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Rajasthan News: देहशोषण-ब्लैकमेलिंग कांड क्या 'ग्रूमिंग विंग' का हिस्सा? दर्दभरी है खौफजदा छात्राओं की दास्तां

Wed, 05 Mar 2025 07:03 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Wed, 05 Mar 2025 07:03 AM IST
सार

अजमेर जिले के बिजयनगर में प्राइवेट स्कूल की छात्राओं को ब्लैकमेल और शोषण करने का मामला 1992 के अजमेर कांड की याद दिलाता है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर आरोपियों को फांसी देने और यूपी मॉडल अपनाकर उनके घरों पर बुलडोजर चलाने की मांग उठ रही है।  अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें तीन नाबालिग हैं।

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Beawar Rape Blackmail Case Like Ajmer Students 13 Accused Arrested Rajasthan News in Hindi
ब्यावर में फिर अजमेर जैसा घिनौना काम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के अजमेर जिले में सन 1992 में ऐसा कांड हुआ, जिसमें अजमेर के साथ पूरा देश शर्मसार हुआ था। 1992 में अजमेर की प्रतिष्ठित कॉलेज की छात्राओं से समुदाय विशेष के युवाओं ने दोस्ती की और उसके बाद उनका देश शोषण कर उनकी अश्लील तस्वीरें लेकर उनको ब्लैकमेल किया। इन युवकों ने पहले एक लड़की से दोस्ती की और फिर उसके बाद उसकी अश्लील तस्वीरें लेकर उसको ब्लैकमेल किया और अपनी सहेलियों से दोस्ती करने की बात कही। ऐसे इन युवाओं ने एक-दो नहीं बल्कि 100 से अधिक कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रों को अपना निशाना बनाया था। इस मामले को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि राजस्थान के ही ब्यावर जिले के विजयनगर में ऐसा ही एक मामला सामने आया। 

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यहां पर हमाली, डेंटिंग, पेंटिंग का काम करने वाले समाज विशेष के युवकों ने प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को अपना निशाना बनाया और उन पर दबाव बनाकर उनकी सहेलियों से दोस्ती कर उनके साथ देहशोषण, ब्लैकमेलिंग के साथ धर्मांतरण का दबाव भी बनाया। मामले में पांच पीड़िताओं में बिजयनगर थाने में तीन एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार करना शुरू किया। अब तक इस मामले में पुलिस ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से तीन नाबालिग हैं। 
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फांसी देने के साथ ही यूपी मॉडल अपनाने की मांग
आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद भी यह मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार आरोपियों को फांसी देने के साथ ही यूपी मॉडल को अपनाते हुए आरोपियों के घरों पर बुल्डोजर चलाने की मांग को लेकर लगातार जिले, कस्बे और शहर बंद कर लोग अपना विरोध जता रहे हैं।
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ये हुए गिरफ्तार
ब्यावर जिले की बिजयनगर थाना पुलिस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें लुकमान, सोहेल मंसूरी, रिहान मोहम्मद, अफराज, पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी, कैफे संचालक श्रवण, कैफे संचालक सांवरलाल जाट, आशिक, करीम और जावेद के अलावा तीन नाबालिग शामिल हैं। इनमें से एक आरोपी कैफे संचालक सांवरलाल को पुलिस ने कर्नाटक से गिरफ्तार किया है।

कलमा पढ़वाने का डालते थे दबाव
मामले की जांच में यह सामने आया है कि आरोपी लड़की को स्कूल जाते समय रास्ते में रोकते थे और उसे अपने साथ कैफे और होटलों में जाने के लिए मजबूर करते थे। वे लड़की से रोज़ा रखने और कलमा पढ़वाने का दबाव डालते थे। आरोपी इस तरह से लड़की को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने अपने कृत्य को छिपाने के लिए लड़की से कुछ आपत्तिजनक और शोषण पूर्ण गतिविधियों को करने के लिए दबाव डाला, जिससे वह पूरी तरह से परेशान हो गई थी।

शहर में प्रदर्शन और रैलियां
ब्यावर जिले के बिजयनगर में हुई घटना के बाद लगातार लोगों का गुस्सा फूट रहा है। आरोपियों को फांसी देने की मांग के साथ ही यूपी की तर्ज पर आरोपियों के घरों पर बुल्डोजर चलाने की मांग की जा रही है। अपनी इसी मांग को लेकर लगातार अजमेर और ब्यावर जिले के तमाम कस्बों में रैली निकाल कर और बाजार बंद रखकर लोगों ने अपना विरोध जताया था। घटना के बाद बिजयनगर, ब्यावर, केकड़ी, सावर, मसूदा, सरवाड़, भिनाय, नसीराबाद, किशनगढ़ के साथ अजमेर बंद करके अपने रोष का इजहार किया था।

क्या था 1992 ब्लैकमेल कांड
ब्यावर जिले के बिजयनगर में स्कूली छात्राओं के साथ हुई ब्लैककमेलिंग और देहशोषण की घटना से एक बार फिर राजस्थान के अजमेर को शर्मसार कर दिया। नया जिला बनने से पहले बिजयनगर अजमेर में ही आता था, लेकिन अब बिजयनगर ब्यावर जिले में शामिल हो गया। इस घटना के बाद साल 1992 में अजमेर दरगाह से जुड़े समाज विशेष के युवकों ने कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रों को ऐसे ही ब्लैकमेल किया था, जैसे बिजयनगर में हमाली, वेल्डिंग और डेंटिंग पेंटिंग का काम करने वाले समुदाय विशेष के युवकों ने किया। अजमेर ब्लैकमेल कांड के जैसे इन युवकों ने एक लड़की से दोस्ती की और उसके बाद उनको ब्लैकमेल कर अपनी सहेलियों से दोस्ती कराने के लिए मजबूर किया, जिससे साफ जाहिर होता है कि ब्यावर जिले का बिजयनगर कांड अजमेर ब्लैकमेल कांड के जैसा कांड है, इन दोनों घटनाओं में समुदाय विशेष के युवा शामिल हैं।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
बिजयनगर मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। शनिवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो बिजयनगर पहुंचे और स्कूली छात्राओं के ब्लैकमेल और धर्मांतरण के गंभीर मामले की जांच की। उन्होंने पीड़ित बच्चियों से बातचीत कर पूरी घटना की जानकारी ली और अब तक की गई कार्रवाई का फीडबैक लिया। प्रियंक कानूनगो ने बताया कि अभी तक पीड़िताओं को किसी भी तरह की आर्थिक सहायता नहीं दी गई, जबकि उन्हें तुरंत राहत मिलनी चाहिए थी। इस पर पुलिस प्रशासन ने प्रत्येक पीड़िता को 20-20 हजार रुपये देने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि मामले में कुछ और आरोपियों के नाम सामने आए हैं, जिन पर जल्द ही कार्रवाई होगी और अन्य गिरफ्तारियां भी संभव है। मामले में शामिल नाबालिग आरोपियों के खिलाफ वयस्कों की तरह ट्रायल किए जाने की बात भी कही गई। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रियंक कानूनगो ने यह भी कहा कि जांच में सभी आरोपी एक ही धर्म के निकले, जबकि पीड़ित बच्चियां हिंदू समुदाय से संबंधित थीं। उन्होंने इस घटना को "ग्रूमिंग विंग" का हिस्सा बताया, जो सुनियोजित तरीके से लड़कियों को निशाना बनाता है। आयोग सदस्य ने पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई पर संतुष्टि जाहिर की, लेकिन आगे की जांच में तेजी लाने पर भी जोर दिया।


अजमेर ब्लैकमेल कांड पर अगस्त में आया था फैसला
देश के बहुचर्चित ब्लैकमेल कांड पर विशेष न्यायालय कोर्ट संख्या 2 ने 20 अगस्त 2024 को अपना फैसला सुनाया। करीब 33 साल पहले 1992 में हुए इस मामले से राजस्थान के साथ देश भी कांप उठा था और तत्कालीन सरकार हिल गई थी। कोर्ट ने इस मामले मे 6 को दोषी मानते हुए धारा 376 और 120 बी के तहत 210 पेज के फैसले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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