राजस्थान न्यूज: 22 हजार करोड़ का पावर हाईवे, 15 नए GSS से दौड़ेगी ग्रीन एनर्जी की बिजली
राजस्थान में सौर और पवन ऊर्जा से बढ़ते बिजली उत्पादन को देखते हुए भजनलाल सरकार करीब 22 हजार करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन एनर्जी पावर हाईवे बनाने की तैयारी कर रही है। परियोजना के तहत 15 नए ग्रिड सब-स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें सात 765 केवी, तीन 400 केवी और पांच 220 केवी क्षमता के होंगे।
विस्तार
राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन को देखते हुए भजनलाल सरकार ग्रीन एनर्जी के लिए करीब 22 हजार करोड़ रुपये की लागत से नया पावर हाईवे बनाने की तैयारी कर रही है। इस परियोजना का उद्देश्य अक्षय ऊर्जा से पैदा होने वाली बिजली को लंबी दूरी तक आसानी से पहुंचाना और राज्य के बिजली ग्रिड को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि नए पावर हाईवे से प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। साथ ही, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
बड़े सौर और विंड पार्कों से बिजली पहुंचाने की तैयारी
सरकार अपने इस महत्वाकांक्षी पावर हाईवे प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इसके तहत उन क्षेत्रों से बिजली को लंबी दूरी तक पहुंचाया जाएगा, जहां बड़े सौर पार्क और विंड पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से पैदा होने वाली हजारों मेगावाट बिजली को राज्य के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने के लिए नया विद्युत कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था से राज्य में बनने वाली अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं से पैदा होने वाली 13 हजार मेगावाट से अधिक अतिरिक्त बिजली के संचरण की क्षमता मजबूत होगी।
15 नए ग्रिड सब-स्टेशन होंगे तैयार
ग्रीन एनर्जी ट्रांसमिशन नेटवर्क के तहत बिजली की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुल 15 नए बड़े ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस) बनाए जाने की योजना है। इन सब-स्टेशनों की क्षमता अलग-अलग होगी। योजना के अनुसार इनमें 7 जीएसएस 765 केवी, 3 जीएसएस 400 केवी और 5 जीएसएस 220 केवी क्षमता के होंगे। ये सब-स्टेशन राजस्थान के बड़े सौर और पवन ऊर्जा पार्कों से बिजली लेकर उसे राज्य के ग्रिड नेटवर्क तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
22 हजार करोड़ की परियोजना, केंद्र से मिल सकते हैं 6 हजार करोड़
करीब 22 हजार करोड़ रुपये की इस बड़ी परियोजना के लिए वित्तीय व्यवस्था का खाका तैयार किया गया है। ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार केंद्र सरकार राजस्थान को इस योजना के तहत करीब 6 हजार करोड़ रुपये की राशि दे सकती है। वहीं, बाकी 16 हजार करोड़ रुपये राजस्थान सरकार और परियोजना के लिए तय वित्तीय मॉडल के जरिए जुटाए जाएंगे। इस बड़े निवेश से राज्य के विद्युत क्षेत्र में आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार होने की उम्मीद है।
बढ़ेगी ग्रीन एनर्जी की क्षमता, मजबूत होगा पावर सेक्टर
राजस्थान पहले से ही देश के प्रमुख सौर और पवन ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली को उत्पादन केंद्रों से दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क की जरूरत बढ़ रही है। 22 हजार करोड़ रुपये का प्रस्तावित पावर हाईवे इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके पूरा होने पर अक्षय ऊर्जा की बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी और राज्य के पावर सेक्टर को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी।