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Mohali News: देरी से फ्लैट देने पर बिल्डर को ब्याज देने के आदेश, रेरा ने शिकायत आंशिक रूप से मंजूर की

Tue, 10 Mar 2026 02:40 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 02:40 AM IST
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RERA partially approves complaint, orders builder to pay interest for delayed delivery of flat
मोहाली। पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने ओमेक्स न्यू चंडीगढ़ स्थित द लेक प्रोजेक्ट में देरी से कब्जा देने पर बिल्डर को ब्याज देने के आदेश दिए हैं। अथॉरिटी ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि बिल्डर तय समय पर कब्जा देने में विफल रहा, इसलिए खरीदार को देरी की अवधि का ब्याज दिया जाए। मामला रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 31 के तहत दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे 6 जुलाई 2018 को ओमेक्स न्यू चंडीगढ़ के द लेक प्रोजेक्ट में एक आवासीय यूनिट आवंटित की गई थी।
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यूनिट की कुल कीमत 82,89,286 रुपये तय की गई थी। बायर्स एग्रीमेंट के क्लॉज 7.1 के अनुसार फ्लैट का कब्जा 31 जुलाई 2021 तक दिया जाना था, लेकिन लंबे समय तक कब्जा नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता के वकील ने दलील दी कि कंपनी ने 21 जनवरी 2025 को कब्जा देने की पेशकश की, जबकि उस समय तक परियोजना के लिए आवश्यक ऑक्यूपेंसी या कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं किया गया था। उनका कहना था कि रेरा रिकॉर्ड के अनुसार यूनिट का कारपेट एरिया 1220 वर्ग फुट है, जबकि बिल्डर ने 1820 वर्ग फुट सुपर एरिया के आधार पर राशि वसूली, जो नियमों के खिलाफ है।
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वहीं बिल्डर की ओर से कहा गया कि परियोजना में देरी कोविड-19 महामारी और विभिन्न प्रशासनिक मंजूरियों में देरी के कारण हुई। कंपनी का दावा था कि टावर पूरा होने के बाद 26 नवंबर 2025 को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिया गया था और पहले दी गई पेशकश केवल इंटीरियर कार्य शुरू करने के लिए थी।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अथॉरिटी ने माना कि सुपर एरिया के आधार पर राशि लेने का मुद्दा एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से दर्ज होने के कारण स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि यह भी पाया गया कि 31 जुलाई 2021 तक कब्जा नहीं दिया गया और वैध ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट भी बाद में प्राप्त हुआ। रेरा ने आदेश दिया कि बिल्डर 31 जुलाई 2021 से लेकर वैध कब्जे की नई पेशकश होने तक खरीदार को देरी का ब्याज पंजाब रेरा नियमों के अनुसार (एमसीएलआर दर प्लस दो प्रतिशत) दे। साथ ही बिल्डर को दो महीने के भीतर नई कब्जा पेशकश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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