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भीम हत्याकांड के सभी आरोपियों का हो नारको टेस्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Sun, 31 Jan 2016 02:21 PM IST
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अबोहर के बहुचर्चित भीम हत्याकांड में पकड़े गए आरोपियों का नारको टेस्ट (ब्रेन मैंपिंग) कराने के लिए पीड़ित परिवार ने एसएसपी से मांग की है।
इस संबंध में भीम टांक व गुरजंट सिंह जंटा के परिजन अपने वकील सुरिंद्रपाल तिन्ना के माध्यम से एसएसपी के पास गए। पुलिस ने अदालत में सिर्फ शिव लाल डोडा, अमित डोडा व हैरी का पोलिग्राफ टेस्ट करवाने के लिए प्रार्थना पत्र दे रखा है, जिसकी सुनवाई एक फरवरी को है।
एसएसपी से भीम टांक के पिता कपूर चंद, माता कौशल्या देवी व इस कांड में गंभीर रूप से घायल हुए गुरजंट सिंह जंटा के भाई रणजीत सिंह उर्फ राणा ने मांग की है कि पुलिस द्वारा जब सभी आरोपियों का पोलिग्राफी व नारको टेस्ट करवाया जाए तब उसमें पूछे जाने वाले प्रश्नों में उनके प्रश्न भी शामिल किए जाएं।
इस पर पुलिस कप्तान ने इस मामले में कानूनी राय लेने की बात कही तब वकील सुरिंद्र पाल तिन्ना ने उन्हें बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दो मामलों में इस तरह की मंजूरी दी जा चुकी है। ऐसे में कोई भी कानूनी अड़चन सामने नहीं आनी चाहिए। इस अवसर पर एडवोकेट सुरिंद्रपाल सिंह तिन्ना ने पुलिस कप्तान से यह जानकारी मांगी कि क्या पुलिस ने घटना वाले दिन घटनास्थल शिव लाल डोडा के फार्म हाउस को सील किया था या नहीं।
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वहां पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व ब्लड तथा हेयर सैंपल उसी दिन लिए थे या नहीं। जिस पर पुलिस कप्तान ने जानकारी दी कि जांच करने वाली पुलिस टीम द्वारा घटना के 3-4 दिन पश्चात सारी प्रक्रिया अपनाई गई थी। इस मौके पर तिन्ना ने पुलिस कप्तान से यह भी जानकारी मांगी कि सभी आरोपियों के लाइसेंसी हथियारों को क्या पुलिस ने अभी तक अपने कब्जे में लिया है या नहीं।
जिस पर पुलिस कप्तान ने कहा कि वे इस बारे में जांच करके बताएगे। उधर, पुलिस कप्तान से मुलाकात के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीड़ित परिवार के वकील सुरिंद्रपाल सिंह तिन्ना ने आरोप लगाया कि पुलिस एक गेम प्लान के तहत शिवलाल डोडा व अमित डोडा को क्लीन चिट देकर इस केस से बाहर निकालना चाहती है। इसे कामयाब नहीं होने दिया जायेगा।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने सिर्फ शिव लाल डोडा, अमित डोडा व हैरी के ही पोलीग्राफी टेस्ट की मांग क्यों की है जबकि जांच सभी आरोपियों की होनी चाहिए। इसके अलावा नारको टेस्ट हर जगह पर सिद्ध हुआ एक ऐसा साइंटीफिक तरीका है जिससे पूरे सच को बाहर निकाला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के पांच दिन बाद ही पुलिस द्वारा शिव लाल डोडा के पोलिग्राफी टेस्ट की मांग करना बड़ी ही जल्दबाजी में उठाया गया संदिग्ध कदम दिखाई देता है और पुलिस ने डोडा के साथ उसके भतीजे अमित व हैरी के भी पोलिग्राफी टेस्ट की मांग की है तो ये तो बहुत पहले से ही पुलिस की हिरासत में थे फिर अचानक शिव लाल डोडा के साथ इनके पोलीग्राफी टेस्ट की क्या जरूरत पड़ी।
तिन्ना ने कहा कि पीड़ित परिवार चाहता है कि इस मामले में कोई भी बेकसूर फंसना नहीं चाहिए तथा कोई भी कसूरवार बचना नहीं चाहिए तथा यह भी तभी संभव हो पाएगा जब सभी आरोपियों के नारको टेस्ट की मंजूरी मिलती है।
तिन्ना ने यह भी कहा कि अगर एक फरवरी को पुलिस ने सभी आरोपियों के नारको टेस्ट की मंजूरी का प्रार्थना पत्र अदालत में नहीं दिया तो पीड़ित परिवार स्वयं अदालत का दरवाजा खटखटाएगा।
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इस संबंध में भीम टांक व गुरजंट सिंह जंटा के परिजन अपने वकील सुरिंद्रपाल तिन्ना के माध्यम से एसएसपी के पास गए। पुलिस ने अदालत में सिर्फ शिव लाल डोडा, अमित डोडा व हैरी का पोलिग्राफ टेस्ट करवाने के लिए प्रार्थना पत्र दे रखा है, जिसकी सुनवाई एक फरवरी को है।
एसएसपी से भीम टांक के पिता कपूर चंद, माता कौशल्या देवी व इस कांड में गंभीर रूप से घायल हुए गुरजंट सिंह जंटा के भाई रणजीत सिंह उर्फ राणा ने मांग की है कि पुलिस द्वारा जब सभी आरोपियों का पोलिग्राफी व नारको टेस्ट करवाया जाए तब उसमें पूछे जाने वाले प्रश्नों में उनके प्रश्न भी शामिल किए जाएं।
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इस पर पुलिस कप्तान ने इस मामले में कानूनी राय लेने की बात कही तब वकील सुरिंद्र पाल तिन्ना ने उन्हें बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दो मामलों में इस तरह की मंजूरी दी जा चुकी है। ऐसे में कोई भी कानूनी अड़चन सामने नहीं आनी चाहिए। इस अवसर पर एडवोकेट सुरिंद्रपाल सिंह तिन्ना ने पुलिस कप्तान से यह जानकारी मांगी कि क्या पुलिस ने घटना वाले दिन घटनास्थल शिव लाल डोडा के फार्म हाउस को सील किया था या नहीं।
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वहां पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व ब्लड तथा हेयर सैंपल उसी दिन लिए थे या नहीं। जिस पर पुलिस कप्तान ने जानकारी दी कि जांच करने वाली पुलिस टीम द्वारा घटना के 3-4 दिन पश्चात सारी प्रक्रिया अपनाई गई थी। इस मौके पर तिन्ना ने पुलिस कप्तान से यह भी जानकारी मांगी कि सभी आरोपियों के लाइसेंसी हथियारों को क्या पुलिस ने अभी तक अपने कब्जे में लिया है या नहीं।
जिस पर पुलिस कप्तान ने कहा कि वे इस बारे में जांच करके बताएगे। उधर, पुलिस कप्तान से मुलाकात के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीड़ित परिवार के वकील सुरिंद्रपाल सिंह तिन्ना ने आरोप लगाया कि पुलिस एक गेम प्लान के तहत शिवलाल डोडा व अमित डोडा को क्लीन चिट देकर इस केस से बाहर निकालना चाहती है। इसे कामयाब नहीं होने दिया जायेगा।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने सिर्फ शिव लाल डोडा, अमित डोडा व हैरी के ही पोलीग्राफी टेस्ट की मांग क्यों की है जबकि जांच सभी आरोपियों की होनी चाहिए। इसके अलावा नारको टेस्ट हर जगह पर सिद्ध हुआ एक ऐसा साइंटीफिक तरीका है जिससे पूरे सच को बाहर निकाला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के पांच दिन बाद ही पुलिस द्वारा शिव लाल डोडा के पोलिग्राफी टेस्ट की मांग करना बड़ी ही जल्दबाजी में उठाया गया संदिग्ध कदम दिखाई देता है और पुलिस ने डोडा के साथ उसके भतीजे अमित व हैरी के भी पोलिग्राफी टेस्ट की मांग की है तो ये तो बहुत पहले से ही पुलिस की हिरासत में थे फिर अचानक शिव लाल डोडा के साथ इनके पोलीग्राफी टेस्ट की क्या जरूरत पड़ी।
तिन्ना ने कहा कि पीड़ित परिवार चाहता है कि इस मामले में कोई भी बेकसूर फंसना नहीं चाहिए तथा कोई भी कसूरवार बचना नहीं चाहिए तथा यह भी तभी संभव हो पाएगा जब सभी आरोपियों के नारको टेस्ट की मंजूरी मिलती है।
तिन्ना ने यह भी कहा कि अगर एक फरवरी को पुलिस ने सभी आरोपियों के नारको टेस्ट की मंजूरी का प्रार्थना पत्र अदालत में नहीं दिया तो पीड़ित परिवार स्वयं अदालत का दरवाजा खटखटाएगा।