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Bikaner: दांत दर्द के इलाज में युवती को बताया एचआईवी पॉजिटिव, एम्स जांच कराने पर रिपोर्ट नेगेटिव निकली
Fri, 21 Feb 2025 12:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
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Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Feb 2025 12:23 PM IST
सार
दांत दर्द का इलाज कराने गई युवती को पीबीएम अस्पताल ने एचआईवी पॉजीटिव बताते हुए उसका इलाज शुरू कर दिया। परिवार ने जब दिल्ली एम्स में जांच कराई तो रिपोर्ट नेगेटिव आई।
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युवती को बताया एचआईवी पॉजिटिव, एम्स की जांच में आई नेगेटिव रिपोर्ट
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विस्तार
बीकानेर में जिला कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई के दौरान एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जहां दांत दर्द के इलाज के लिए अस्पताल गई एक युवती को पीबीएम अस्पताल में एचआईवी पॉजिटिव बता दिया गया। यह खबर युवती और उसके परिवार के लिए बड़े सदमे से कम नहीं थी। अस्पताल की रिपोर्ट के आधार पर युवती को एआरटी सेंटर से एचआईवी की दवाइयां भी दी जाने लगीं लेकिन जब परिवार को रिपोर्ट पर संदेह हुआ और उन्होंने दिल्ली के एम्स में दोबारा जांच कराई, जहां युवती एचआईवी नेगेटिव निकली।
इस गलत रिपोर्ट ने युवती और उसके परिवार की जिंदगी में उथल-पुथल मचा दी। जिस समाज में एचआईवी को अभी भी कलंक की तरह देखा जाता है, वहां इस झूठी रिपोर्ट ने युवती को मानसिक तनाव और सामाजिक बहिष्कार का सामना करने पर मजबूर कर दिया।
अस्पताल की अजीब सलाह
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि पीबीएम अस्पताल ने युवती को एचआईवी पॉजिटिव युवक से शादी करने की सलाह तक दे दी। इतना ही नहीं अस्पताल ने ऐसे युवकों की जानकारी भी दी, जो पहले से एचआईवी संक्रमित थे। यह न केवल गैर-जिम्मेदाराना रवैया था, बल्कि परिवार के दर्द को और बढ़ाने वाला था। घटना ने सरकारी अस्पतालों की जांच प्रक्रिया और उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जनसुनवाई में जब यह मामला जिला कलेक्टर के सामने आया, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और तुरंत जांच के आदेश दिए। अब सवाल यह है कि क्या दोषियों पर कोई कार्रवाई होगी, या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दब जाएगा?
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इस गलत रिपोर्ट ने युवती और उसके परिवार की जिंदगी में उथल-पुथल मचा दी। जिस समाज में एचआईवी को अभी भी कलंक की तरह देखा जाता है, वहां इस झूठी रिपोर्ट ने युवती को मानसिक तनाव और सामाजिक बहिष्कार का सामना करने पर मजबूर कर दिया।
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अस्पताल की अजीब सलाह
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि पीबीएम अस्पताल ने युवती को एचआईवी पॉजिटिव युवक से शादी करने की सलाह तक दे दी। इतना ही नहीं अस्पताल ने ऐसे युवकों की जानकारी भी दी, जो पहले से एचआईवी संक्रमित थे। यह न केवल गैर-जिम्मेदाराना रवैया था, बल्कि परिवार के दर्द को और बढ़ाने वाला था। घटना ने सरकारी अस्पतालों की जांच प्रक्रिया और उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जनसुनवाई में जब यह मामला जिला कलेक्टर के सामने आया, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और तुरंत जांच के आदेश दिए। अब सवाल यह है कि क्या दोषियों पर कोई कार्रवाई होगी, या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दब जाएगा?