Rajasthan: 12 साल की उम्र में घर से भागा बच्चा, नाम बदलकर अपराधी बना, आठ साल बाद जेल में मिला तो रो पड़े परिजन
आर्म्स एक्ट केस में बंद आरोपी को जीआरपी थाना पुलिस ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया उसने बताया कि आठ साल पहले 12 साल की उम्र में वह घर से भागकर अजमेर आ गया था। पुलिस ने उसके परिजनों से संपर्क कर उन्हें अजमेर मिलाया और बेटे से मिलवाया।
विस्तार
आपने परिजनों से नाराज होकर बच्चे के घर से भागने की खबरें अक्सर पढ़ी होंगी या सुनी होंगी, लेकिन बच्चों का इस कदम उन्हें कहां से कहां पहुंचा देगा उन्हें यह नहीं पता होगा। ऐसा ही एक मामला अजमेर में सामने आया है। यहां 12 साल की उम्र में घर से भाग बच्चा अपराधी बन गया और जेल में सजा काट रहा था। आठ साल बाद पुलिस को उसकी सच्चाई पता चली तो परिजनों को बुलाया, आठ साल के इंतजार के बाद अपने बच्चे को देखते ही परिजन अपने आंसू नहीं रोक पाए।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार झुंझुनू निवासी 12 साल का बच्चा घरवालों से नाराज होकर भाग कर अजमेर आ गया। यहां नाम बदल छोटे-मोटे अपराध कर अपना जीवन बिताने लगा। इस दौरान पुलिस ने उसे आर्म्स एक्ट के मामले में गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। इधर, जेल में बंद 20 साल युवक को अजमेर जीआरपी थाना पुलिस ने ट्रेन में महिला यात्री का लैपटॉप और मोबाइल चोरी करने के आरोप में प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया। इस दौरान पूछताछ में उसने पूरी कहानी बताई। जीआरपी ने इसकी जानकारी दी तो आठ साल बाद बेटे को देखकर माता-पिता अपने आंसू नहीं रोक पाए और भावुक हो गए।
अजमेर जीआरपी एसपी पूजा अवाना ने बताया कि 20 जनवरी को एक महिला ने लैपटॉप और वनप्लस मोबाइल चोरी होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी। मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई। गठित टीम ने अजमेर जेल में बंद 20 वर्षीय युवक को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर लैपटॉप और डिग्गी बाजार थाना क्लॉक टावर निवासी रवि सिंह को गिरफ्तार कर चोरी का मोबाइल बरामद किया।
एसपी अवाना ने बताया कि 20 वर्षीय युवक थाना क्लॉक टावर अजमेर के आर्म्स एक्ट के मुकदमे में जेल में बंद था। जिसे चोरी के आरोप में जीआरपी थाने लाकर थानाधिकारी सुशीला बिश्नोई ने पूछताछ की तो उसने अपना असली नाम संदीप सिंह पुत्र रतन सिंह राजपूत निवासी जसरापुर ढाणा की ढाणी थाना खेतड़ी जिला झुंझुनू बताया। उसने बताया कि आठ साल पहले 12 साल की उम्र में वह घर से भागकर अजमेर आ गया। तब से नाम बदलकर खानाबदोश की तरह जिंदगी जी रहा था। आरोपी संदीप के बताए पते पर पुलिस ने संपर्क किया तो परिवार वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। संदीप सिंह के माता-पिता और अन्य परिजन जीआरपी थाना पहुंचे। आठ साल बाद बेटे को देखकर परिजन आंसू नहीं रोक पाए।