे में

Sat, 22 Aug 2026 07:23 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Sat, 22 Aug 2026 07:23 AM IST
सार

RGHS में 2 हजार रुपए से अधिक लागत वाली जांचों के लिए प्री-ऑथराइजेशन की व्यवस्था है। इसी से बचने के लिए  जांचों और क्लेम को अलग-अलग किया गया।
RGHS के डेटा विश्लेषण में एक महीने के दौरान 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण सामने आए हैं।

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RGHS ‘Claim Game’: Patients Called 3-4 Times for Tests, 50 Private Hospitals Under Probe
आरजीएचएस -सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में निजी अस्पतालों की ओर से ज्यादा क्लेम हासिल करने के लिए मरीजों को बार-बार अस्पताल बुलाकर अलग-अलग जांच कराने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में आशंका है कि 2 हजार रुपए से अधिक लागत वाली जांचों पर लागू प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था से बचने के लिए जांचों और क्लेम को अलग-अलग किया गया।

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RGHS के डेटा विश्लेषण में एक महीने के दौरान 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण सामने आए हैं। इन मामलों में करीब 50 निजी अस्पताल और 60 चिकित्सक जांच के दायरे में हैं। सबसे ज्यादा मामले जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और अलवर में सामने आए हैं।
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एक बीमारी के लिए 3-4 बार अस्पताल बुलाया

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि कुछ निजी अस्पतालों में एक ही बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को 3 - 4 बार अस्पताल बुलाकर

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अलग-अलग जांचें कराने की बात सामने आई है। आशंका है कि ऐसा अधिक क्लेम प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया। दरअसल, RGHS में 2 हजार रुपए से अधिक लागत वाली जांचों के लिए प्री-ऑथराइजेशन की व्यवस्था है। जांचों को अलग-अलग कराए जाने से इस प्रक्रिया से बचने और अलग-अलग क्लेम प्रस्तुत करने की आशंका है।

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महिलाओं और बुजुर्गों को भी बार-बार बुलाया

RGHS की परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल के अनुसार, जांचों को अलग-अलग कराने के कारण मरीजों को अनावश्यक रूप से कई बार अस्पताल जाना पड़ा। इनमें महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को भी जांच के लिए बार-बार अस्पताल बुलाए जाने के मामले सामने आए हैं। इससे मरीजों को परेशानी होने के साथ ही RGHS की व्यवस्था के दुरुपयोग की आशंका भी पैदा हुई है।

479 मामलों की जांच जारी

विभाग ने इन सभी मामलों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच में यह देखा जा रहा है कि अस्पतालों और चिकित्सकों ने जानबूझकर अधिक क्लेम हासिल करने या प्री-ऑथराइजेशन से बचने के लिए जांचों और दावों को विभाजित तो नहीं किया। यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो संबंधित अस्पतालों और चिकित्सकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
RGHS का उद्देश्य लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उन्हें अनावश्यक जांच और अस्पताल के चक्कर से बचाना है। विभाग ने कहा है कि योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए डेटा विश्लेषण के जरिए ऐसे मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है।

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