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कम हो गए बाबा बर्फानी के दर्शन करने वाले
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Fri, 25 Jul 2014 10:13 PM IST
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श्री अमरनाथ की यात्रा में हर साल श्रद्धालुओं की संख्या कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण जेएंडके सरकार और श्राइन बोर्ड के सख्त नियम और श्रद्धालुओं के साथ यात्रा के दौरान अच्छा व्यवहार नहीं करना है। 2012 में करीब बीस दिनों में लगभग साढ़े छह लाख श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए थे।
2013 में यह संख्या घटकर लगभग साढ़े तीन लाख रह गई थी। अब 27 दिन की यात्रा में तकरीबन दो लाख श्रद्धालुओं ने ही माथा टेका है। अब सिर्फ तेरह दिन की यात्रा ही बची है। बालटाल से लंगर समिति के सदस्य नीरज कुमार का कहना है कि वीरवार को बालटाल से एक हजार श्रद्धालु जबकि शुक्रवार को तकरीबन छह सौ श्रद्धालु पवित्र गुफा के दर्शन करने के लिए रवाना हुए।
इस साल कई लंगर समितियों को भी अमरनाथ यात्रा के दौरान भंडारा लगाने की अनुमति नहीं दी गई। बालटाल और पहलगाम के रास्ते में लगभग 97 भंडारे लगे थे। बालटाल में 41 भंडारे लगे थे, जिनमें से नौ भंडारे कश्मीरियों ने फूंक दिए और नौ में तोड़फोड़ कर दी थी। इतना सब कुछ होने के बाद बालटाल में 28 भंडारे चल रहे थे जिनमें से अब दस अगस्त तक छह भंडारे रह जाएंगे। बाकी भंडारे वाले अपने घर लौटना शुरू हो गए हैं। इस बार कश्मीरियों ने नौ भंडारों में आग लगाने की खबर सुनकर कई श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी।
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श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन के महासचिव राजन गुप्ता का कहना है कि 2012 की तुलना में इस बार सिर्फ तीस फीसदी लोगों ने पवित्र गुफा के दर्शन किए हैं जबकि 2012 में साढ़े छह लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बने बाबा बर्फानी के दर्शन किए थे। आर्गेनाइजेशन के प्रधान विजय ठाकुर ने बताया कि इस बार अधिकतर लंगर समितियों को 28 जुलाई तक लंगर लगाने की अनुमति मिली थी।
दस अगस्त तक बालटाल में लगभग छह भंडारे चलेंगे ताकि श्रद्धालुओं को खानपान की कोई परेशानी न हों। इसी तरह पहलगाम में भी भंडारे लगे रहेंगे। इस बार ज्यादा लोग दर्शन करने के लिए नहीं पहुंचे हैं। 2012 का रिकार्ड नहीं टूटा है।
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2013 में यह संख्या घटकर लगभग साढ़े तीन लाख रह गई थी। अब 27 दिन की यात्रा में तकरीबन दो लाख श्रद्धालुओं ने ही माथा टेका है। अब सिर्फ तेरह दिन की यात्रा ही बची है। बालटाल से लंगर समिति के सदस्य नीरज कुमार का कहना है कि वीरवार को बालटाल से एक हजार श्रद्धालु जबकि शुक्रवार को तकरीबन छह सौ श्रद्धालु पवित्र गुफा के दर्शन करने के लिए रवाना हुए।
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इस साल कई लंगर समितियों को भी अमरनाथ यात्रा के दौरान भंडारा लगाने की अनुमति नहीं दी गई। बालटाल और पहलगाम के रास्ते में लगभग 97 भंडारे लगे थे। बालटाल में 41 भंडारे लगे थे, जिनमें से नौ भंडारे कश्मीरियों ने फूंक दिए और नौ में तोड़फोड़ कर दी थी। इतना सब कुछ होने के बाद बालटाल में 28 भंडारे चल रहे थे जिनमें से अब दस अगस्त तक छह भंडारे रह जाएंगे। बाकी भंडारे वाले अपने घर लौटना शुरू हो गए हैं। इस बार कश्मीरियों ने नौ भंडारों में आग लगाने की खबर सुनकर कई श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी।
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श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन के महासचिव राजन गुप्ता का कहना है कि 2012 की तुलना में इस बार सिर्फ तीस फीसदी लोगों ने पवित्र गुफा के दर्शन किए हैं जबकि 2012 में साढ़े छह लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बने बाबा बर्फानी के दर्शन किए थे। आर्गेनाइजेशन के प्रधान विजय ठाकुर ने बताया कि इस बार अधिकतर लंगर समितियों को 28 जुलाई तक लंगर लगाने की अनुमति मिली थी।
दस अगस्त तक बालटाल में लगभग छह भंडारे चलेंगे ताकि श्रद्धालुओं को खानपान की कोई परेशानी न हों। इसी तरह पहलगाम में भी भंडारे लगे रहेंगे। इस बार ज्यादा लोग दर्शन करने के लिए नहीं पहुंचे हैं। 2012 का रिकार्ड नहीं टूटा है।