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नई पेंशन स्कीम का किया कड़ा विरोध
अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Tue, 12 Nov 2013 10:29 PM IST
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फिरोजपुर में नार्दर्न रेलवे इंप्लाइज यूनियन (एनआरईयू) के सदस्यों ने महासचिव हरजीत सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को डीआरएम आफिस में नई पेंशन नीति का विरोध किया।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि मान्यता प्राप्त फेडरेशनों और यूनियनों की लापरवाही के चलते नई पेंशन नीति लागू हुई है। इससे रेलवे के 50.83 लाख कर्मियों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
यूनियन के हरजीत, अजीत सिंह और लखबीर सिंह ने बताया कि रेलवे की फेडरेशनों के उन दावों की हवा निकल गई है जो कहते थे कि नई पेंशन स्कीम लागू नहीं होने देंगे। जनवरी 2004 से सेना को छोड़ बाकी सभी विभागों में नई पेंशन स्कीम लागू हो चुकी है।
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नेताओं का कहना है कि इंटरनल लेबर आर्गेनाइजेशन (आईएलओ) के अनुसार पेंशन सरकार या रोजगार देने वाले की तरफ से कर्मचारी पर किया हुआ कोई एहसान नहीं बल्कि यह उसकी तनख्वाह का ही हिस्सा है जो उसे सेवा के दौरान नहीं दी गई थी।
इस इकट्ठी हुई तनख्वाह की राशि में से पेंशन दी जाती है। महासचिव ने बताया कि नई पेंशन नीति वास्तव में नई कथित आर्थिक सुधारवादी नीतियों की एक कड़ी है।
मेहनतकश लोगों से सरकार आर्थिक सुधारों के नाम पर शिक्षा, सेहत सुविधाएं, रोजगार, मेहनत का उचित मूल्य, सम्मानजनक जिंदगी जीने का हक छीन रही है।
लखवीर ने बताया कि नई पेंशन स्कीम से कर्मचारियों की जमा की गई तीन सौ छुट्टियों के नगद भुगतान का रास्ता बंद कर दिया है। ग्रेच्युटी खत्म कर दी है।
कर्मचारी अपनी जमा राशि को किसी भी सुख-दुख के अवसर पर नहीं निकलवा सकते। रिटायरमेंट के समय में भी कर्मी की जमा की गई राशि का भी केवल साठ फीसदी पैसा मिलेगा।
किसी दुर्घटना के कारण यदि कोई कर्मचारी सेवामुक्ति की आयु से एक दिन पहले भी नौकरी छोड़ जाता है या उसकी अकाल मृत्यु हो जाती है तो 80 फीसदी पेंशन फंड में रख लिया जाएगा और कर्मी के परिवार को केवल बीस फीसदी पैसा मिलेगा।
इस मौके पर राम कुमार योगी, पवन कुमार, हरीश कुमार, योगेश कुमार और अमरीक सिंह उपस्थित थे।
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यूनियन नेताओं का आरोप है कि मान्यता प्राप्त फेडरेशनों और यूनियनों की लापरवाही के चलते नई पेंशन नीति लागू हुई है। इससे रेलवे के 50.83 लाख कर्मियों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
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यूनियन के हरजीत, अजीत सिंह और लखबीर सिंह ने बताया कि रेलवे की फेडरेशनों के उन दावों की हवा निकल गई है जो कहते थे कि नई पेंशन स्कीम लागू नहीं होने देंगे। जनवरी 2004 से सेना को छोड़ बाकी सभी विभागों में नई पेंशन स्कीम लागू हो चुकी है।
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नेताओं का कहना है कि इंटरनल लेबर आर्गेनाइजेशन (आईएलओ) के अनुसार पेंशन सरकार या रोजगार देने वाले की तरफ से कर्मचारी पर किया हुआ कोई एहसान नहीं बल्कि यह उसकी तनख्वाह का ही हिस्सा है जो उसे सेवा के दौरान नहीं दी गई थी।
इस इकट्ठी हुई तनख्वाह की राशि में से पेंशन दी जाती है। महासचिव ने बताया कि नई पेंशन नीति वास्तव में नई कथित आर्थिक सुधारवादी नीतियों की एक कड़ी है।
मेहनतकश लोगों से सरकार आर्थिक सुधारों के नाम पर शिक्षा, सेहत सुविधाएं, रोजगार, मेहनत का उचित मूल्य, सम्मानजनक जिंदगी जीने का हक छीन रही है।
लखवीर ने बताया कि नई पेंशन स्कीम से कर्मचारियों की जमा की गई तीन सौ छुट्टियों के नगद भुगतान का रास्ता बंद कर दिया है। ग्रेच्युटी खत्म कर दी है।
कर्मचारी अपनी जमा राशि को किसी भी सुख-दुख के अवसर पर नहीं निकलवा सकते। रिटायरमेंट के समय में भी कर्मी की जमा की गई राशि का भी केवल साठ फीसदी पैसा मिलेगा।
किसी दुर्घटना के कारण यदि कोई कर्मचारी सेवामुक्ति की आयु से एक दिन पहले भी नौकरी छोड़ जाता है या उसकी अकाल मृत्यु हो जाती है तो 80 फीसदी पेंशन फंड में रख लिया जाएगा और कर्मी के परिवार को केवल बीस फीसदी पैसा मिलेगा।
इस मौके पर राम कुमार योगी, पवन कुमार, हरीश कुमार, योगेश कुमार और अमरीक सिंह उपस्थित थे।