फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Pathankot News ›   Juicy, lychee, market, Pathankot, SUJANPUR

रसीली लीची को बाजार की दरकार

Tue, 24 Jun 2014 10:39 PM IST
पठानकोट ।
पठानकोट । Updated Tue, 24 Jun 2014 10:39 PM IST
विज्ञापन
जिले में इस बार लीची की बंपर पैदावार हुई है। माना जा रहा है कि यहां की लीची देहरादून की लीची के मुकाबले रसीलेपन और मिठास के मामले में कहीं कम नहीं है, लेकिन बेहद मेहनत के बाद मनमाफिक लीची उत्पादन में सफल जिले के किसानों को इस बात का मलाल है कि उनकी उपज को अपेक्षित बाजार नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन


विपणन की उचित सुविधा के अभाव की वजह से किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। उपज को बाजार तक न पहुंचा पाने के कारण किसान हताश नजर आ रहे हैं। सुजानपुर व आसपास के क्षेत्र में लीची तोड़ने का कार्य शुरू हो गया है। जुलाई के दूसरे हफ्ते तक लीची शेष ची फसल भी तैयार हो जाएगी। क्षेत्र के किसान भूरी सिंह ,राज सिंह, विकास ठाकुर, अभिषेक सिंह व शक्ति सिंह ने बताया क्षेत्र में लीची की देहरादून और कलकता किस्म की पैदावार ज्यादा होती है। यहां लीची की सीडलेस व रोज मेनटेड किस्म भी होती है।
विज्ञापन


पिछले सालके मुकाबले इस बार बारिश समय पर न होने के कारण लीची की फसल लेट तैयार हुई है। इसका असर फसल के आकार पर भी पडा है, लेकिन फिर भी उपज संतोषजनक है। उन्होंने सरकार से क्षेत्र में लीची उत्पादन को देखते हुए किसानों को मंडीकरण की बेहतर सुविधा मुहैया कराने की मांग की है। ताकि क्षेत्र के किसान अपनी फसल को दूर की मंडियों तक भेजकर ज्यादा लाभ ले सकें । उचित बाजार न मिलने से किसानों को अपनी फसल लोकल मार्केट में बेचनी पड़ती है। ऐसे में उन्हें दाम से संतोष करना पड़ता है। क्षेत्र में रिटेल में लीची 80 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बागवानी से जुड़े सौ से ज्यादा किसान
पठानकोट। क्षेत्र में 100 से ज्यादा किसान हार्टिकल्चर से जुड़े हुए हैं। उनके पास 10 से 20 एकड़ की जमीन पर लीची व आम के बगीचे हैं। अकेले पठानकोट तथा गुरदासपुर में पांच हजार एकड़ जमीन हार्टिकल्चर के अधीन आती है। जबकि हार्टिकल्चर से जंगलात का रकबा भी बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि विदेशी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए पठानकोट में पैकिंग, ट्रांसर्पोटेशन और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोल्ड स्टोर की व्यवस्था करने की जरूरत है, ताकि पठानकोट के साथ लगते हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, ऊना, चंबा और जम्मू-कश्मीर के कठुआ, सांबा व साथ लगते इलाकों से भी फलों व सब्जियों को भी यहां लाकर स्टोर किया जा सके।

लीची जोन के लिए जरूरतें
जरूरतों के मुताबिक जांच लैब, दिल्ली, चंडीगढ़ और मुंबई लीची ले जाने के लिए फ्रीज वैन, किसानों को हार्टिकल्चर सेंटर में अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के बारे में ट्रेनिंग, लीची ले जाने के लिए प्लास्टिक क्रेट की आसान उपलब्धता, फल और सब्जियों के संरक्षण के लिए उच्च क्षमता कोल्ड स्टोर, छोटे लीची उत्पादकों के लिए ट्रैक्टर आधारित छोटे स्प्रे पंप, अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैकिंग व्यवस्था, प्राथमिकता के आधार पर ट्यूबवेल कनेक्शन।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed