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पूर्व निगम कमिश्नर को कैद
पठानकोट।
Updated Fri, 09 May 2014 10:49 PM IST
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जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने रिश्वतखोरी के मामले में विजिलेंस की टीम द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए पठानकोट नगर निगम के पूर्व कमिश्नर जेपी सिंह को तीन साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
साल 2012 के इस मामले के प्रकाश में आने के बाद जेपी सिंह को कार्यमूक्त कर दिया गया था। हालांकि कोर्ट ने मौके पर ही जमानत अर्जी मंजूर कर ली। मामले के मुताबिक पठानकोट के ढाकी रोड निवासी प्रबल शर्मा की ओर से ढाकी रोड पर साल 2012 में एक बिल्डिंग का निर्माण कराया जा रहा था।
बिल्डिंग की छत डाली जा चुकी थी। इसके बाद कमिश्नर ने मौका मुआयना कर बिल्डिंग को गैरकानूनी करार देकर काम रुकवा दिया था। आरोप था कि कमिश्नर बिल्डिंग पूरी तरह से बनाने के लिए प्रबल शर्मा से पैसे की मांग कर रहे थे। इसे लेकर उनका ढाई लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। इस बीच प्रबल ने मामले की शिकायत विजिलेंस के उच्चाधिकारियों से की थी।
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इस पर 30 अगस्त 2012 को गुरदासपुर और पठानकोट के विजिलेंस अधिकारियों की एक टीम ने प्रबल को रंग लगे नोट लगाकर देर सायं उसे कमिश्नर की कोठी पर भेजा था। जहां विजिलेंस की टीम ने छापामारी कर जेपी सिंह को ढाई लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उस समय जेपी सिंह के पास पठानकोट निगम के कमिश्नर के अलावा एसडीएम धार कलां, शाहपुरकंडी बैराज एक्सूजिशन डिप्टी कमिश्नर पद का भी चार्ज था।
विजिलेंस की ओर से उक्त मामले का चालान कोर्ट में पेश किया गया था। जिस पर सुनवाई करते हुए पठानकोट के जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने पूर्व कमिश्नर को तीन साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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साल 2012 के इस मामले के प्रकाश में आने के बाद जेपी सिंह को कार्यमूक्त कर दिया गया था। हालांकि कोर्ट ने मौके पर ही जमानत अर्जी मंजूर कर ली। मामले के मुताबिक पठानकोट के ढाकी रोड निवासी प्रबल शर्मा की ओर से ढाकी रोड पर साल 2012 में एक बिल्डिंग का निर्माण कराया जा रहा था।
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बिल्डिंग की छत डाली जा चुकी थी। इसके बाद कमिश्नर ने मौका मुआयना कर बिल्डिंग को गैरकानूनी करार देकर काम रुकवा दिया था। आरोप था कि कमिश्नर बिल्डिंग पूरी तरह से बनाने के लिए प्रबल शर्मा से पैसे की मांग कर रहे थे। इसे लेकर उनका ढाई लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। इस बीच प्रबल ने मामले की शिकायत विजिलेंस के उच्चाधिकारियों से की थी।
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इस पर 30 अगस्त 2012 को गुरदासपुर और पठानकोट के विजिलेंस अधिकारियों की एक टीम ने प्रबल को रंग लगे नोट लगाकर देर सायं उसे कमिश्नर की कोठी पर भेजा था। जहां विजिलेंस की टीम ने छापामारी कर जेपी सिंह को ढाई लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उस समय जेपी सिंह के पास पठानकोट निगम के कमिश्नर के अलावा एसडीएम धार कलां, शाहपुरकंडी बैराज एक्सूजिशन डिप्टी कमिश्नर पद का भी चार्ज था।
विजिलेंस की ओर से उक्त मामले का चालान कोर्ट में पेश किया गया था। जिस पर सुनवाई करते हुए पठानकोट के जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने पूर्व कमिश्नर को तीन साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।