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Mohali News: वीएनजी बताएगी चक्कर आने की वजह, आंखों की गतिविधियां करेगी रिकॉर्ड
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फेज-6 के एम्स में शुरू हुई सुविधा, पहले जांच के लिए मरीजों को भेजना पड़ता था बाहर
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। बार-बार चक्कर आने की समस्या से परेशान मरीजों को अब जांच के लिए दूसरे अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। फेज-6 स्थित एम्स मोहाली में वीडियो निस्टैग्मोग्राफी (वीएनजी) मशीन की सुविधा शुरू कर दी गई है। यह मशीन मरीजों की आंखों की अनैच्छिक गतिविधियों को रिकॉर्ड करेगी। वीडियो और ग्राफ के विश्लेषण से डॉक्टरों को चक्कर आने के संभावित कारणों का पता लगाने में मदद मिलेगी। इससे अस्पताल में ही जांच की सुविधा मिलने के साथ उपचार की दिशा तय करना भी आसान होगा। वीएनजी मशीन विशेष कैमरों की मदद से आंखों की हलचल रिकॉर्ड करती है। आंखों की इन गतिविधियों का संबंध शरीर के संतुलन तंत्र से होता है। जांच के दौरान तैयार वीडियो और ग्राफ का विश्लेषण कर डॉक्टर यह आकलन कर सकते हैं कि चक्कर आने की समस्या का संबंध भीतरी कान के संतुलन तंत्र से है या मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से। इससे बीमारी के संभावित कारणों के बीच अंतर करने में मदद मिलती है। हालांकि, अंतिम निदान मरीज के लक्षणों और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों के आधार पर किया जाता है।
कोट
अस्पताल में वीएनजी मशीन की सुविधा शुरू हो गई है। पहले इस जांच के लिए मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ता था, लेकिन अब एम्स में ही जांच की जा सकेगी। मशीन से मिलने वाली रिकॉर्डिंग और ग्राफ के विश्लेषण से डॉक्टरों को चक्कर आने की वजह का आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे मरीजों को बाहर जाने की परेशानी कम होगी और उपचार की उचित दिशा तय करने में सहूलियत मिलेगी। - डॉ. मनीष गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, एम्स मोहाली
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। बार-बार चक्कर आने की समस्या से परेशान मरीजों को अब जांच के लिए दूसरे अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। फेज-6 स्थित एम्स मोहाली में वीडियो निस्टैग्मोग्राफी (वीएनजी) मशीन की सुविधा शुरू कर दी गई है। यह मशीन मरीजों की आंखों की अनैच्छिक गतिविधियों को रिकॉर्ड करेगी। वीडियो और ग्राफ के विश्लेषण से डॉक्टरों को चक्कर आने के संभावित कारणों का पता लगाने में मदद मिलेगी। इससे अस्पताल में ही जांच की सुविधा मिलने के साथ उपचार की दिशा तय करना भी आसान होगा। वीएनजी मशीन विशेष कैमरों की मदद से आंखों की हलचल रिकॉर्ड करती है। आंखों की इन गतिविधियों का संबंध शरीर के संतुलन तंत्र से होता है। जांच के दौरान तैयार वीडियो और ग्राफ का विश्लेषण कर डॉक्टर यह आकलन कर सकते हैं कि चक्कर आने की समस्या का संबंध भीतरी कान के संतुलन तंत्र से है या मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से। इससे बीमारी के संभावित कारणों के बीच अंतर करने में मदद मिलती है। हालांकि, अंतिम निदान मरीज के लक्षणों और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों के आधार पर किया जाता है।
कोट
अस्पताल में वीएनजी मशीन की सुविधा शुरू हो गई है। पहले इस जांच के लिए मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ता था, लेकिन अब एम्स में ही जांच की जा सकेगी। मशीन से मिलने वाली रिकॉर्डिंग और ग्राफ के विश्लेषण से डॉक्टरों को चक्कर आने की वजह का आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे मरीजों को बाहर जाने की परेशानी कम होगी और उपचार की उचित दिशा तय करने में सहूलियत मिलेगी। - डॉ. मनीष गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, एम्स मोहाली
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