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बारह साल से मांग रहे रोजगार
पठानकोट
Updated Mon, 07 Oct 2013 10:31 PM IST
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आरएसडी बांध विस्थापितों ने सोमवार को अपने रोजगार के लिए नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग करते हुए बांध परियोजना केे प्रशासनिक ब्लाक में एलएओ कार्यालय के बाहर रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता आरएसडी यूनियन के अध्यक्ष डॉ. रमेश सिंह ने की। उन्होंने बांध प्रशासन से दस्तावेजों की जल्द जांच करने की मांग की। मालूम हो कि बांध परियोजना के कारण दरकुया, सारटी, चिब्बड़, हरदोसरन, थड़ा उपरला, डूंग समेत कई गांवों के लोग प्रभावित हुए हैं।
यूनियन ने कहा कि एक तरफ तो सरकार प्रभावित परिवारों को जल्द राहत देने का दावा कर रही है वहीं दूसरी तरफ बांध प्रशासन विस्थापितों की समस्याएं लगातार बढ़ा रहा है। इसीलिए विस्थापित परिवार संघर्ष करने को मजबूर हैं। रमेश सिंह ने कहा कि बांध विस्थापित 12 साल से रोजगार की मांग के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन बांध प्रशासन और सरकार नए फरमान जारी करके रोजगार की राह में रोड़ा अटका रहे हैं।
उन्होंने कहा कि डिप्टी स्पीकर दिनेश सिंह बब्बू ने उनके संयुक्त खातों की शर्त को हटवा कर राहत दी थी, लेकिन बांध प्रशासन उनके इस आदेश को नहीं मान रहा है। इसके साथ ही उचित वसीयत के मालिकों को भी राहत नहीं दी जा रही है। इस मौके पर यूनियन के महासचिव संजय अनोत्रा, दीवान चंद, प्रदीप कुमार, करतार सिंह, जसवीर सिंह, मलको देवी, निर्मला देवी, राजकुमारी, संतोष कुमारी, नेक मोहम्मद मौजूद रहे।
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ये मांगें उठाईं
यूनियन ने मांग की कि भूमि अधिगृहीत होने की तारीख से उनकी कट-ऑफ-डेट की नोटिफिकेशन जारी की जाए। संयुक्त खातों की शर्त को हटाने के आदेश जारी किए जाएं। वसीयत के मालिकों के केस भी जल्द निपटाए जाएं।
मिलीभगत से गलत लोगों को मिला रोजगार
रमेश सिंह ने बताया कि पंजाब विजिलेंस ने जिन फर्जी लोगों के केसों को पकड़ा है वह अपने आप में एक ईमानदारी की मिसाल है तथा अभी भी कई लोग ऐसे हैं, जिनकी न तो भूमि अधिगृहीत हुई है तथा न ही वह विस्थापित हैं, फिर भी वे बांध परियोजना पर अधिकारियों की मिलीभगत से रोजगार कर रहे हैं। कार्यालयों में बाहरी लोगों की मिलीभगत से उचित प्रभावित परिवार अपने रोजगार से वंचित हो रहे हैं।
...तो फिर से करेंगे आंदोलन
यूनियन ने कहा कि यदि जल्द ही उनके नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुए तो वे 30 अक्तूबर को फिर से बांध परियोजना के कार्यालय के समक्ष परिवारों सहित भारी रोष प्रदर्शन करेंगे।
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यूनियन ने कहा कि एक तरफ तो सरकार प्रभावित परिवारों को जल्द राहत देने का दावा कर रही है वहीं दूसरी तरफ बांध प्रशासन विस्थापितों की समस्याएं लगातार बढ़ा रहा है। इसीलिए विस्थापित परिवार संघर्ष करने को मजबूर हैं। रमेश सिंह ने कहा कि बांध विस्थापित 12 साल से रोजगार की मांग के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन बांध प्रशासन और सरकार नए फरमान जारी करके रोजगार की राह में रोड़ा अटका रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि डिप्टी स्पीकर दिनेश सिंह बब्बू ने उनके संयुक्त खातों की शर्त को हटवा कर राहत दी थी, लेकिन बांध प्रशासन उनके इस आदेश को नहीं मान रहा है। इसके साथ ही उचित वसीयत के मालिकों को भी राहत नहीं दी जा रही है। इस मौके पर यूनियन के महासचिव संजय अनोत्रा, दीवान चंद, प्रदीप कुमार, करतार सिंह, जसवीर सिंह, मलको देवी, निर्मला देवी, राजकुमारी, संतोष कुमारी, नेक मोहम्मद मौजूद रहे।
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ये मांगें उठाईं
यूनियन ने मांग की कि भूमि अधिगृहीत होने की तारीख से उनकी कट-ऑफ-डेट की नोटिफिकेशन जारी की जाए। संयुक्त खातों की शर्त को हटाने के आदेश जारी किए जाएं। वसीयत के मालिकों के केस भी जल्द निपटाए जाएं।
मिलीभगत से गलत लोगों को मिला रोजगार
रमेश सिंह ने बताया कि पंजाब विजिलेंस ने जिन फर्जी लोगों के केसों को पकड़ा है वह अपने आप में एक ईमानदारी की मिसाल है तथा अभी भी कई लोग ऐसे हैं, जिनकी न तो भूमि अधिगृहीत हुई है तथा न ही वह विस्थापित हैं, फिर भी वे बांध परियोजना पर अधिकारियों की मिलीभगत से रोजगार कर रहे हैं। कार्यालयों में बाहरी लोगों की मिलीभगत से उचित प्रभावित परिवार अपने रोजगार से वंचित हो रहे हैं।
...तो फिर से करेंगे आंदोलन
यूनियन ने कहा कि यदि जल्द ही उनके नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुए तो वे 30 अक्तूबर को फिर से बांध परियोजना के कार्यालय के समक्ष परिवारों सहित भारी रोष प्रदर्शन करेंगे।