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मोहाली में ट्रैफिक नियम तोड़े तो घर के पते पर पहुंचेगा चालान
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मोहाली। वीआईपी शहर की सड़कों पर ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहन चालक अब चालान से नहीं बच पाएंगे। जिला पुलिस की नजर अब शहर की सड़कों पर नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर रहेगी। जिला मोहाली पुलिस ने चंडीगढ़ की तर्ज पर ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले लोगों के घरों के पते पर चालान भेजने की तैयारी की है। पुलिस को उम्मीद है कि इससे जहां लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करेंगे, वहीं, सड़क हादसों में भी कमी आएगी और सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। डीएसपी सिटी-1 गुरशेर सिंह ने लोगों से अपील की है कि वह ट्रैफिक नियमों का पालन जरूर करें। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक नियमों का संबंध सीधे हमारे जीवन के नियमों की तरह ही है। जो व्यक्ति जीवन में नियमों का पालन करता है उसे कोई मुश्किल नहीं आती। इसी तरह सड़कों पर चलते समय ट्रैफिक नियमों का पालन करना भी जरूरी है, जिससे किसी तरह के हादसे नहीं होंगे और लोगों को मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जानकारी के मुताबिक मोहाली जिले में ई-सर्विलांस प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपये की लागत से अति आधुनिक कैमरे लगाए गए हैं। इसके तहत शहर की सभी प्रमुख सड़कों, चौराहों और बाजारों को कवर किया गया है। जिले की तीनों सब डिवीजन मोहाली, खरड़ और डेराबस्सी में स्पेशल कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। वहीं, कंट्रोल रूम के कैमरों की रिकॉर्डिंग को चेक करने में दिक्कत न आए, इसके लिए बाकायदा नई फाइबर वाली लाइन बिछाई गई है। प्रोजेक्ट के तहत हाई रेजोल्यूशन और नाइट विजन वाले कैमरे लगाए गए हैं। इनके माध्यम से ओवरस्पीड वाहनों की नंबर प्लेट, ऑटोेमंटिक नंबर प्लेट रिकॉग्नाइज कैमरे तेजी से दौड़ते वाहनों के नंबर पढ़ पाएंगे। इससे वाहन मालिक को भी नियम तोड़ने की जानकारी दी जाएगी। अगर नियम तोड़ने वाला चालान का भुगतान नहीं करेगा तो आगे वाहन ट्रांसफर नहीं होगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक अहम प्रोजेक्ट है। इससे पुलिस को शहर में अपराध कम होने भी उम्मीद है।
कैमरों से पकड़े जा चुके हैं कई अपराधी
जानकारी के मुताबिक भले ही शहर की सड़कों पर पहले पुलिस विभाग की ओर कम क्वालिटी के कैमरे लगाए गए थे। हालांकि इन कैमरों ने कई केसों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। पत्रकार केजे सिंह मर्डर केस की कार भी कैमरों के सहारे ही ट्रेस हो पाई थी। एकम हत्याकांड में भी पुलिस को कैमरों से ही अहम जानकारी मिली थी। चंडीगढ़ में ऑटो वाले द्वारा किए गए दुष्कर्म के केस को भी पुलिस ने सीसीटीवी के सहारे सुलझा लिया था।
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जानकारी के मुताबिक मोहाली जिले में ई-सर्विलांस प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपये की लागत से अति आधुनिक कैमरे लगाए गए हैं। इसके तहत शहर की सभी प्रमुख सड़कों, चौराहों और बाजारों को कवर किया गया है। जिले की तीनों सब डिवीजन मोहाली, खरड़ और डेराबस्सी में स्पेशल कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। वहीं, कंट्रोल रूम के कैमरों की रिकॉर्डिंग को चेक करने में दिक्कत न आए, इसके लिए बाकायदा नई फाइबर वाली लाइन बिछाई गई है। प्रोजेक्ट के तहत हाई रेजोल्यूशन और नाइट विजन वाले कैमरे लगाए गए हैं। इनके माध्यम से ओवरस्पीड वाहनों की नंबर प्लेट, ऑटोेमंटिक नंबर प्लेट रिकॉग्नाइज कैमरे तेजी से दौड़ते वाहनों के नंबर पढ़ पाएंगे। इससे वाहन मालिक को भी नियम तोड़ने की जानकारी दी जाएगी। अगर नियम तोड़ने वाला चालान का भुगतान नहीं करेगा तो आगे वाहन ट्रांसफर नहीं होगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक अहम प्रोजेक्ट है। इससे पुलिस को शहर में अपराध कम होने भी उम्मीद है।
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कैमरों से पकड़े जा चुके हैं कई अपराधी
जानकारी के मुताबिक भले ही शहर की सड़कों पर पहले पुलिस विभाग की ओर कम क्वालिटी के कैमरे लगाए गए थे। हालांकि इन कैमरों ने कई केसों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। पत्रकार केजे सिंह मर्डर केस की कार भी कैमरों के सहारे ही ट्रेस हो पाई थी। एकम हत्याकांड में भी पुलिस को कैमरों से ही अहम जानकारी मिली थी। चंडीगढ़ में ऑटो वाले द्वारा किए गए दुष्कर्म के केस को भी पुलिस ने सीसीटीवी के सहारे सुलझा लिया था।
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