राजस्थान: पुलिस का बड़ा फैसला, सरकारी ई-मेल से अमेजन, फ्लिपकार्ट और जोमैटो पर खाता बनाने पर रोक
राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित साइबर हमलों, अनधिकृत पहुंच और पासवर्ड चोरी के खतरे को देखते हुए सरकारी ई-मेल के इस्तेमाल पर सख्ती की है। अब पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अपनी आधिकारिक ई-मेल आईडी से अमेजन, फ्लिपकार्ट और जोमैटो जैसी निजी या ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर खाते नहीं बना सकेंगे।
विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से होने वाले साइबर हमलों, अनधिकृत पहुंच और पासवर्ड चोरी के बढ़ते खतरे को देखते हुए राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए हैं। अब पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अपनी सरकारी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल अमेजन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो जैसी निजी और ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर खाता बनाने के लिए नहीं कर सकेंगे। पुलिस मुख्यालय ने इस पर पूरी तरह रोक लगा दी है। साथ ही, जिन कर्मचारियों ने पहले से अपनी सरकारी ई-मेल आईडी इन प्लेटफॉर्मों से जोड़ रखी है, उन्हें अपने खाते से सरकारी ई-मेल हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी ई-मेल के दुरुपयोग को रोकने की तैयारी
वर्तमान समय में साइबर अपराधी और हैकर्स सरकारी संस्थानों के ई-मेल सिस्टम, नेटवर्क, सर्वर और डिजिटल संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए आधुनिक एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे फिशिंग यानी धोखाधड़ी वाले संदेशों के जरिए जानकारी चुराने और लॉगिन से जुड़ी जानकारी चोरी होने का खतरा बढ़ रहा है। ई-कॉमर्स और अन्य निजी वेबसाइटों पर डेटा चोरी होने की स्थिति में सरकारी ई-मेल आईडी और पासवर्ड भी लीक हो सकते हैं। ऐसे संवेदनशील विवरण डार्क वेब पर पहुंचने का खतरा रहता है। इससे सरकारी नेटवर्क की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, कमजोर या पुराने पासवर्ड का इस्तेमाल, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की कमी और कर्मचारियों के तबादले या सेवानिवृत्ति के बाद भी निष्क्रिय वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) खाते चालू रहना सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती हैं। पुलिस मुख्यालय ने इन खतरों को कम करने के लिए सरकारी ई-मेल के इस्तेमाल से जुड़े नियम सख्त किए हैं।
एफआईआर और केस डायरी जैसे संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा
राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) में दर्ज संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा के लिए भी नए नियम लागू किए हैं। इसके तहत एफआईआर, केस डायरी, गवाहों के बयान, बैंक विवरण और जांच रिपोर्ट जैसे दस्तावेजों तक पहुंच केवल अधिकृत पुलिसकर्मियों तक सीमित रहेगी। पुलिस मुख्यालय ने इन गोपनीय दस्तावेजों को बिना अनुमति डाउनलोड करने, निजी ई-मेल पर भेजने या किसी सार्वजनिक क्लाउड प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। ऐसे दस्तावेजों का डेटा लीक होने से चल रही जांच प्रभावित हो सकती है और गवाहों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
हर महीने होगा सुरक्षा ऑडिट, निष्क्रिय वीपीएन खाते होंगे बंद
नई व्यवस्था के तहत राजस्थान पुलिस हर महीने के दूसरे सोमवार या मंगलवार को सुरक्षा ऑडिट करेगी। इस दौरान अधिकारी वर्क फ्रॉम होम या रिमोट एक्सेस के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वीपीएन खातों की समीक्षा करेंगे। जो खाते लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं, उन्हें तुरंत बंद किया जाएगा।
साइबर हमले की स्थिति में सिस्टम को नेटवर्क से करना होगा अलग
साइबर क्राइम के डीजी संजय अग्रवाल ने अधिकारियों को कंप्यूटर, लैपटॉप और सर्वर में गैर-जरूरी पोर्ट्स और सेवाओं को तुरंत बंद करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सभी सिस्टम में एंटीवायरस को अपडेट रखने पर जोर दिया गया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि साइबर हमले या किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर प्रभावित सिस्टम को तुरंत नेटवर्क से अलग कर दिया जाए, ताकि खतरे को दूसरे सिस्टम तक फैलने से रोका जा सके। इसके अलावा, सभी संबंधित अधिकारियों को 26 अक्तूबर तक विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजने का आदेश दिया गया है।