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राजस्थान विधानसभा चुनाव: बहुजन समाज पार्टी ने 61 उम्मीद्वारों की तीसरी सूची की जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 12 Nov 2018 08:23 PM IST
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राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी ने 61 उम्मीद्वारों की तीसरी सूची जारी कर दी है। पार्टी राज्य में अकेले ही चुनाव मैदान में है। बता दें कि राज्य की 200 विधानसभा सीटों के लिए सात दिसंबर को मतदान होना है।
इससे पहले पार्टी ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए छह प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी की थी। बसपा प्रमुख मायावती के निर्देश पर पार्टी अध्यक्ष सीताराम मेघवाल ने यह सूची जारी की। जिसके मुताबिक किशन चंद शर्मा धौलपुर सीट से, बाड़ी से रामहित कुशवाहा, रामगढ़ से लक्ष्मण सिंह चौधरी, महुआ से विजय शंकर बोहरा और बयाना से सुनील कुमार जाटव पार्टी के प्रत्याशी घोषित हुए थे।
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इससे पहले पार्टी ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए छह प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी की थी। बसपा प्रमुख मायावती के निर्देश पर पार्टी अध्यक्ष सीताराम मेघवाल ने यह सूची जारी की। जिसके मुताबिक किशन चंद शर्मा धौलपुर सीट से, बाड़ी से रामहित कुशवाहा, रामगढ़ से लक्ष्मण सिंह चौधरी, महुआ से विजय शंकर बोहरा और बयाना से सुनील कुमार जाटव पार्टी के प्रत्याशी घोषित हुए थे।
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Bahujan Samaj Party releases the third list of 61 candidates for #RajasthanElections2018 pic.twitter.com/eyX9uaGz9Z
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) November 12, 2018
तीन दशकों में बसपा प्रभाव छोड़ने में विफल
राजस्थान के चुनाव में बसपा का यूपी की तरह कभी प्रभाव नहीं रहा, लेकिन पार्टी की यहां शुरुआत से लेकर अब तक की कहानी बड़ी रोचक है। पहले हाथ खाली रहे, फिर खाता खुला और जब अब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल हुई, तो वह देखते ही देखते गम में बदल गई। बसपा ने अपने ही विधायकों से सबसे बड़ा धोखा खाया। लेकिन बसपा ने राजस्थान में संघर्ष करना नहीं छोड़ा और उसके विधानसभा में उपस्थिति अब भी बनी हुई है।
पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा ने तीन सीटें जीती थीं, लेकिन हत्या के मामले में धौलपुर के विधायक के जेल जाने के बाद अब प्रदेश में बसपा के दो विधायक हैं। भाजपा ने धौलपुर विधायक की पत्नी ऊषा रानी कुशवाह को अपने टिकट पर उप चुनाव लड़वाया था। इसके बाद ये सीट भाजपा के पास चली गई।
गौरतलब है कि बसपा ने 1990 में पहली बार राजस्थान में चुनाव लड़ा था, लेकिन हाथ खाली रहे थे। बसपा ने पहली सफलता का स्वाद वर्ष 1998 में चखा, जब बसपा ने 108 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और यूपी से लगते जिलों में से भरतपुर जिले की नगर सीट से माहिर आजाद व अलवर की बानसूर सीट से जगत सिंह दायमा जीते।
पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा ने तीन सीटें जीती थीं, लेकिन हत्या के मामले में धौलपुर के विधायक के जेल जाने के बाद अब प्रदेश में बसपा के दो विधायक हैं। भाजपा ने धौलपुर विधायक की पत्नी ऊषा रानी कुशवाह को अपने टिकट पर उप चुनाव लड़वाया था। इसके बाद ये सीट भाजपा के पास चली गई।
गौरतलब है कि बसपा ने 1990 में पहली बार राजस्थान में चुनाव लड़ा था, लेकिन हाथ खाली रहे थे। बसपा ने पहली सफलता का स्वाद वर्ष 1998 में चखा, जब बसपा ने 108 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और यूपी से लगते जिलों में से भरतपुर जिले की नगर सीट से माहिर आजाद व अलवर की बानसूर सीट से जगत सिंह दायमा जीते।