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Mohali News: छतबीड़ चिड़ियाघर की 13 वर्षीय सफेद बाघिन दीया की मौत, लुधियाना में होगा पोस्टमार्टम
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2013 में हुआ था जन्म, वर्ष 2019 में तीन शावकों को दिया था जन्म; पोस्टमार्टम से पता चलेगा मौत का कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। छतबीड़ चिड़ियाघर में रविवार सुबह सफेद बाघिन दीया की मौत हो गई। वह 13 साल, दो महीने और 21 दिन की थी। महेंद्र चौधरी प्राणी उद्यान प्रबंधन ने दीया की मौत पर शोक जताते हुए वन्यजीव संरक्षण और बाघों के प्रजनन कार्यक्रम में उसके योगदान को याद किया। चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, दीया का जन्म 28 जुलाई 2013 को छतबीड़ चिड़ियाघर में हुआ था। वह सफेद बाघ लकी और डॉली की संतान थी। इतने वर्षों तक दीया पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। उसने वर्ष 2019 में तीन शावकों अर्जुन, अमर और दिलनूर को जन्म दिया था। अर्जुन अभी छतबीड़ चिड़ियाघर में है, जबकि अमर को रोहतक चिड़ियाघर भेज दिया गया था। दीया की अगली पीढ़ी ने भी प्रजनन कार्यक्रम में योगदान दिया। उसके बेटे अर्जुन और राजकोट से लाई गई बाघिन गौरी के शावक पैदा हुए।
पोस्टमार्टम से पता चलेगा मौत का कारण
चिड़ियाघर प्रबंधन के मुताबिक, कैद में सफेद बाघों की औसत उम्र सामान्य तौर पर 10 से 12 वर्ष बताई जाती है। दीया ने 13 वर्ष से अधिक जीवन जिया। उसकी मौत से देखभाल करने वाले कर्मचारियों, पशु चिकित्सकों और वन्यजीव प्रेमियों में शोक है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए दीया के शव को पशु चिकित्सकों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम के लिए गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (गडवासू), लुधियाना ले जाया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असल वजह स्पष्ट हो सकेगी। चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। छतबीड़ चिड़ियाघर में रविवार सुबह सफेद बाघिन दीया की मौत हो गई। वह 13 साल, दो महीने और 21 दिन की थी। महेंद्र चौधरी प्राणी उद्यान प्रबंधन ने दीया की मौत पर शोक जताते हुए वन्यजीव संरक्षण और बाघों के प्रजनन कार्यक्रम में उसके योगदान को याद किया। चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, दीया का जन्म 28 जुलाई 2013 को छतबीड़ चिड़ियाघर में हुआ था। वह सफेद बाघ लकी और डॉली की संतान थी। इतने वर्षों तक दीया पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। उसने वर्ष 2019 में तीन शावकों अर्जुन, अमर और दिलनूर को जन्म दिया था। अर्जुन अभी छतबीड़ चिड़ियाघर में है, जबकि अमर को रोहतक चिड़ियाघर भेज दिया गया था। दीया की अगली पीढ़ी ने भी प्रजनन कार्यक्रम में योगदान दिया। उसके बेटे अर्जुन और राजकोट से लाई गई बाघिन गौरी के शावक पैदा हुए।
पोस्टमार्टम से पता चलेगा मौत का कारण
चिड़ियाघर प्रबंधन के मुताबिक, कैद में सफेद बाघों की औसत उम्र सामान्य तौर पर 10 से 12 वर्ष बताई जाती है। दीया ने 13 वर्ष से अधिक जीवन जिया। उसकी मौत से देखभाल करने वाले कर्मचारियों, पशु चिकित्सकों और वन्यजीव प्रेमियों में शोक है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए दीया के शव को पशु चिकित्सकों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम के लिए गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (गडवासू), लुधियाना ले जाया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असल वजह स्पष्ट हो सकेगी। चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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