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बादल की घोषणा चुनावी स्टंट : कांग्रेस
पठानकोट
Updated Wed, 13 Nov 2013 10:53 PM IST
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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों के विकास के लिए पांच-पांच करोड़ रुपये जारी किए जाने की घोषणा को कांग्रेसी महज एक चुनावी स्टंट करार दे रहे हैं। वहीं इस घोषणा ने भाजपा के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी है। इस घोषणा में शहरी वोटरों को रिझाने के लिए कुछ नहीं है, जबकि अकाली अपना ग्रामीण वोट बैंक मजबूत करने में जरूर कामयाब होंगे।
क्योंकि राज्य में अकाली दल के पास ग्रामीण वोट ज्यादा हैं जबकि भाजपा के पास शहरी वोट। राज्य सरकार की ओर से जारी की जाने वाली पांच-पांच करोड़ रुपये की राशि कांग्रेसी विधायकों को भी खर्च करनी पड़ेगी, लिहाजा केंद्र सरकार की ग्रांटों से गांवों में चल रहे विकास कार्यों की दुहाई दे रही कांग्रेस भी यदि इन पैसों को खर्च नहीं करती तो उसे ग्रामीण वोटरों की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि, कांग्रेसी इसे महज कोरी घोषणा करार दे रही है, क्योंकि कांग्रेस मान रही है राज्य में पहले ही केंद्र की ग्रांट पर विकास हो रहा है। उधर, शहरों में राज्य सरकार कोई बड़ा पैकेज नहीं दे पा रही है, जिससे भाजपा का शहरी वोटर पहले ही रुष्ट चल रहा है।
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राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिर्फ वोट बैंक मजबूत करने के लिए किया जा रहा है, क्योंकि दो साल से राज्य की जनता पर कई तरह के टैक्स लगाए गए हैं।
टैक्स के तौर पर जनता से काफी धन बटोर चुकी राज्य सरकार आगामी लोकसभा चुनाव से पहले जनता की नाराजगी नहीं सहना चाहती। वहीं, शहरी विकास को लेकर कोई बात नहीं हो रही जिससे भाजपा की चिंता भी लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति किस ओर जाती है और लोकसभा चुनाव से पहले-पहले क्या-क्या रणनीति बनेगी यह फिलहाल आने वाला समय ही बताएगा लेकिन मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर शहर के सियासदानों ने अपने-अपने विचार इस तरह साझा किए।
मुख्यमंत्री की घोषणा चुनावी स्टंट : भल्ला
पूर्व मंत्री एवं कांग्रेसी नेता रमन भल्ला का कहना है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री द्वारा की गई यह घोषणा महज एक चुनावी स्टंट है। राज्य में 117 विधानसभा क्षेत्र है और इस लिहाज से राज्य सरकार को 595 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। राज्य सरकार महज घोषणाओं तक ही सीमित होकर रह गई है। राज्य में जमीन स्तर पर कोई भी काम नहीं हो रहा है। विकास के नाम पर नींव पत्थर ही रखे जा रहे हैं। लोकसभा चुनावों से पहले की गई यह घोषणा महज एक चुनावी स्टंट है और कुछ नहीं।
पहले पैसे जारी करें : विधायक
पठानकोट के पूर्व विधायक अशोक शर्मा का कहना है कि राज्य सरकार को पहले-पहले पांच करोड़ रुपये विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए जारी करने चाहिए थे, इसके बाद विकास की घोषणा होनी चाहिए थी। राज्य की जनता भी जान चुकी है कि इस तरह की घोषणा राज्य सरकार पहले भी कई बार कर चुकी है, जबकि इन पर अमलीजामा पहनाना तो दूर सरकार इन्हें शुरू करने से पहले ही बंद कर देती है। पठानकोट शहर जिसे महज नगर निगम का दर्जा दे दिया गया है और दो साल बीत जाने के बाद भी इस शहर को विकास की कोई ग्रांट जारी नहीं हुई है।
गठबंधन का लक्ष्य महज सर्वपक्षीय विकास
विधायक अश्वनी शर्मा का कहना है कि अकाली-भाजपा गठबंधन का लक्ष्य महज राज्य का सर्वपक्षीय विकास करवाना है। वे चाहे शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण। गठबंधन सरकार शहरों के साथ गांवों का भी सामग्र विकास चाहती है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सभी विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र के अधिकारियों को विकास प्रोजेक्टों पर एस्टिमेट तैयार करने को कह दिया है। करीब 15-20 दिन में यह प्रक्रिया पूरी भी कर ली जाएगी। दिसंबर तक सभी विधायकों को राज्य सरकार पांच-पांच करोड़ रुपये की ग्रांट भी जारी कर देगी। इस ग्रांट से विधायक अपने क्षेत्र में बड़े विकास प्रोजेक्ट पर कार्य करेंगे जिससे क्षेत्र का विकास होगा।
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क्योंकि राज्य में अकाली दल के पास ग्रामीण वोट ज्यादा हैं जबकि भाजपा के पास शहरी वोट। राज्य सरकार की ओर से जारी की जाने वाली पांच-पांच करोड़ रुपये की राशि कांग्रेसी विधायकों को भी खर्च करनी पड़ेगी, लिहाजा केंद्र सरकार की ग्रांटों से गांवों में चल रहे विकास कार्यों की दुहाई दे रही कांग्रेस भी यदि इन पैसों को खर्च नहीं करती तो उसे ग्रामीण वोटरों की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा।
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हालांकि, कांग्रेसी इसे महज कोरी घोषणा करार दे रही है, क्योंकि कांग्रेस मान रही है राज्य में पहले ही केंद्र की ग्रांट पर विकास हो रहा है। उधर, शहरों में राज्य सरकार कोई बड़ा पैकेज नहीं दे पा रही है, जिससे भाजपा का शहरी वोटर पहले ही रुष्ट चल रहा है।
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राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिर्फ वोट बैंक मजबूत करने के लिए किया जा रहा है, क्योंकि दो साल से राज्य की जनता पर कई तरह के टैक्स लगाए गए हैं।
टैक्स के तौर पर जनता से काफी धन बटोर चुकी राज्य सरकार आगामी लोकसभा चुनाव से पहले जनता की नाराजगी नहीं सहना चाहती। वहीं, शहरी विकास को लेकर कोई बात नहीं हो रही जिससे भाजपा की चिंता भी लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति किस ओर जाती है और लोकसभा चुनाव से पहले-पहले क्या-क्या रणनीति बनेगी यह फिलहाल आने वाला समय ही बताएगा लेकिन मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर शहर के सियासदानों ने अपने-अपने विचार इस तरह साझा किए।
मुख्यमंत्री की घोषणा चुनावी स्टंट : भल्ला
पूर्व मंत्री एवं कांग्रेसी नेता रमन भल्ला का कहना है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री द्वारा की गई यह घोषणा महज एक चुनावी स्टंट है। राज्य में 117 विधानसभा क्षेत्र है और इस लिहाज से राज्य सरकार को 595 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। राज्य सरकार महज घोषणाओं तक ही सीमित होकर रह गई है। राज्य में जमीन स्तर पर कोई भी काम नहीं हो रहा है। विकास के नाम पर नींव पत्थर ही रखे जा रहे हैं। लोकसभा चुनावों से पहले की गई यह घोषणा महज एक चुनावी स्टंट है और कुछ नहीं।
पहले पैसे जारी करें : विधायक
पठानकोट के पूर्व विधायक अशोक शर्मा का कहना है कि राज्य सरकार को पहले-पहले पांच करोड़ रुपये विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए जारी करने चाहिए थे, इसके बाद विकास की घोषणा होनी चाहिए थी। राज्य की जनता भी जान चुकी है कि इस तरह की घोषणा राज्य सरकार पहले भी कई बार कर चुकी है, जबकि इन पर अमलीजामा पहनाना तो दूर सरकार इन्हें शुरू करने से पहले ही बंद कर देती है। पठानकोट शहर जिसे महज नगर निगम का दर्जा दे दिया गया है और दो साल बीत जाने के बाद भी इस शहर को विकास की कोई ग्रांट जारी नहीं हुई है।
गठबंधन का लक्ष्य महज सर्वपक्षीय विकास
विधायक अश्वनी शर्मा का कहना है कि अकाली-भाजपा गठबंधन का लक्ष्य महज राज्य का सर्वपक्षीय विकास करवाना है। वे चाहे शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण। गठबंधन सरकार शहरों के साथ गांवों का भी सामग्र विकास चाहती है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सभी विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र के अधिकारियों को विकास प्रोजेक्टों पर एस्टिमेट तैयार करने को कह दिया है। करीब 15-20 दिन में यह प्रक्रिया पूरी भी कर ली जाएगी। दिसंबर तक सभी विधायकों को राज्य सरकार पांच-पांच करोड़ रुपये की ग्रांट भी जारी कर देगी। इस ग्रांट से विधायक अपने क्षेत्र में बड़े विकास प्रोजेक्ट पर कार्य करेंगे जिससे क्षेत्र का विकास होगा।