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वाटर स्वच्छता सैस का विरोध शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
Updated Sat, 30 Jan 2016 02:42 PM IST
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पंजाब सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों की भांति ही ग्रामीण क्षेत्रों में जल सप्लाई पर लागू किए गए स्वच्छता सैस का विरोध शुरू हो गया है। कई ग्राम पंचायतों ने ऐलान किया है कि वे सरकार की इस नीति का कड़ा विरोध करते हैं।
ग्रामीण लोग वाटर सप्लाई का बिल पहले ही मुश्किल से अदा कर पा रहे हैं वहीं उन पर लगाया गया स्वच्छता सैस पूरी तरह से नाजायज है। इतना ही नहीं गांव के जिस व्यक्ति के पास वाटर वर्क्स का कनेक्शन ही नहीं है वह वाटर सैस क्यों भरेगा। पंचायतों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
ग्राम पंचायत आलमगढ़ के सरपंच मक्खन लाल, ढाणी विशेषरनाथ की महिला सरपंच प्रदीप कौर, पूर्व सरपंच रूपेंद्र सिंह तथा गांव ढींगावाली के सरपंच एडवोकेट सुशील सिहाग ने कहा है कि गांवों में करीब 30 प्रतिशत लोगों के घरों में वाटर वर्क्स के कनेक्शन नहीं होते। ऐसे में यह सैस उन पर लागू नहीं किया जा सकता।
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इसके अलावा जो लोग वाटर वर्कस का पानी प्रयोग करते हैं वे भी बड़ी मुश्किल से इसका बिल अदा कर पाते हैं। वहीं सरकार द्वारा उन पर जबरन वाटर स्वच्छता सैस और थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे सरकार के इस फैसले का विरोध करेंगे और शीघ्र ही एक मांग पत्र भी जिला उपायुक्त को सौंपकर सरकार से इस फैसले पर पुर्नविचार करने की मांग करेंगे।
गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने ऐलान किया है कि 1 अप्रैल, 2016 से जल सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग से संबंधित ग्रामीण जल सप्लाई योजनाएं पंचायतों के हवाले की जाएंगी। इसके तहत 200 रुपये प्रति माह तक के बिजली बिल वाले उपभोक्ता से वाटर स्वच्छता सैस के रूप में 25 रुपये वसूले जाएंगे।
500 रुपये तक के बिजली बिल पर 50 रुपये और इससे अधिक के बिजली बिल वाले उपभोक्ता पर 100 रुपये प्रति माह वाटर स्वच्छता सैस के रूप में वसूले जाएंगे। यह पैसा बिजली विभाग एकत्रित करके ग्राम पंचायतों व ग्रामीण जल सप्लाई सैनिटेशन कमेटियों के खातों में जमा करवाएगा।
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ग्रामीण लोग वाटर सप्लाई का बिल पहले ही मुश्किल से अदा कर पा रहे हैं वहीं उन पर लगाया गया स्वच्छता सैस पूरी तरह से नाजायज है। इतना ही नहीं गांव के जिस व्यक्ति के पास वाटर वर्क्स का कनेक्शन ही नहीं है वह वाटर सैस क्यों भरेगा। पंचायतों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
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ग्राम पंचायत आलमगढ़ के सरपंच मक्खन लाल, ढाणी विशेषरनाथ की महिला सरपंच प्रदीप कौर, पूर्व सरपंच रूपेंद्र सिंह तथा गांव ढींगावाली के सरपंच एडवोकेट सुशील सिहाग ने कहा है कि गांवों में करीब 30 प्रतिशत लोगों के घरों में वाटर वर्क्स के कनेक्शन नहीं होते। ऐसे में यह सैस उन पर लागू नहीं किया जा सकता।
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इसके अलावा जो लोग वाटर वर्कस का पानी प्रयोग करते हैं वे भी बड़ी मुश्किल से इसका बिल अदा कर पाते हैं। वहीं सरकार द्वारा उन पर जबरन वाटर स्वच्छता सैस और थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे सरकार के इस फैसले का विरोध करेंगे और शीघ्र ही एक मांग पत्र भी जिला उपायुक्त को सौंपकर सरकार से इस फैसले पर पुर्नविचार करने की मांग करेंगे।
गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने ऐलान किया है कि 1 अप्रैल, 2016 से जल सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग से संबंधित ग्रामीण जल सप्लाई योजनाएं पंचायतों के हवाले की जाएंगी। इसके तहत 200 रुपये प्रति माह तक के बिजली बिल वाले उपभोक्ता से वाटर स्वच्छता सैस के रूप में 25 रुपये वसूले जाएंगे।
500 रुपये तक के बिजली बिल पर 50 रुपये और इससे अधिक के बिजली बिल वाले उपभोक्ता पर 100 रुपये प्रति माह वाटर स्वच्छता सैस के रूप में वसूले जाएंगे। यह पैसा बिजली विभाग एकत्रित करके ग्राम पंचायतों व ग्रामीण जल सप्लाई सैनिटेशन कमेटियों के खातों में जमा करवाएगा।