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कोर्ट के आदेश की अवहेलना: चार वन अधिकारियों के वेतन से रोजाना 10-10 हजार रुपये की वसूली का आदेश

Thu, 15 Oct 2026 10:33 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धौलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धौलपुर Published by: प्रतीक पांडेय Updated Thu, 15 Oct 2026 10:33 PM IST
सार

राजस्थान के धौलपुर में अदालत के आदेश की अनदेखी वन विभाग के चार अधिकारियों को भारी पड़ सकती है। सरमथुरा एमजेएम न्यायालय ने जब्त ट्रक और हाइड्रा मशीन को छोड़ने के निर्देश के बावजूद उनकी रिहाई नहीं होने पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने आदेश दिया कि सितंबर से वाहन छोड़े जाने तक संबंधित अधिकारियों के वेतन से रोजाना 

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dholpur court orders daily salary recovery from four forest officers for not releasing seized truck and hydra
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले में सरमथुरा एमजेएम न्यायालय ने अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर वन विभाग के चार अधिकारियों के वेतन से रोजाना 10-10 हजार रुपये की वसूली करने का आदेश जारी किया है। एमजेएम विजेंद्र कुमार मीणा ने 30 सितंबर को अवैध खनन के मामले में जब्त किए गए एक ट्रक और हाइड्रा मशीन को छोड़ने का आदेश दिया था। इसके बावजूद विभाग ने दोनों वाहनों को नहीं छोड़ा, जिस पर न्यायालय ने अधिकारियों को अवहेलना का दोषी माना है।
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वाहनों की जब्ती और अदालती प्रक्रिया
वन विभाग ने लगभग छह महीने पहले अवैध खनन के आरोप में आसाराम और रामवीर के ट्रक व हाइड्रा मशीन को जब्त किया था। वाहन मालिकों ने पहले विभागीय अधिकारियों से वाहन छोड़ने की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने भरतपुर डीजे कोर्ट में परिवाद दायर किया। डीजे कोर्ट ने 19 सितंबर को सुनवाई करते हुए सरमथुरा एमजेएम न्यायालय को आदेश दिया कि वह 10-10 लाख रुपये के बॉन्ड और आवश्यक दस्तावेज जमा करवाकर वाहनों को रिहा करने के आदेश जारी करे। इसके बाद एमजेएम न्यायालय ने 30 सितंबर को वन अधिकारियों को दोनों वाहनों को छोड़ने का निर्देश जारी किया था।
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अधिकारियों का चक्कर कटवाना और अवहेलना
अदालती आदेश लेकर जब वाहन मालिक सरमथुरा रेंज कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारियों ने उन्हें धौलपुर उपवन संरक्षक के पास भेज दिया। वहां से उन्हें धौलपुर के सहायक वन संरक्षक के पास भेजा गया। इस प्रकार पीड़ितों को कई दिनों तक एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घुमाया गया और आदेश की पालना नहीं की गई। इससे परेशान होकर पीड़ित पक्ष ने 14 अक्तूबर को एमजेएम न्यायालय में फिर से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। मामले की समीक्षा के बाद एमजेएम विजेंद्र कुमार मीणा ने माना कि अधिकारी अदालत के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं।
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वेतन से वसूली और जांच के आदेश
न्यायालय ने सरमथुरा के क्षेत्रीय वन अधिकारी, धौलपुर के सहायक वन संरक्षक, धौलपुर के उपवन संरक्षक और भरतपुर के मुख्य वन संरक्षक को दोषी ठहराया है। आदेश के अनुसार, सितंबर से लेकर जब तक वाहनों को छोड़ा नहीं जाता, तब तक प्रत्येक दोषी अधिकारी के वेतन से प्रतिदिन 10-10 हजार रुपये की वसूली की जाएगी। न्यायालय ने सरमथुरा के क्षेत्राधिकारी (सीओ) को आदेश की तामील कराने के निर्देश दिए तथा 26 अक्तूबर तक जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने को कहा है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि वन अधिकारी हठधर्मिता, अनुशासनहीनता और अदालत के प्रति अवहेलना बरत रहे हैं। इसलिए पूरे मामले से जयपुर स्थित उच्च न्यायालय को भी अवगत कराने का फैसला लिया गया है।
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