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पीएम और सुखबीर बादल का पुतला फूंका
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डेराबस्सी में आम आदमी पार्टी नेता का पुतला जलाकर विरोध दर्ज करवाते आप वर्कर।
- फोटो : MOHALI
डेराबस्सी। पंजाब के किसान, मजदूर और आढ़तियों के पक्ष में आम आदमी पार्टी की हलका ईकाई ने केंद्र सरकार द्वारा फसलों को लेकर लाए गए तीन ऑर्डिनेंस का समर्थन कर रहे शिरोमणि अकाली दल के खिलाफ बस स्टैंड डेराबस्सी में प्रदर्शन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल का पुतला फूंका। इसके साथ ही ऐसे ऑर्डिनेंस को खारिज करने की मांग की।
आम आदमी पार्टी हलका डेराबस्सी के सीनियर नेता कुलजीत सिंह रंधावा और केएस चौहान ने बताया कि शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने पता नहीं कैसे अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल की कुर्सी बचाने के लिए पंजाब के किसानों के हितों की बलि चढ़ा दी। उन्होंने कहा कि पंजाब की कांग्रेस सरकार द्वारा बुलाई जा चुकी आल पार्टी मीटिंग में सभी पार्टी एकजुट होकर इस आर्डनेंस के खिलाफ पीएम नरेंद्र मोदी को मिलने के लिए सहमत है लेकिन शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल इस फैसले के विरोध में थे।
पार्टी नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि शिअद पहले अपना स्टैंड स्पष्ट करे और बताए कि वे केंद्र सरकार में ऐसी कौन-सी इमरजेंसी थी, जिसके चलते किसान विरोधी ऑर्डिनेंस को जारी किया गया।
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कांग्रेस ने 2017 में किया था प्रस्ताव पारित : एनके शर्मा
जिस ऑर्डिनेंस को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता अपना विरोध जता रहे हैं, ये खुद कांग्रेसियों के साथ मिले हुए हैं। क्योंकि पंजाब की कांग्रेस सरकार द्वारा 2017 में पहले ही इसको लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा गया है, जिसकी कॉपी मेरे पास मौजूद है और रही बात मंडीकरण बोर्ड को खत्म करने की तो इसका अधिकार पंजाब की कांग्रेस सरकार के पास है। -एनके शर्मा, विधायक, शिरोमणि अकाली दल।
कोट्स..
पार्टी पहले ही पक्ष क्लीयर कर चुकी : ढिल्लों
उनकी सरकार तो पहले ही केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीनों ऑर्डिनेंस के खिलाफ अपना पक्ष क्लीयर कर चुकी है। जबकि मोदी सरकार में शिअद भाईवाल पार्टी है, जिसके वजीर (हरसिमरत कौर बादल) ने बैठक में शामिल होकर ऑर्डिनेंस पर हस्ताक्षर करके अपनी मंजूरी प्रदान की है। -दीपेंद्र सिंह ढिल्लों, प्रदेश कांग्रेस महासचिव।
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आम आदमी पार्टी हलका डेराबस्सी के सीनियर नेता कुलजीत सिंह रंधावा और केएस चौहान ने बताया कि शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने पता नहीं कैसे अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल की कुर्सी बचाने के लिए पंजाब के किसानों के हितों की बलि चढ़ा दी। उन्होंने कहा कि पंजाब की कांग्रेस सरकार द्वारा बुलाई जा चुकी आल पार्टी मीटिंग में सभी पार्टी एकजुट होकर इस आर्डनेंस के खिलाफ पीएम नरेंद्र मोदी को मिलने के लिए सहमत है लेकिन शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल इस फैसले के विरोध में थे।
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पार्टी नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि शिअद पहले अपना स्टैंड स्पष्ट करे और बताए कि वे केंद्र सरकार में ऐसी कौन-सी इमरजेंसी थी, जिसके चलते किसान विरोधी ऑर्डिनेंस को जारी किया गया।
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कांग्रेस ने 2017 में किया था प्रस्ताव पारित : एनके शर्मा
जिस ऑर्डिनेंस को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता अपना विरोध जता रहे हैं, ये खुद कांग्रेसियों के साथ मिले हुए हैं। क्योंकि पंजाब की कांग्रेस सरकार द्वारा 2017 में पहले ही इसको लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा गया है, जिसकी कॉपी मेरे पास मौजूद है और रही बात मंडीकरण बोर्ड को खत्म करने की तो इसका अधिकार पंजाब की कांग्रेस सरकार के पास है। -एनके शर्मा, विधायक, शिरोमणि अकाली दल।
कोट्स..
पार्टी पहले ही पक्ष क्लीयर कर चुकी : ढिल्लों
उनकी सरकार तो पहले ही केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीनों ऑर्डिनेंस के खिलाफ अपना पक्ष क्लीयर कर चुकी है। जबकि मोदी सरकार में शिअद भाईवाल पार्टी है, जिसके वजीर (हरसिमरत कौर बादल) ने बैठक में शामिल होकर ऑर्डिनेंस पर हस्ताक्षर करके अपनी मंजूरी प्रदान की है। -दीपेंद्र सिंह ढिल्लों, प्रदेश कांग्रेस महासचिव।