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सवा साल बाद भी मोदी सरकार ने पंजाब को दिखाया ठेंगा : जाखड़
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Fri, 01 Jan 2016 10:48 PM IST
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कांग्रेस के पूर्व प्रतिपक्ष नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि केंद्र सरकार ने
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पंजाब की अनदेखी कर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व छतीसगढ़ को सूखा राहत के तहत
6800 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
पंजाब के किसान पिछले वर्ष सूखे के कारण और इस साल फरवरी-मार्च में बेमौसमी बरसात और सफेद मच्छर के हमले के कारण भारी आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। कर्जे के बोझ तले दबे किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। ऐसे हालातों में केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा पंजाब के किसानों के लिए आर्थिक मदद जारी न करना बताया है कि केंद्र की भाजपा सरकार पंजाब के किसानों की विरोधी है।
जाखड़ ने बताया कि हरित क्रांति के बलबूते पर पूरे देश को अनाज के संकट से उबारने वाले पंजाब प्रदेश को 2010 में यूपीए सरकार में डा. मनमोहन सिंह ने सूखा ग्रस्त क्षेत्रों के लिए 800 करोड़ की राहत राशि जारी की थी। वर्तमान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सवा साल के प्रयास के बाद भी अभी तक एनडीए सरकार से कुछ भी हासिल नहीं कर पाये। मुख्यमंत्री ने पिछले साल सितंबर में पत्र दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा था।
इसमें कहा गया था कि देश की खाद्यान सुरक्षा में पंजाब का गेहूं में योगदान 40 से 50 और धान में 30 से 35 प्रतिशत है। यह स्थिति पिछले तीन दशक से है। सूखा पड़ने और कर्जदार होने के बावजूद किसान उत्पादकता कायम रखने में जुटे रहते हैं।
पंजाब के किसान पिछले वर्ष सूखे के कारण और इस साल फरवरी-मार्च में बेमौसमी बरसात और सफेद मच्छर के हमले के कारण भारी आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। कर्जे के बोझ तले दबे किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। ऐसे हालातों में केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा पंजाब के किसानों के लिए आर्थिक मदद जारी न करना बताया है कि केंद्र की भाजपा सरकार पंजाब के किसानों की विरोधी है।
जाखड़ ने बताया कि हरित क्रांति के बलबूते पर पूरे देश को अनाज के संकट से उबारने वाले पंजाब प्रदेश को 2010 में यूपीए सरकार में डा. मनमोहन सिंह ने सूखा ग्रस्त क्षेत्रों के लिए 800 करोड़ की राहत राशि जारी की थी। वर्तमान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सवा साल के प्रयास के बाद भी अभी तक एनडीए सरकार से कुछ भी हासिल नहीं कर पाये। मुख्यमंत्री ने पिछले साल सितंबर में पत्र दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा था।
इसमें कहा गया था कि देश की खाद्यान सुरक्षा में पंजाब का गेहूं में योगदान 40 से 50 और धान में 30 से 35 प्रतिशत है। यह स्थिति पिछले तीन दशक से है। सूखा पड़ने और कर्जदार होने के बावजूद किसान उत्पादकता कायम रखने में जुटे रहते हैं।