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मुस्लिम, सिख, हिंदू एकता के प्रतीक थे ऊधम सिंह
अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Sat, 11 Jan 2014 10:35 PM IST
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शहीद ऊधम सिंह के कई नाम थे, लेकिन राम मोहम्मद सिंह आजाद के नाम को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। ये नाम कई पुस्तकों और यादगारी जगहों पर लिखा मिल जाएगा। हालांकि प्रमाणिक ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि उसका नाम मोहम्मद सिंह आजाद था न कि राम मोहम्मद सिंह आजाद।
भारत दी आजादी दी समां दा परवाना महान गदरी इंकलाबी शहीद ऊधम सिंह पुस्तक लिखने वाले लेखक राकेश कुमार ने 26 दिसंबर को देश भगत यादगार हाल जालंधर में भी अपने संबोधन में राम मोहम्मद सिंह आजाद नाम को लेकर एतराज जताते हुए कहा था कि ऐतिहासिक तथ्यों में यह नाम कहीं भी अंकित नहीं है।
लेखक राकेश कुमार (रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर वर्क/लैंड) ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि शहीद ऊधम सिंह को बचपन में शेर सिंह के नाम से जाना जाता था। बाद में वे कई नामों से जानने लगे, जैसे आजाद सिंह, बावा साहिब, उदय सिंह, ऊधन सिंह-ऊधान सिंह, फरैक ब्राजिल, सिबदू सिंह, यूएस सिद्धू आदि।
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राकेश कुमार का कहना है कि कई जगहों पर ऊधम सिंह का नाम राम मोहम्मद सिंह आजाद लिखा है जबकि उसका नाम मोहम्मद सिंह आजाद था। इतिहास के कई दस्तावेजों पर यह नाम अंकित है। कहीं भी राम मोहम्मद सिंह आजाद नहीं है। ऊधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को कैकस्टन हॉल में पकड़े जाने पर पुलिस को अपना नाम मोहम्मद सिंह आजाद बताया था। मेट्रोपोलिटल पुलिस ने भी माइकल ओ डायर की हत्या के आरोप में उनका रिमांड 21 मार्च 1940 तक मोहम्मद सिंह आजाद (ब्रिटिश सरकार की ओर से जून 1997 में जारी फाइल नंबर-पीएंडजे एस-466/36) के नाम से लिया था।
इसके अलावा ऊधम सिंह ने कैनन रोए पुलिस स्टेशन ए-डिवीजन में 15 मार्च 1940 को दिए बयान में भी अपना नाम मोहम्मद सिंह आजाद दर्ज करवाया। ब्रिटिश सरकार की ओर से जून 1997 में जारी फाइल नंबर-एमईपीओ 3/1743 में जोन स्वैन डिवीजनल डिटेकटिव इंस्पेक्टर ए-डिवीजन के बयान के अनुसार जब ऊधम सिंह को पकड़ा था उनकी बाजू पर मोहम्मद सिंह आजाद नाम का टैटू गुदा हुआ था।
मेरा नाम बदले की कोशिश न करना
16 मार्च 1940 को ऊधम सिंह की ओर से बरीकस्न जेल से मिस्टर सैडज सुपरिंटेंडेंट पुलिस को अपनी जूती, पगड़ी, पेंट आदि के बारे में लिखे पत्र में भी मोहम्मद सिंह आजाद नाम लिखा था। पत्र में यह भी कहा था कि मेरा नाम बदलने की कोशिश न करना। साथ में यह भी लिखा था कि संसार भर में मुझे मोहम्मद सिंह आजाद ही कहा जाता है।
फोटो के पीछे लिखा था अपना नाम
इसके अलावा लेखक रोजर परकिनस ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि ऊधम सिंह ने पकड़े जाने पर स्वीकार किया था कि उसका नाम मोहम्मद सिंह आजाद उसकी खोज है। यह मुस्लिम-सिख-हिंदू एकता का चिन्ह है। इसी तरह ऊधम सिंह ने जेल से अपने दोस्त अवतार सिंह जौहल व कई अन्य लोगों को भेजे पत्र में एमएस आजाद (मोहम्मद सिंह आजाद) लिखा है। यही नहीं अपने एक मित्र बिशन सिंह (बावा बिशन) को भेजी अपनी एक फोटोे के पीछे भी मोहम्मद सिंह आजाद नाम लिखकर भेजा है।
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भारत दी आजादी दी समां दा परवाना महान गदरी इंकलाबी शहीद ऊधम सिंह पुस्तक लिखने वाले लेखक राकेश कुमार ने 26 दिसंबर को देश भगत यादगार हाल जालंधर में भी अपने संबोधन में राम मोहम्मद सिंह आजाद नाम को लेकर एतराज जताते हुए कहा था कि ऐतिहासिक तथ्यों में यह नाम कहीं भी अंकित नहीं है।
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लेखक राकेश कुमार (रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर वर्क/लैंड) ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि शहीद ऊधम सिंह को बचपन में शेर सिंह के नाम से जाना जाता था। बाद में वे कई नामों से जानने लगे, जैसे आजाद सिंह, बावा साहिब, उदय सिंह, ऊधन सिंह-ऊधान सिंह, फरैक ब्राजिल, सिबदू सिंह, यूएस सिद्धू आदि।
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राकेश कुमार का कहना है कि कई जगहों पर ऊधम सिंह का नाम राम मोहम्मद सिंह आजाद लिखा है जबकि उसका नाम मोहम्मद सिंह आजाद था। इतिहास के कई दस्तावेजों पर यह नाम अंकित है। कहीं भी राम मोहम्मद सिंह आजाद नहीं है। ऊधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को कैकस्टन हॉल में पकड़े जाने पर पुलिस को अपना नाम मोहम्मद सिंह आजाद बताया था। मेट्रोपोलिटल पुलिस ने भी माइकल ओ डायर की हत्या के आरोप में उनका रिमांड 21 मार्च 1940 तक मोहम्मद सिंह आजाद (ब्रिटिश सरकार की ओर से जून 1997 में जारी फाइल नंबर-पीएंडजे एस-466/36) के नाम से लिया था।
इसके अलावा ऊधम सिंह ने कैनन रोए पुलिस स्टेशन ए-डिवीजन में 15 मार्च 1940 को दिए बयान में भी अपना नाम मोहम्मद सिंह आजाद दर्ज करवाया। ब्रिटिश सरकार की ओर से जून 1997 में जारी फाइल नंबर-एमईपीओ 3/1743 में जोन स्वैन डिवीजनल डिटेकटिव इंस्पेक्टर ए-डिवीजन के बयान के अनुसार जब ऊधम सिंह को पकड़ा था उनकी बाजू पर मोहम्मद सिंह आजाद नाम का टैटू गुदा हुआ था।
मेरा नाम बदले की कोशिश न करना
16 मार्च 1940 को ऊधम सिंह की ओर से बरीकस्न जेल से मिस्टर सैडज सुपरिंटेंडेंट पुलिस को अपनी जूती, पगड़ी, पेंट आदि के बारे में लिखे पत्र में भी मोहम्मद सिंह आजाद नाम लिखा था। पत्र में यह भी कहा था कि मेरा नाम बदलने की कोशिश न करना। साथ में यह भी लिखा था कि संसार भर में मुझे मोहम्मद सिंह आजाद ही कहा जाता है।
फोटो के पीछे लिखा था अपना नाम
इसके अलावा लेखक रोजर परकिनस ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि ऊधम सिंह ने पकड़े जाने पर स्वीकार किया था कि उसका नाम मोहम्मद सिंह आजाद उसकी खोज है। यह मुस्लिम-सिख-हिंदू एकता का चिन्ह है। इसी तरह ऊधम सिंह ने जेल से अपने दोस्त अवतार सिंह जौहल व कई अन्य लोगों को भेजे पत्र में एमएस आजाद (मोहम्मद सिंह आजाद) लिखा है। यही नहीं अपने एक मित्र बिशन सिंह (बावा बिशन) को भेजी अपनी एक फोटोे के पीछे भी मोहम्मद सिंह आजाद नाम लिखकर भेजा है।