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High Court: शादी के तोहफों पर असंतोष जताना क्रूरता नहीं, NRI पति के खिलाफ FIR रद्द, दहेज का था आरोप
Fri, 03 Apr 2026 08:20 AM IST
Ankesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चडीगढ़
Published by: Ankesh Kumar
Updated Fri, 03 Apr 2026 08:20 AM IST
सार
मोहाली के खरड़ थाने में 15 जुलाई 2015 को दर्ज एफआईआर में पत्नी ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद उसे क्रूरता का शिकार बनाया गया और दहेज से जुड़े विवाद हुए।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वैवाहिक विवाद और आपराधिक जिम्मेदारी के बीच साफ रेखा खींचते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि शादी में दिए गए पारंपरिक उपहारों को लेकर माता-पिता की नाराजगी बताना अपने आप में भारतीय दंड संहिता के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही जस्टिस शालिनी नागपाल ने न्यूजीलैंड के नागरिक पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है।
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मोहाली के खरड़ थाने में 15 जुलाई 2015 को दर्ज एफआईआर में पत्नी ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद उसे क्रूरता का शिकार बनाया गया और दहेज से जुड़े विवाद हुए। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि भारत में अपने सीमित प्रवास के दौरान पति ने माता-पिता की ओर से शादी में दिए गए उपहारों की गुणवत्ता को लेकर असंतोष व्यक्त किया था। अदालत ने कहा कि माता-पिता की ओर से शादी में दिए गए पारंपरिक उपहारों की गुणवत्ता को लेकर शिकायत बताना, क्रूरता नहीं कहा जा सकता। यह आचरण ऐसा नहीं था जिससे पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया गया हो, न ही इससे उसके जीवन या स्वास्थ्य को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ।
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हाईकोर्ट ने कहा कि इसे दहेज की अवैध मांग के लिए दबाव बनाने के रूप में नहीं देखा जा सकता है। यदि आरोपों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए तब भी वे किसी आपराधिक अपराध को स्थापित नहीं करते। इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू न्यायिक अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने पाया कि अधिकांश आरोप उस समय के हैं जब दंपती ऑकलैंड में रह रहे थे, ऐसे मामलों में भारत में सीधे आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
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हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर कहा कि शादी के बाद दंपति केवल 16 दिन भारत में साथ रहे और बाद में एक बार और 15 दिन की छोटी अवधि में साथ रहे। इस दौरान पति के खिलाफ सिर्फ गिफ्ट्स को लेकर असंतोष जताने का ही आरोप था। अदालत ने इन आरोपों को बेहद अस्पष्ट और आपराधिक मामला बनाने के लिए अपर्याप्त माना। हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी की ओर से दायर मेंटेनेंस केस में बच्चे को भरण-पोषण मिला लेकिन पत्नी को आय छिपाने के कारण नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने पाया कि 2022 में तलाक भी हो चुका है।