अजमेर जेल की दीवारों के पीछे चल रहा था नशे का कारोबार?: 1283 कॉल, 50 लाख का लेन-देन और अब जेलकर्मियों पर शक
Rajasthan News: अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की कथित सप्लाई और पैसों के लेन-देन का मामला सामने आया है। जेल एसटीडी से एक नंबर पर 1283 कॉल और जुड़े खातों में करीब 49.80 लाख रुपये के लेन-देन की जांच शुरू हुई है।
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अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की कथित सप्लाई और जेल के बाहर पैसों के लेन-देन का मामला सामने आया है। एक बंदी की शिकायत के बाद जेल प्रशासन की जांच में जेल के एसटीडी से एक मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल किए जाने और उससे जुड़े बैंक खातों में करीब 49.80 लाख रुपये के लेन-देन का खुलासा हुआ है। जेल प्रहरी महिपाल मंगलोदा की रिपोर्ट पर 19 अगस्त को सिविल लाइंस थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में करण सिंह, कमल, जयराम, शिवराज और धनराज के नाम सामने आए हैं। ये सभी पहले अजमेर सेंट्रल जेल में बंद थे और फिलहाल जमानत पर बाहर बताए जा रहे हैं।
मामला उस समय सामने आया, जब हत्या के दो मामलों में जेल में बंद भीकाराम ने 22 जुलाई 2025 को पीआईसीएस (जेल एसटीडी) के जरिए डीजी जेल को शिकायत भेजी। शिकायत में उसने आरोप लगाया कि विचाराधीन बंदी करण सिंह और कमल सिंह ने उसके साथ मारपीट की और करीब 500 रुपये में नशे की गोलियां बेचने की बात कही। आरोप है कि गोलियों की रकम एक मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन ट्रांसफर करवाई जाती थी। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया।
शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने जांच की तो जेल एसटीडी से एक ही मोबाइल नंबर पर 1283 कॉल किए जाने का रिकॉर्ड मिला। जांच में सामने आया कि कुछ दिनों में इस नंबर पर एक दिन में 3 से लेकर 29 बार तक कॉल की गईं। जांच में यह मोबाइल नंबर श्रीनगर थाना क्षेत्र के कनाखेड़ी निवासी जयराम रावत के नाम बताया गया। इसके बाद नंबर से जुड़े बैंक खाते के स्टेटमेंट की जांच की गई। रिकॉर्ड के मुताबिक, 1 जनवरी 2024 से 20 अप्रैल 2026 के बीच खाते में करीब 49 लाख 79 हजार 967 रुपये क्रेडिट हुए। वहीं, खाते का क्लोजिंग बैलेंस महज 13,358 रुपये था।
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जांच के दौरान जयराम के चचेरे भाई शिवराज सिंह का नाम भी सामने आया। पूछताछ में उसने बताया कि वह कभी-कभी जेल में बंद कैदियों के लिए जरूरी सामान पहुंचाता था और इसके बदले बंदियों के परिजन ऑनलाइन रुपये भेजते थे। जांच के अनुसार, जयराम का मोबाइल नंबर तीन बैंक खातों से जुड़ा हुआ था। जेल प्रशासन की रिपोर्ट में इस बात पर भी सवाल उठाया गया है कि यदि बंदियों के परिजन सामान के लिए सीधे भुगतान करते थे, तो जेल के एसटीडी से लगातार एक ही नंबर पर इतनी बड़ी संख्या में कॉल क्यों की गईं। जेलकर्मियों की संभावित मिलीभगत की आशंका को लेकर भी जांच की जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जेल के एसटीडी से इस मोबाइल नंबर पर लगातार कॉल करने की अनुमति या सुविधा कैसे मिली और इसमें किसी जेलकर्मी की कोई भूमिका थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि कथित लेन-देन में किसी जेलकर्मी को कोई आर्थिक लाभ मिला या नहीं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही नशे की गोलियों की कथित सप्लाई, जेल एसटीडी से हुई कॉल और करीब 50 लाख रुपये के लेन-देन के बीच संबंध की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।