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Jaipur News : पद की लालसा इतनी कि खुद को राज्यमंत्री का दर्जा दे रहे हैं पूर्व विधायक, जानिये क्या है मामला

Sun, 15 Dec 2024 02:19 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Sun, 15 Dec 2024 02:19 PM IST
सार

सैनिक कल्याण बोर्ड का चेयरमैन बनाए जाने के बावजूद नीमकाथाना से पूर्व विधायक प्रेमसिंह बाजोर की लालसा समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। इसी के चलते अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल और आधिकारिक पत्रों में वे अपने आप को राज्यमंत्री का दर्जा दिए हुए हैं।

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Jaipur : In the desire of post, former MLA is giving himself the status of Minister of State, know the matter
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान की राजनीति में सत्ता और पद की महत्वाकांक्षा का नया उदाहरण सामने आया है। हाल ही में एक बोर्ड के चेयरमैन बने भाजपा नेता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। चेयरमैन बनने के बाद भी वे अपने आधिकारिक पत्रों और सोशल मीडिया प्रोफाइल में राज्यमंत्री का दर्जा लिख रहे हैं। दरअसल ये मामला है कि नीमकाथाना से पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजोर का, जिन्हें हाल ही में सैनिक कल्याण बोर्ड का चैयरमैन बनाया गया है। चेयरमैन का पद कैबिनेट मंत्री या राज्यमंत्री के दर्जे से कम नहीं माना जाता लेकिन आधिकारिक तौर पर यह किसी संवैधानिक पद की श्रेणी में नहीं आता। इसके बावजूद बाजोर अपने नाम के साथ स्टेट मिनिस्टर का उल्लेख कर रहे हैं।

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सूत्रों के मुताबिक बाजोर पहले भाजपा सरकार में पूर्व विधायक रहे थे लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें लंबे समय तक किसी पद की जिम्मेदारी नहीं मिली। अब चेयरमैन बनने के बाद भी वे स्टेट मिनिस्टर का दर्जा पाने की लालसा रख रहे हैं।
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वॉलीबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (वीएफआई) की शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में सैनिक कल्याण बोर्ड के चेयरमैन प्रेमसिंह बाजोर की उपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फेडरेशन की इस प्रेसवार्ता में उन्होंने भाग लिया लेकिन उनकी उपस्थिति को लेकर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह किस आधिकारिक हैसियत से इसमें शामिल हुए क्योंकि उनका संबंध सैनिक कल्याण बोर्ड से है, जो खेल से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ नहीं है।
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भाजपा के नेताओं का मानना है कि ऐसे कार्य पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उपचुनाव से पूर्व कुछ नेताओं को बोर्ड और आयोगों में चेयरमैन का पद देकर राजनीतिक नियुक्तियां दी गई थीं लेकिन इस तरह से राज्यमंत्री का दर्जा लिखना नियमों का उल्लंघन है।


गौरतलब है कि संवैधानिक नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो मंत्री पद पर नहीं है, वह स्वयं को मंत्री के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकता। इसके लिए स्पष्ट निर्देश हैं कि पूर्व मंत्रियों को अपने पदनाम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। चेयरमैन के पद को कैबिनेट या राज्यमंत्री के समान सुविधाएं मिल सकती हैं, लेकिन यह संवैधानिक दर्जा नहीं है।

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