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भारत में हर रोज पांच हजार बच्चे दम तोड़ देते

Mon, 30 Dec 2013 09:23 PM IST
अमर उजाला, (फिरोजपुर)
अमर उजाला, (फिरोजपुर) Updated Mon, 30 Dec 2013 09:23 PM IST
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Every day in India to five thousand children died
बाल विकास के नाम पर तमाम सरकारी और गैर संस्थाओं की मौजूदगी के बावजूद भारत में दुनियां के बाकी देशों की तुलना में सबसे अधिक मौतें होना त्रासदी ही नहीं बल्कि चिंताजनक भी है।
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वर्ष 2012 में विभिन्न कारणों से 66 लाख बच्चे मौत का शिकार हो गए।

सोशल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष राजकिशोर ने बताया कि 1990 में यह संख्या 1.26 करोड़ थी। संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों से दो दशक में दुनिया भर के लाखों बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकी है लेकिन 2015 तक इस मृत्यु दर में दो तिहाई कमी का लक्ष्य फिलहाल पूरा होता नहीं दिखता। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर के पांच साल के कम उम्र के आधे से अधिक बच्चों की मौत अकेले भारत, चीन, कांगो, पाकिस्तान और नाईजीरिया में हुई है।
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इन मौतों का कारण निमोनिया, मलेरिया और दस्त के साथ कुपोषण बड़ी वजह बताया गया। युनिसेफ की 2012 की एक रिपोर्ट के हवाले से समाजसेवी ने कहा कि 2011 में इस आयु वर्ग के मरने वाले 19000 बच्चों में से लगभग प्रतिदिन 5000 बच्चे भारत में मृत्यु का ग्रास बने।
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भारत में बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण गरीबी, कुपोषण और अशिक्षा है।
भारत में ढेरों ऐसी योजनाएं हैं जिसके आधार पर सरकारी तंत्र बच्चों के भविष्य का दावा करता है लेकिन हालत यह है कि ऐसी योजनाएं लाखों मासूमों तक पहुंचने से पहले भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं।


सोसायटी के अध्यक्ष ने कहा कि हमें वोट की राजनीति से ऊपर उठकर सामाजिक मुद्दों पर भी सोचना चाहिए।
 आंकड़े यह भी बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष हमारे देश में 90,000 बच्चे अपहरण या लापता हो जाते हैं जिनमें से पुलिस प्रशासन एक प्रतिशत बच्चे ही परिजनों को लौटा पाता है।
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