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सरपंच ने डकारे 10 लाख
अबोहर (फिरोजपुर)।
Updated Sun, 13 Jul 2014 10:47 PM IST
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अबोहर उपमंडल के अंतिम छोर नहर की टेलों पर बसे गांव शेरगढ़ के पूर्व सरपंच सहित पंचायत सचिव व तत्कालीन बीडीपीओ पर नहर की सफाई के नाम पर 10 लाख रुपए हड़पने का आरोप लगा है। इस मामले को लेकर जिला पुलिस प्रमुख ने 25 जुलाई को माननीय हाईकोर्ट में पेश होकर जांच रिपोर्ट दाखिल करनी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2009 में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने संगत दर्शन के दौरान गांव शेरगढ़ को जाने वाली रामसरा माईनर व लंबी माईनर की सफाई के लिए 10 लाख रुपए जारी करने का ऐलान किया। लेकिन समय पर ग्रांट न मिलने के कारण गांव शेरगढ़ के किसानों ने 40 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से पैसे एकत्रित किए और दोनों नहरों की उचित सफाई करवा ली।
जबकि गांव के तत्कालीन सरपंच संतराम ने आश्वासन दिया था कि ग्रांट आते ही नहर की सफाई पर लगा किसानों का पैसा वापिस कर दिया जाएगा। लेकिन काफी दिनों तक तब सरपंच ने पैसे के बारे में कोई संतोषजनक जबाव नहीं दिया तो किसानों ने तत्कालीन बीडीपीओ से जानकारी हासिल की तो पता चला कि सरकार द्वारा भेजी गई 10 लाख की ग्रांट से उन्होंने नहरों की सफाई करवा दी।
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किसान इस बात को लेकर हैरान थे कि सफाई तो उन्होंने अपने पैसों से करवाई है। इस पर किसानों ने सूचना अधिकार के तहत बीडीओ आफिस से नहर की सफाई में हुए खर्च व मजदूरी करने वालों के नाम की पूरी जानकारी मांगी और विभाग द्वारा जो जानकारी दी गई उससे पूरे घोटाले का पर्दाफाश हो गया।
सूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी के हवाले से किसान महावीर भादू ने बताया कि पंचायत द्वारा 1 जनवरी 2010 को नहरों की सफाई का जो मस्ट्रोल तैयार किया गया है। उसमें एक दिन में 20 से 50 लोगों की हाजिरी दर्ज है। जबकि गांव के जिन लोगों के नाम मजदूरों की सूची में दर्ज है वे गांव के बड़े लेंडलार्ड जमींदार हैं।
इसके अलावा 1 जनवरी 2010 को बने इस मस्ट्रोल में पंचायत ने मदन पुत्र मान सिंह व जांगीराम पुत्र डोंगर राम को मजदूरी करते दिखाया है जबकि मदन पुत्र मान सिंह की 17 जनवरी 2004 और जांगीराम की 6 मई 2008 को मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं गांव के जिन लोगों को नहर की सफाई में मजदूरी करते हुए दिखाया गया है उन सभी के अंगूठे व हस्ताक्षर जाली है।
इधर नहरी विभाग के अधिकारियों ने यह लिखकर दे दिया कि उक्त समयावधि के दौरान इन दोनों नहरों की सरकारी तौर पर कोई सफाई नहीं करवाई गई। गांव के किसानों ने हाईकोर्ट में सरपंच संतराम, पंचायत सचिव इकबाल सिंह व बीडीपीओ के खिलाफ याचिका दायर कर जांच की मांग की।
हाईकोर्ट ने एसएसपी फाजिल्का से मामले की जांच कर 3 मार्च 2014 को रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। लेकिन जांच पूरी न होने से एसएसपी द्वारा अदालत से और समय मांगे जाने पर अदालत ने 27 जुलाई को पूरी जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2009 में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने संगत दर्शन के दौरान गांव शेरगढ़ को जाने वाली रामसरा माईनर व लंबी माईनर की सफाई के लिए 10 लाख रुपए जारी करने का ऐलान किया। लेकिन समय पर ग्रांट न मिलने के कारण गांव शेरगढ़ के किसानों ने 40 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से पैसे एकत्रित किए और दोनों नहरों की उचित सफाई करवा ली।
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जबकि गांव के तत्कालीन सरपंच संतराम ने आश्वासन दिया था कि ग्रांट आते ही नहर की सफाई पर लगा किसानों का पैसा वापिस कर दिया जाएगा। लेकिन काफी दिनों तक तब सरपंच ने पैसे के बारे में कोई संतोषजनक जबाव नहीं दिया तो किसानों ने तत्कालीन बीडीपीओ से जानकारी हासिल की तो पता चला कि सरकार द्वारा भेजी गई 10 लाख की ग्रांट से उन्होंने नहरों की सफाई करवा दी।
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किसान इस बात को लेकर हैरान थे कि सफाई तो उन्होंने अपने पैसों से करवाई है। इस पर किसानों ने सूचना अधिकार के तहत बीडीओ आफिस से नहर की सफाई में हुए खर्च व मजदूरी करने वालों के नाम की पूरी जानकारी मांगी और विभाग द्वारा जो जानकारी दी गई उससे पूरे घोटाले का पर्दाफाश हो गया।
सूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी के हवाले से किसान महावीर भादू ने बताया कि पंचायत द्वारा 1 जनवरी 2010 को नहरों की सफाई का जो मस्ट्रोल तैयार किया गया है। उसमें एक दिन में 20 से 50 लोगों की हाजिरी दर्ज है। जबकि गांव के जिन लोगों के नाम मजदूरों की सूची में दर्ज है वे गांव के बड़े लेंडलार्ड जमींदार हैं।
इसके अलावा 1 जनवरी 2010 को बने इस मस्ट्रोल में पंचायत ने मदन पुत्र मान सिंह व जांगीराम पुत्र डोंगर राम को मजदूरी करते दिखाया है जबकि मदन पुत्र मान सिंह की 17 जनवरी 2004 और जांगीराम की 6 मई 2008 को मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं गांव के जिन लोगों को नहर की सफाई में मजदूरी करते हुए दिखाया गया है उन सभी के अंगूठे व हस्ताक्षर जाली है।
इधर नहरी विभाग के अधिकारियों ने यह लिखकर दे दिया कि उक्त समयावधि के दौरान इन दोनों नहरों की सरकारी तौर पर कोई सफाई नहीं करवाई गई। गांव के किसानों ने हाईकोर्ट में सरपंच संतराम, पंचायत सचिव इकबाल सिंह व बीडीपीओ के खिलाफ याचिका दायर कर जांच की मांग की।
हाईकोर्ट ने एसएसपी फाजिल्का से मामले की जांच कर 3 मार्च 2014 को रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। लेकिन जांच पूरी न होने से एसएसपी द्वारा अदालत से और समय मांगे जाने पर अदालत ने 27 जुलाई को पूरी जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।