अजमेर: कांग्रेस के 2 वार्ड खाली! 80 में बीजेपी के 80 उम्मीदवार, वार्ड 3-4 में समर्पण या सेटिंग पर सियासी सवाल
अजमेर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने सभी 80 वार्डों में प्रत्याशी उतारकर चुनावी मैदान पूरी तरह भर दिया है, जबकि कांग्रेस ने 78 वार्डों में ही उम्मीदवार घोषित किए हैं। वार्ड 3 और 4 में कांग्रेस का प्रत्याशी नहीं होने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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अजमेर नगर निगम चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशियों के नाम सामने ला दिए हैं। भाजपा ने सभी 80 वार्डों में उम्मीदवार उतारकर चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंक दी है, जबकि कांग्रेस ने 78 वार्डों में ही प्रत्याशी घोषित किए हैं। कांग्रेस ने वार्ड संख्या 3 और 4 में उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। ऐसे में इन दोनों वार्डों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर वार्ड 4 में भाजपा प्रत्याशी मोनिका जैन के सामने निर्दलीय मैदान में उतरीं पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस के दो वार्डों में प्रत्याशी नहीं उतारने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि यह रणनीतिक फैसला है, किसी निर्दलीय को समर्थन देने की तैयारी है या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक समझौता।
80 वार्डों में भाजपा के 80 उम्मीदवार, कांग्रेस 78 पर सिमटी
अजमेर नगर निगम के पार्षद चुनाव के लिए दोनों प्रमुख दलों ने निर्वाचन अधिकारी को अपने प्रत्याशियों के सिंबल सौंप दिए हैं। भाजपा ने नगर निगम के सभी 80 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं कांग्रेस ने केवल 78 वार्डों में उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। वार्ड 3 और 4 में कांग्रेस प्रत्याशी नहीं होने के कारण इन दोनों वार्डों को लेकर चुनावी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस ने इन दो वार्डों में चुनावी मुकाबले से दूरी क्यों बनाई? क्या यह चुनाव से पहले ही समर्पण है या इसके पीछे कोई राजनीतिक रणनीति अथवा सेटिंग है? कांग्रेस की सूची सामने आने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इन सवालों पर चर्चा तेज हो गई है।
वार्ड 4 में सबसे ज्यादा सियासी चर्चा
वार्ड संख्या 4 इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। भाजपा ने यहां मोनिका जैन को टिकट दिया है। मोनिका पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं और हाल ही में भाजपा में शामिल हुई हैं। इसी वार्ड से भाजपा के दो बार के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं।
खास बात यह है कि कांग्रेस ने वार्ड 4 से अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस निर्दलीय उम्मीदवार हेमा गहलोत को समर्थन दे सकती है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
वार्ड 3 में भी कांग्रेस का उम्मीदवार नहीं
वार्ड संख्या 3 में भी कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारा है। ऐसे में 80 वार्डों के चुनाव में केवल 78 उम्मीदवार मैदान में उतारने का कांग्रेस का फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है। अब इन दोनों वार्डों में कांग्रेस की रणनीति क्या होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
भाजपा ने नए चेहरों और नेताओं के परिजनों को भी दिया मौका
भाजपा ने सभी 80 वार्डों में उम्मीदवार उतारने के साथ कई नए चेहरों और पार्टी नेताओं के परिजनों पर भी भरोसा जताया है। भाजपा शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी की पत्नी रंजना सोनी को वार्ड संख्या 12 से टिकट दिया गया है। खास बात यह है कि नगर निगम के 80 वार्डों में सबसे कम मतदाता इसी वार्ड में हैं।
वार्ड संख्या 59 से पूर्व सभापति सुरेंद्र सिंह शेखावत की पत्नी मधु शेखावत को भाजपा ने मैदान में उतारा है। वहीं भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष और पूर्व पार्षद भारती श्रीवास्तव को दोबारा टिकट दिया गया है। हालांकि इस बार उनका वार्ड बदलकर 78 कर दिया गया है। भाजपा मंडल अध्यक्ष रचित कच्छावा को वार्ड 65 से टिकट मिला है। यहां उनका मुकाबला कांग्रेस के निवर्तमान पार्षद नौरत गुर्जर से होगा।
वफादारी का इनाम, पूर्व सरपंच की पत्नी को टिकट
विधानसभा चुनाव के दौरान राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का साथ देने वाले हाथीखेड़ा के पूर्व सरपंच लाल सिंह रावत की पत्नी मंजू देवी को भाजपा ने वार्ड संख्या 5 से प्रत्याशी बनाया है। इसे राजनीतिक हलकों में पार्टी के प्रति वफादारी का इनाम माना जा रहा है। दूसरी ओर अजमेर विकास प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन शिवशंकर हेड़ा की पुत्रवधू अंबिका हेड़ा ने भाजपा से टिकट की दावेदारी की थी। उन्होंने भाजपा के नाम से नामांकन भी दाखिल किया था, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
कांग्रेस की सूची में भी पुराने चेहरों के टिकट कटे
कांग्रेस की सूची में भी नए चेहरों के साथ नेताओं और उनके रिश्तेदारों को तवज्जो दिए जाने की चर्चा है। पूर्व बोर्ड में कांग्रेस के 18 पार्षद थे। इनमें से कई मौजूदा और पूर्व पार्षदों के टिकट काट दिए गए, जबकि कुछ नेताओं के परिवार के सदस्यों को मौका दिया गया है। भाजपा ने पूर्व बोर्ड में पार्षद रही प्रतिभा पाराशर, रूबी जैन, अंजना शेखावत, हेमलता बंसल और नीतू मिश्रा सहित कई पुराने चेहरों के टिकट काट दिए हैं। वहीं कांग्रेस ने भी पिछले बोर्ड में जीतकर आए कई पार्षदों को इस बार टिकट नहीं दिया है। कांग्रेस से टिकट कटने वालों में प्रतिपक्ष नेता द्रोपदी कोली, हितेश्वरी टांक, गजेंद्र सिंह रलावता, बनवारीलाल शर्मा, नूकुल खंडेलवाल, नरेश सत्यावना और कांग्रेस महिला मोर्चा की अध्यक्ष लक्ष्मी बुदेल समेत कई नाम शामिल हैं।
नए चेहरों और रिश्तेदारों पर भी कांग्रेस ने जताया भरोसा
कांग्रेस ने नए चेहरों के साथ नेताओं के रिश्तेदारों को भी मौका दिया है। मोक्ष नेनिया, जो द्रोपदी कोली के रिश्तेदार हैं, के अलावा ऋषि बंसल, पुष्पा राजोरिया सहित कई नए नाम पार्टी की सूची में शामिल हैं। कांग्रेस ने टिकट वितरण से पहले दावा किया था कि संगठन के प्रति निष्ठावान कार्यकर्ताओं और जीत की संभावना वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन सूची सामने आने के बाद टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर सवाल उठने लगे हैं।
पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ पिछले चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले शैलेंद्र अग्रवाल को भी कांग्रेस ने टिकट दिया है। इसके अलावा पिछले चुनाव में कमजोर प्रदर्शन करने वाले कुछ उम्मीदवारों के परिजनों को मौका दिए जाने की भी चर्चा है।
भाजपा के मुकाबले कांग्रेस के दो वार्ड खाली छोड़ने पर सवाल
कुल मिलाकर भाजपा ने जहां सभी 80 वार्डों में उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस के सामने सीधी चुनावी चुनौती पेश की है, वहीं कांग्रेस का वार्ड संख्या 3 और 4 में प्रत्याशी नहीं उतारना चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक पहेली बन गया है। अब चुनावी बहस केवल टिकट पाने और टिकट कटने तक सीमित नहीं रह गई है। सवाल यह भी है कि कांग्रेस ने दो वार्डों में अपने प्रत्याशी क्यों नहीं उतारे? क्या यह किसी रणनीति का हिस्सा है, किसी निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने की तैयारी है या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक समझौता है? इसका जवाब आने वाले दिनों में चुनावी तस्वीर साफ होने के साथ सामने आएगा।
टिकट कटने के बाद दोनों दलों में बगावत
वहीं दूसरी ओर टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दलों में असंतोष खुलकर सामने आया है। टिकट नहीं मिलने से कई दावेदार और कार्यकर्ता नाराज हैं। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी के फैसले के खिलाफ बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है।
ऐसे में अजमेर नगर निगम के कई वार्डों में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। बागियों की मौजूदगी ने दोनों दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है और चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।
3 सितंबर के बाद साफ होगी चुनाव की असली तस्वीर
हालांकि बागी उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 3 सितंबर है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से बागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में डटे रहते हैं और किन्हें पार्टी नेतृत्व समझा-बुझाकर नामांकन वापस लेने के लिए राजी कर पाता है।